दैनिक भास्कर - मैनजमेंट फ़ंडा    
एन. रघुरामन, मैनजमेंट गुरु 

यात्रा में हमेशा सतर्क रहना क्यों जरूरी है?

यात्रा में हमेशा सतर्क रहना क्यों जरूरी है?
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April 16, 2021

यात्रा में हमेशा सतर्क रहना क्यों जरूरी है?


मैं हमेशा यात्रा के लिए सामान पैक करने से पहले खाने की चीजों समेत सब कुछ खोलकर देखने पर जोर देता हूं। कुछ इसे मेरी बेवकूफी कहते हैं। लेकिन मैं एयरपोर्ट बैगेज की जांच करने वाले पुलिस वालों के सामने शर्मिंदा होने से ज्यादा मूर्ख कहलाना पसंद करता हूं।

पिछले दो सालों से मैं यह वास्तविक उदाहरण दे रहा हूं, जिसमें इस हफ्ते आश्चर्यजनक मोड़ आया।


मोहम्मद शरीक़ (29) और उसकी पत्नी ओनिबा कुरैशी (29), दोनों 6 जुलाई 2019 को अपने दूसरे हनीमून पर क़तर गए। शरीक की बुआ तबस्सुम ने ट्रिप का खर्च उठाया। उसने टिकट बुक किया और एक बैग दिया, जिसमें उसके मुताबिक तंबाकू था। उसने कहा कि दोहा के हमद अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर एक व्यक्ति शरीक से बैग ले जाएगा। लैंडिंग के बाद उस व्यक्ति की जगह एंटी-ड्रग अधिकारियों ने आकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया और बैग से 4.1 किग्रा हशीश बरामद किया। दोनों को उस साल नवंबर में तीन लाख रियाल के जुर्माने के साथ 10 साल के लिए जेल भेज दिया गया।


शरीक के पिता ने दोहा जाकर बेटे की कहानी सुनी और अधिकारियों ने उन्हें शरीक का सामान सौंप दिया। उसने पिता से कहा कि उसकी बेगुनाही का सबूत मोबाइल में है। वह अपने फोन में ऑटो रिकॉर्डिंग चालू रखता था। रिकॉर्डिंग से पता चला कि उसने हनीमून पर जाने से इंकार किया था लेकिन बुआ ने जबरन भेजा।


इस बीच ओनिबा के पिता ने सितंबर 2019 में यह आरोप लगाते हुए मुंबई के नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) में मामला दर्ज करवाया कि उनके बेटी-दामाद को फंसाया गया है। दामाद कोरियाई कंपनी में अच्छे वेतन पर काम करता है, उसे ड्रग तस्करी की जरूरत नहीं है। एनसीबी के संयुक्त निदेशक केपीएस मल्होत्रा ने जांच में पाया कि दंपति को ड्रग सिंडिकेट ने फंसाया था।


मुंबई पुलिस ने अपनी जांच से योगदान दिया। तब्बसुम और उसके सहयोगी निज़ाम कारा को दिसंबर 2019 में कोकीन रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया और फरवरी 2020 में एनसीबी ने चंडीगढ़ में चार लोगों को 1.4 किग्रा चरस के साथ गिरफ्तार किया, जो कारा और उसकी पत्नी सहीदा के लिए काम कर रहे थे।


पूरी जांच के बाद एनसीबी ने अपने और मुंबई पुलिस के नतीजों का डोजियर भारतीय दूतावास को दिया, जिसने इस साल जनवरी में क़तर की सर्वोच्च अदालत ‘कोर्ट ऑफ कैसेशन’ में अपील की। अदालत ने दंपति के तर्कों को माना और मामला निचली अदालत में भेज दिया, जिसकी सुनवाई 29 मार्च को हुई और दंपति आरोप मुक्त हो गए। इस बीच दंपति ने दो साल जेल में बिताए और ओनिबा ने बेटी आयत को जन्म दिया, जो क़तर जेल में अब डेढ़ साल की हो गई है।


शायद यह ऐसा पहला मामला है जिसमें विदेशी अदालत ने भारतीय एजेंसी की जांच के आधार पर दंपति को रिहा किया। दोनों इस हफ्ते मुंबई आएंगे। दंपति एक-दूसरे से लगभग दो साल बाद मिलेंगे और आयत ने पहली बार पिता को देखा।


यह सारा आघात यात्रा से पहले सामान न जांचने की छोटी-सी गलती से हुआ। मुझे याद है कि मैंने एक बार पत्नी के सूटकेस से ‘गजक’ का पैकेट निकलवाया था, जो मेरे दुबई के रिश्तेदारों के लिए खासतौर पर ग्वालियर से मंगवाई गई थी। ऐसा इसलिए क्योंकि गजक में ऊपर से डाली जाने वाली खस-खस खाड़ी देशों में प्रतिबंधित है। इसे यहां ड्रग मानते हैं। भारत में यह आमतौर पर इस्तेमाल होती है, लेकिन यूएई में इसे रखना अपराध है, जिसके लिए मौत की सजा तक हो सकती है।


फंडा यह है कि यात्रा के दौरान हमेशा सजग, सतर्क रहें, वरना आप मुश्किल में पड़ सकते हैं।

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