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सुनें सबकी लेकिन मानें अपने मन की !!!

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • Mar 2
  • 3 min read

Mar 2, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, जीवन में सलाह देना आसान है, पर सही निर्णय लेना कठिन क्योंकि सलाह देने वाला व्यक्ति अपने अनुभव से बोलता है और हर अनुभव, हर व्यक्ति के लिए सही हो, यह ज़रूरी नहीं। चलिए इस बात को हम एक ऐसी कहानी से समझने का प्रयास करते हैं जो हमें इस सच को समझाने के साथ-साथ हमें स्वविवेक का अमूल्य पाठ सिखाती है।


गर्मी के मौसम में जंगल की सूखी हवा में एक लकड़बग्घा प्यास से व्याकुल भटक रहा था। जीभ सूखने के कारण उसके कदम लड़खड़ा रहे थे। तभी उसे दूर से चमकती हुई एक नदी दिखाई दी। वह दौड़ पड़ा और किनारे पहुँचकर जल्दी-जल्दी पानी पीने लगा। ठंडा पानी गले से उतरते ही उसे जीवन लौटता महसूस हुआ। प्यास बुझी तो मन में एक और विचार आया—इतनी गर्मी है, क्यों न नदी के बीच जाकर स्नान भी कर लिया जाए। लेकिन एक समस्या थी, उसे नदी की गहराई का अंदाज़ा नहीं था। पास ही एक ऊँट खड़ा था। लकड़बग्घे ने उससे पूछा, “ताऊ, पानी कितना गहरा है? कहीं मैं डूब तो नहीं जाऊँगा?” ऊँट मुस्कुराया और बोला, “अरे नहीं, घुटनों तक ही है। मैं अभी नहा कर आया हूँ। तू भी चला जा।” बस इतना सुनना था कि लकड़बग्घे ने बिना सोचे छलाँग लगा दी। पर जैसे ही वह बीच में पहुँचा, पानी उसकी गर्दन से ऊपर चला गया। वह घबराने लगा। कभी सिर बाहर निकालता, कभी गोता खाता। बड़ी मुश्किल से तैरकर किनारे पहुँचा। हाँफते हुए उसने गुस्से में ऊँट से कहा, “तुमने झूठ क्यों बोला? तुमने कहा था पानी घुटनों तक है! मैं तो डूब ही गया था।” ऊँट शांत स्वर में बोला, “मैंने सच ही कहा था—पानी मेरे घुटनों तक है। पर मैंने यह नहीं कहा था कि वह तेरे घुटनों तक भी होगा।”


लकड़बग्घा चुप हो गया। उसे समझ आ गया, गलती ऊँट की नहीं, उसकी अपनी थी। उसने बिना सोचे, बिना परखे, दूसरों की बात पर भरोसा कर लिया था।


दोस्तों, यही जीवन का गहरा सत्य है। हर व्यक्ति अपने अनुभव की रोशनी में सलाह देता है। जो बात उसके लिए सही है, जरूरी नहीं कि वह हमारे लिए भी सही हो। दूसरों की राह हमारे लिए रास्ता बन सकती है, पर मंज़िल तक पहुँचने के लिए अपने विवेक का दीपक जलाना ही पड़ता है। दुनिया में हर तरह के लोग मिलेंगे, कोई कहेगा यह करो, कोई कहेगा वह करो। कोई कहेगा जोखिम लो, कोई कहेगा सुरक्षित रहो। लेकिन निर्णय वही सही होता है जो आपकी समझ, आपकी परिस्थिति और आपकी क्षमता के अनुसार लिया जाए। याद रखिए, दूसरों का अनुभव दिशा दे सकता है, पर निर्णय आपको ही लेना होता है।


जीवन में कई लोग इसलिए असफल होते हैं क्योंकि वे दूसरों की नकल करते हैं। वे भूल जाते हैं कि हर व्यक्ति की यात्रा अलग होती है, हर परिस्थिति अलग होती है और हर क्षमता अलग होती है। जो रास्ता किसी और को शिखर तक ले गया, वही रास्ता आपको खाई में भी ले जा सकता है—अगर वह आपके लिए बना ही न हो।


इसलिए आज से एक नियम बना लीजिए, सलाह सबकी सुनिए, पर निर्णय अपने विवेक से लीजिए क्योंकि विवेक ही वह आंतरिक कम्पास है जो आपको सही दिशा दिखाता है, चाहे रास्ता कितना भी धुंधला क्यों न हो।


दोस्तों, जीवन की सबसे बड़ी सुरक्षा बाहरी सलाह नहीं, भीतरी समझ होती है। सतर्क रहिए, सजग रहिए, और हर कदम सोच-समझकर बढ़ाइए क्योंकि जो व्यक्ति अपने विवेक से चलता है, वही जीवन की नदी पार करता है, और जो केवल दूसरों के शब्दों पर चलता है, वह बीच धारा में डूब जाता है और याद रखिए, सफल वही होता है, जो सुनता सबकी है, लेकिन मानता अपने मन की है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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