बच्चों को स्वयं का श्रेष्ठतम संस्करण बनने के लिए प्रेरित करें…
- Nirmal Bhatnagar

- Jun 3
- 3 min read
June 3, 2026
फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, कुछ ही दिनों में नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने वाला है। देशभर के विद्यालयों में तैयारियाँ जोरों पर हैं। कहीं कक्षाओं की सजावट हो रही है, कहीं पुस्तकों और अन्य जरूरत की चीजों की व्यवस्था की जा रही है, कहीं समय-सारिणी बनाई जा रही है और कहीं शिक्षक नई योजनाओं के साथ विद्यार्थियों का स्वागत करने के लिए उत्साहित हैं। लेकिन इस बार मैं शिक्षा जगत से जुड़े अपने सभी साथियों से एक प्रश्न पूछना चाहता हूँ, “क्या हम केवल नई कक्षाएँ तैयार कर रहे हैं या एक नई सोच भी तैयार करने की तैयारी कर रहे हैं?
ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि आज शिक्षा के संदर्भ में सबसे बड़ा प्रश्न यह नहीं है कि बच्चों को क्या पढ़ाया जाए बल्कि यह है कि बच्चों को कैसे सोचने, सीखने और जीवन जीने के लिए तैयार किया जाए?, लंबे समय तक हमारी शिक्षा व्यवस्था का केंद्र ज्ञान देना था। शिक्षक बोलते थे और विद्यार्थी सुनते थे। शिक्षक प्रश्न पूछते थे और विद्यार्थी उत्तर देते थे। लेकिन आज का समय बदल चुका है। आज ज्ञान रूपी जानकारी याने इनफार्मेशन हर बच्चे की जेब में मौजूद है। मोबाइल फोन और इंटरनेट ने ज्ञान तक पहुँच को आसान बना दिया है। अब शिक्षक की भूमिका केवल जानकारी देने वाले व्यक्ति की नहीं बल्कि एक मार्गदर्शक, प्रेरक, सहयोगी और जीवन-निर्माता की है। नए युग की कक्षा में शिक्षक का काम उत्तर देना नहीं, बल्कि ऐसे प्रश्न पैदा करना है जो बच्चों को सोचने के लिए प्रेरित करें क्योंकि उत्तर किताबों में मिल सकते हैं, लेकिन प्रश्न केवल जिज्ञासु मन ही पैदा कर सकता है और जहाँ प्रश्न जन्म लेते हैं, वहीं से नवाचार, रचनात्मकता और सीखने की वास्तविक यात्रा शुरू होती है।
दोस्तों, हम सबने अपने जीवन में ऐसे शिक्षक अवश्य देखे होंगे जिनकी पढ़ाई गई पुस्तकें तो शायद हमें याद नहीं रहीं, लेकिन उनके शब्द आज भी हमारे भीतर जीवित हैं। क्यों? क्योंकि शिक्षक केवल विषय नहीं पढ़ाते, वे व्यक्तित्व गढ़ते हैं। उनकी कही हुई एक बात किसी बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ा सकती है। उनकी एक प्रशंसा किसी विद्यार्थी का भविष्य बदल सकती है और दुर्भाग्य से उनकी एक तुलना किसी बच्चे का आत्मविश्वास तोड़ भी सकती है। इसलिए नए सत्र की शुरुआत के साथ हमें एक संकल्प लेना होगा, “हम बच्चों की तुलना नहीं करेंगे, उनकी प्रतिभा को पहचानेंगे।”
याद रखिएगा, हर बच्चा अलग है। कोई गणित में उत्कृष्ट है, कोई कला में। कोई खेल में चमकता है, कोई संगीत में। कोई मंच पर आत्मविश्वास से बोलता है, तो कोई चुपचाप बैठकर दुनिया को नए दृष्टिकोण से देखता है। शिक्षक का कार्य सभी बच्चों को एक जैसा बनाना नहीं है। शिक्षक का कार्य प्रत्येक बच्चे को उसका सर्वश्रेष्ठ स्वरूप बनने में सहायता करना है। आज दुनिया को केवल अच्छे अंक लाने वाले विद्यार्थियों की आवश्यकता नहीं है। दुनिया को ऐसे युवाओं की आवश्यकता है जो जिज्ञासु हों, संवेदनशील हों, समस्या समाधान कर सकें, सहयोग करना जानते हों और जीवनभर सीखते रहने का साहस रखते हों और ऐसे विद्यार्थी तभी तैयार होंगे जब कक्षा का वातावरण विश्वास, सम्मान और जिज्ञासा पर आधारित होगा।
दोस्तों, समाज का परिवर्तन किसी संसद, किसी नीति या किसी योजना से पहले कक्षा में शुरू होता है। जब शिक्षक बदलता है, तब कक्षा बदलती है। जब कक्षा बदलती है, तब विद्यार्थी बदलते हैं और जब विद्यार्थी बदलते हैं, तब भविष्य बदलता है। इस नए शैक्षणिक सत्र में आइए हम केवल नई किताबें न खोलें, बल्कि नई संभावनाओं के द्वार भी खोलें क्योंकि एक महान शिक्षक विद्यार्थियों को क्या सोचना है यह नहीं सिखाता बल्कि वह उन्हें सोचने, खोजने, प्रश्न पूछने और स्वयं का श्रेष्ठतम संस्करण बनने के लिए प्रेरित करता है।
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर




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