कोशिश करने वालों की हार नहीं होती…
- Nirmal Bhatnagar

- Oct 31
- 2 min read
Oct 31, 2025
फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, हमारा सामाजिक तानाबाना ही कुछ ऐसा है, जहाँ हमें कंडीशंड माइंड सेट के साथ ही देखा जाता है। जैसे अगर हम ‘खामोश’ हैं तो हमारी इस खामोशी को उदासी से जोड़ कर देखा जायेगा और अगर हम मुस्कुरा रहे हैं तो हमारी मुस्कुराहट को दिखावा समझ लिया जायेगा। इसी तरह अगर आप शांत रहेंगे तो लोग कहेंगे, “इसके साथ कुछ तो हुआ है,” और अगर आप खुश रहेंगे, तो पूछेंगे, “इतनी खुशी की वजह क्या है?”
दोस्तों, इस विषय में सच तो यह है कि लोग हमेशा कुछ न कुछ कहेंगे। जब आप असफल होंगे तो आलोचना करेंगे, और जब सफल होंगे तो कहेंगे, “किस्मत साथ थी।” इसलिए मेरा मानना है कि लोगों को ऐसी बातों का जवाब देने से बेहतर, अपने रास्ते पर अडिग रहना है, वह भी बिना किसी की राय या आलोचना से प्रभावित हुए। जी हाँ दोस्तों, बुद्धिमत्ता इसी बात में है कि हम बिना किसी भी बात या व्यक्ति से प्रभावित हुए, अपने रास्ते पर चलते रहें क्योंकि अगर निंदा से डरकर हम अपना लक्ष्य छोड़ देंगे, तो हम स्वयं ही लक्ष्य के योग्य नहीं रहेंगे।
इसके विपरीत अगर आप अपनी राह पर अडिग रहते हुए अपने लक्ष्य पा लेते हैं, तो वही लोग जो पहले आपका मजाक उड़ाते थे, आपकी तारीफ़ करने लगते हैं। हाँ यह भी सही है कि अपनी राह पर अडिग रहते वक्त कई बार असफलता हाथ लगती है। ऐसी स्थिति में उससे सीख लें और फिर से सफल होने तक प्रयास करें। याद रखिएगा, जीवन में यह मायने नहीं रखता कि आप कितनी बार गिरे, बल्कि मायने तो यह रखता है कि गिरने के बाद आप कितनी बार फिर उठे।
याद रखिएगा दोस्तों, कोशिश अंतिम सांस तक करनी चाहिए, क्योंकि कोशिश हमें या तो मंज़िल तक पहुँचा देती है, या फिर हमें अनुभव देती है और कोशिश और अनुभव दोनों ही हमारे जीवन के असली ख़ज़ाने है। दोस्तों, इस दुनिया में हार का डर केवल उसी को होता है, जो हार को अंत समझता है। लेकिन जो हर असफलता को सीढ़ी मान लेता है, वह हर ठोकर के साथ और मज़बूत बनता जाता है।
वैसे भी जीवन का असली आनंद तब आता है जब हम लोगों की अपेक्षाओं से नहीं, अपने विश्वास से जीवन जीना सीख जाते हैं। जब हम खुद पर भरोसा करना शुरू करते हैं, तो बाहरी आवाज़ें धीरे-धीरे मौन हो जाती हैं। अंत में इतना ही कहूँगा दोस्तों कि ईश्वर के द्वारा दिया गया हर नया दिन, एक नया अवसर है। इसलिए बीते कल की असफलताएँ हमें आज रोक नहीं सकती हैं बशर्ते हम आज फिर से शुरुआत करने का साहस रखें। इसलिए दोस्तों, दूसरों के कहे शब्दों पर नहीं बल्कि अपनी आत्मा की आवाज़ पर विश्वास रखिए क्योंकि वही आवाज़ आपको उस मंज़िल तक ले जाएगी, जहाँ पहुँचकर आप मुस्कुराकर कह सकेंगे — “हाँ, मैंने कोशिश की थी… और वही मेरी सबसे बड़ी जीत थी।”
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर




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