• Nirmal Bhatnagar

करना हो राज दिलों पर तो अपनाएँ यह सूत्र !!!

Oct 06, 2022

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

सर्वप्रथम सभी पाठकों को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक त्यौहार दशहरे की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!!!


दोस्तों, अगर आप लोगों के दिलों पर राज करना चाहते हैं, अपनी छाप हमेशा के लिए उनपर छोड़ना चाहते हैं तो सबसे पहले आलोचना, निंदा तथा शिकायत करना बंद कर दें। याद रखिएगा दोस्तों, इस संसार में ईश्वर को छोड़कर सारा संसार ही दोषपूर्ण है। अर्थात् इस दुनिया में कोई भी इंसान सर्वगुण सम्पन्न नहीं है, हर किसी में कुछ ना कुछ कमियाँ हैं। लेकिन कमियों के होने का कहीं से भी अर्थ यह नहीं है कि उन लोगों में कोई अच्छाई या गुण नहीं है।


वैसे भी दूसरों में कमियाँ निकालना या उनके दोषों को गिनना, निंदा, शिकायत या आलोचना करना सबसे ज़्यादा हमें ही नुक़सान पहुँचाता है क्यूँकि उपरोक्त सभी भाव नकारात्मक हैं। इसका अर्थ हुआ जब आप उपरोक्त कार्य को समय देते हैं तब आप अपना समय, ऊर्जा और क्षमता को नकारात्मक कार्यों में लगाते हैं, जो अंततः आपके अंतर्मन पर नकारात्मक प्रभाव ही डालता है। इसके विपरीत, जिनके लिए यह बात कही गई है वह स्वयं वैसा ही है तो उसको आपकी बातों से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ेगा और अगर आप किसी समझदार, सकारात्मक व्यक्ति के दोष निकालते हुए उसकी निंदा, आलोचना या शिकायत करते हैं, तो वे उसे सुनकर अपनी कमियों को पहचानने का प्रयास करते हैं और फिर उन्हें दूर कर खुद को बेहतर बनाते हैं।


उपरोक्त बात को आधार बनाकर देखा जाए तो जिन्होंने निंदा, आलोचना या शिकायत की, उन्होंने अपना समय नकारात्मक भावों के साथ गुज़ारा और इसके ठीक विपरीत जिस समझदार व्यक्ति के लिए उपरोक्त बातें कही गई थी उसने उनसे खुद को बेहतर बनाया। दूसरे शब्दों में कहूँ तो उसके दोष धीरे-धीरे उसको छोड़कर चले जाते है। अब सबसे बड़ा सवाल आता है दोष आख़िर गए कहाँ? तो मेरा मानना है दोष उसके हृदय में गए जिसने उन्हें खोजकर निंदा, आलोचना तथा शिकायत की क्यूँकि वही तो इनके साथ ज़्यादा समय बिता रहा था।


खुद को बेहतर बनाने के लिए ही तो शायद हमें सिखाया गया है, ‘निंदक नियरे राखिए…’, जिससे हम हर पल खुद को बेहतर, और बेहतर बना सकें। वैसे इसका एक और फ़ायदा होगा, आप स्वयं को सुधारने के साथ-साथ दोष ढूँढ निंदा, आलोचना तथा शिकायत करने वाले को भी एहसास करवा देते हैं कि वह नकारात्मक बातों में समय लगाकर भूल कर रहा है। इसका फ़ायदा यह होता है कि अपनी भूल या गलती समझकर वह व्यक्ति भी अपने स्वभाव में सुधार करने का प्रयत्न करने लगता है और अंततः दोनों तरह के लोगों को लाभ मिलने लगता है। बस किसी को जल्दी, तो किसी को क़ीमती जीवन का एक बड़ा हिस्सा गँवाने के बाद।


दोस्तों, अगर आपकी प्राथमिकता खुद को बेहतर बनाना और दूसरों के दिलों पर राज करना या अपनी छाप छोड़ना है तो सबसे पहले दूसरों के दोष देखने के स्थान पर खुद की कमियों को पहचानने और उन्हें स्वीकारने का साहस विकसित कीजिए। जी हाँ, जब आपमें दोष देखने या पहचानने की क्षमता या दृष्टि है तो आप उसी शक्ति से गुण भी देख सकते हैं। इस शक्ति का इस्तेमाल कर अपने दोष और दूसरों के गुण देखना शुरू कीजिए। अपने जीवन को बेहतर बनाने और दूसरों के दिल में जगह बनाने का यह एक बेहतरीन तरीक़ा है। जब आप खुद की कमियाँ या दोष देखते हैं, उन्हें स्वीकारते हैं तो दूसरों द्वारा उन्हीं दोषों या कमियों को दिखाने पर आप कोई अप्रिय या प्रतिकूल प्रतिक्रिया नहीं देंगे। आपका यह व्यवहार आपको द्वेष, ईर्ष्या, वाद-विवाद, कुंठा, अनावश्यक लड़ाई, खुद को नुक़सान पहुँचाने वाले विचारों या विकारों से बचाता है। क्रोध, निंदा, आलोचना, प्रत्यालोचना या शिकायत ना करने से आपके दुर्गुण खत्म होंगे और गुणों का विकास होगा जो अंततः आपके निंदकों को आपका प्रशंसक बना देगा। तो आईए दोस्तों, आज से हम दूसरों में दोष देखने, उनकी निंदा, शिकायत या आलोचना करने में अपना अमूल्य समय एवं अनमोल शक्ति बर्बाद करने के स्थान पर, इसी समय और शक्ति को खुद को बेहतर बनाने और सत्कर्म करने में लगाते हैं, जिससे हम अपने जीवन को अच्छे से जीने के साथ-साथ इस दुनिया को भी बेहतर बना पाएँगे और इस दशहरे को अपने अंदर के कुछ दुर्गुणों को मारकर, अपनी बुराई पर अच्छाई की जीत का परचम लहरा पाएँगे। आप सभी को पुनः दशहरे की हार्दिक शुभकामनाएँ!!!


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

nirmalbhatnagar@dreamsachievers.com


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