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कल को बनाना हो सुनहरा, तो आज जिएँ सही से…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • 2 days ago
  • 3 min read

Aug 29, 2025

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

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दोस्तों, अक्सर हम या तो अतीत की गलतियों में उलझे रहते हैं या फिर भविष्य की चिंता में खो जाते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि हम अपने वर्तमान याने जीवन को खो देते हैं। ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि जीवन हमें सिर्फ़ वर्तमान क्षण में ही मिलता है। याद रखिएगा दोस्तों, पश्चाताप अतीत को नहीं बदलता, चिंता भविष्य को नहीं बदलती, लेकिन कृतज्ञता वर्तमान को बदल देती है। यही सफल, सुखद और शांत जीवन का रहस्य है।


इसका सीधा-सीधा अर्थ हुआ कि यदि हम हर दिन को कृतज्ञता के साथ जीना शुरू कर दें तो निश्चित तौर पर हमारे अंदर यह एहसास आ जायेगा कि ‘जो हमारे पास है, वही पर्याप्त है और उसी से हम नए अवसर बना सकते हैं।’ इतना ही नहीं कृतज्ञता हमें संतोष देने के साथ-साथ ऊर्जा, उत्साह और आत्मविश्वास भी प्रदान करती है और यही वर्तमान की सबसे बड़ी शक्ति है।


संतुष्टि के एहसास से पूर्ण जीवन जीने के इस मार्ग को अपनाते वक्त एक बाद याद रखियेगा, जीवन में विकास का मार्ग आलोचनाओं से भरा होता है। याने जीवन में आप जैसे ही ग्रोथ माइंडसेट अपनाते हैं, आपके आसपास मौजूद लोग आपको, ख़ुद से अलग मानने लगते हैं और आपकी आलोचना करना शुरू कर देते हैं। यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। लोग अक्सर बदलाव और सकारात्मक सोच से डरते हैं, क्योंकि यह उन्हें उनकी सीमाओं का अहसास कराती है। इसलिए ग्रोथ के मार्ग पर चलते वक्त हमें यह याद रखना जरूरी है कि आलोचना हमेशा बाधा नहीं होती।


जी हाँ, आलोचना को हमें हल्की और सौम्य बारिश के समान मानना चाहिए जो हमारे विकास के पौधे को सही तरीके से पोषित करने के लिए आती है। इसका अर्थ हुआ जो लोग सच्चे सकारात्मक विचारक होते हैं, वे आलोचना को अपने लिए खाद और पानी की तरह इस्तेमाल करते हैं। वे इसे विनम्रता से स्वीकार करते हैं, उससे सीखते हैं और, और भी मज़बूत बनकर आगे बढ़ते हैं। इसलिए आलोचना से डरिए मत, उसे अपनाइए क्योंकि वही आपको और मज़बूत बनाएगी।


सकारात्मक सोच की इसी ताक़त को समझाते हुए विंस्टन चर्चिल ने कहा था, “सकारात्मक सोचने वाला व्यक्ति वह देख लेता है जो दूसरों को दिखाई नहीं देता; वो वह महसूस कर लेता है जिसे छूना असंभव है, और वह प्राप्त कर लेता है जिसे लोग असंभव मानते हैं।” यानी सकारात्मक सोच केवल सोचने का तरीका नहीं है, बल्कि एक दृष्टिकोण है जो अदृश्य को दृश्य में और असंभव को संभव में बदल देता है। जब आप अपनी दृष्टि को सकारात्मकता की ओर मोड़ते हैं, तो आपके भीतर अद्भुत साहस और रचनात्मकता जागृत होती है।


दोस्तों, अगर आप सकारात्मकता के साथ वर्तमान में जीते हुए अपना जीवन बदलना चाहते हैं तो यह तीन बातें याद रखिए—

१) अतीत पर पश्चाताप न करें, उससे केवल सबक लें।

२) भविष्य की चिंता न करें, उसकी तैयारी करें।

३) वर्तमान में कृतज्ञता के साथ जिएँ क्योंकि वही आपकी असली पूँजी है।


दोस्तों, जीवन की सच्चाई यही है कि न तो पछतावा हमें आगे बढ़ाता है और न ही चिंता। हमें आगे बढ़ाते है सिर्फ कृतज्ञता और सकारात्मक दृष्टिकोण। जब हम वर्तमान में जीना सीख लेते हैं, तो आलोचना भी हमें रोक नहीं सकती और दुनिया की कोई ताक़त हमें सपनों को साकार करने से नहीं रोक सकती। याद रखिएगा, जीवन आज है और यदि आज को सही ढंग से जिया जाए, तो कल अपने आप सुनहरा बन जाएगा।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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