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जिएँ जीवन सिस्टम से…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • Dec 6, 2025
  • 3 min read

Dec 6, 2025

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, अक्सर हमें लगता है कि जीवन में तनाव, संघर्ष, रिश्तों की दूरी, अधूरे सपने और मन की अशांति आदि सब खराब लोगों, खराब किस्मत या खराब परिस्थितियों की वजह से होते हैं। लेकिन यह धारणा सच्चाई से कोसों दूर है। मेरा तो यहाँ तक मानना है कि जिस तरह कोई कम्पनी, फैक्ट्री या व्यवसाय बिना सिस्टम के नहीं चल सकता, ठीक उसी तरह जीवन भी बिना सिस्टम के नहीं चल सकता। इसी बात को समझाते हुए महान इनोवेटर और व्यवसायी हेनरी फोर्ड ने लगभग एक सदी पहले कहा था, “अगर आप प्रवाह बनाते हैं, तो आप भाग्य बनाते हैं।” यानी कि जब आपका सिस्टम ठोस होता है, आपकी सफलता भी स्थिर हो जाती है।


उपरोक्त आधार पर कहा जाए तो जीवन में समस्या भाग्य, किस्मत या लोगों की वजह से नहीं, बल्कि हमारे खराब सिस्टम की वजह से होती है। लेकिन अक्सर हम इस अराजक या विपरीत समय को “भाग्य” का नाम दे देते हैं, जबकि सच यह है कि हर बिगड़ी हुई चीज़ के पीछे, एक बिगड़ा हुआ सिस्टम होता है। उदाहरण के लिए अगर आपका टाइम मैनेजमेंट सही नहीं है, तो समस्या समय की नहीं बल्कि अस्पष्ट विचारों और बिगड़ी हुई प्राथमिकता की है। अर्थात् अगर आप अपना टाइम मैनेजमेंट सुधारना चाहते हैं तो आपको पहले अपना माइंड मैनेज करना सीखना होगा।


इसी तरह अगर आप अक्सर अपने लक्ष्य पाने से चूक जाते हैं, तो समस्या भाग्य या लक्ष्य की नहीं बल्कि टास्क और ट्रैकिंग सिस्टम की है। अगर आप महसूस कर रहे हैं कि आपका मन कुछ ही देर में भटक जाता है, तो दोष चमक-दमक से भरी दुनिया का नहीं बल्कि फोकस सिस्टम का है और अगर आपके रिश्ते बार-बार टूट रहे हैं, तो समस्या लोगों की नहीं, कम्युनिकेशन सिस्टम की है। यकीन मानियेगा दोस्तों, ऐसी ही अनेक ग़लत धारणाओं के कारण हम अक्सर लोगों को बदलने में सालों लगा देते हैं, पर अपने सिस्टम को बदलने में 10 मिनट भी नहीं लगाते।


यकीन मानियेगा, जीवन को बदलने के लिए यह “सिस्टम” वाली सोच ज़रूरी है क्योंकि दुनिया में हर स्थायी चीज़ किसी ठोस व्यवस्था याने सिस्टम पर खड़ी है। उदाहरण के लिए सूरज रोज़ सही समय पर उगता है, क्योंकि प्रकृति का सिस्टम है। इसी तरह ट्रेन योजनाबद्ध तरीके से इसलिए चलती है क्योंकि रेलवे का सिस्टम है और बैंक आपका पैसा इसलिए सुरक्षित तौर पर सम्भाल पाते हैं क्योंकि बैंक चलाने के लिए फाइनेंशियल सिस्टम होता है।


दोस्तों, जब दुनिया की हर चीज़ सिस्टम से चलती है, तो मानव जीवन भी तो सिस्टम से ही चलेगा अन्यथा सिस्टम के बिना जीवन, उस घर के समान होगा, जिसे बिना फाउंडेशन के बनाया गया हो। इसलिए मैं हमेशा कहता हूँ कि अगर जीवन में भागदौड़, तनाव और टालमटोल वाली स्थिति है तो आप जीवन बिना टाइम सिस्टम या बिना माइंड मैनेज करे जी रहे हैं। इसी तरह अधूरे सपने बिना टास्क सिस्टम के कारण होते हैं; बिखरा हुआ मन, जीवन में फोकस सिस्टम के ना होने के कारण होता है और रिश्तों का टूटना, कमजोर संवाद सिस्टम की वजह से होता है।


याद रखियेगा दोस्तों, अगर आपका जीवन सुधर नहीं पा रहा है तो मेरी नजर में इसकी सिर्फ़ एक वजह है, हम परिणाम तो बदलना चाहते हैं, पर प्रक्रिया को नहीं बदलते। अगर आप जीवन बदलना चाहते हैं तो सबसे पहले अपने हर दिन को सर्वोत्तम बनाने के लिए सुबह 20 मिनट 3 मुख्य लक्ष्यों पर आधारित योजना बनाएँ और रात को 5 मिनट समीक्षा करें। इसी तरह प्रतिदिन कम से कम 4 घंटे मोबाइल को दूर रख पूर्ण फोकस के साथ काम करें और इस सूत्र को याद रखो “कार्य भले छोटा करो, पर पूरा करो।” और अपने रिश्तों में स्पष्टता, सम्मान और प्रतिक्रिया पर आधारित संवाद सिस्टम अपनाओ। यकीन मानियेगा दोस्तों इन छोटे बदलावों को जीवन में अपनाना आपकी आधी से ज़्यादा समस्याओं को खत्म कर देगा।


अंत में इतना ही कहूँगा, जीवन जादू से नहीं, सिस्टम से बदलता है और सिस्टम कोई बड़ी मशीन नहीं बल्कि जीवन जीने के छोटे-छोटे नियम होते हैं, जो रोज़ आपका जीवन सँभालते हैं, और अंततः भाग्य बदल देते हैं। जब आपका जीवन घड़ी की तरह व्यवस्थित होने लगता है, तब आपका जीवन, सफलता की मशीन की तरह दौड़ने लगता है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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