डर के आगे ही जीत है !!!
- Nirmal Bhatnagar

- 2 hours ago
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Apr 17, 2026
फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, जीवन में हम सभी किसी न किसी डर के साथ जीते हैं, कभी असफलता का डर, कभी भविष्य का डर, कभी खो देने का डर। और कई बार यही डर हमें इतना घेर लेता है कि हम जीना भूल जाते हैं। चलिए, इसे एक छोटी सी कहानी से इसे समझते हैं…
एक बड़े शहर में एक कॉर्पोरेट ऑफिस था। वहाँ काम करने वाले लोग हर दिन एक ही डर के साथ ऑफिस आते थे, “आज कहीं बॉस नाराज़ न हो जाए…”, “कहीं हमारी गलती पकड़ न ली जाए…”, “कहीं नौकरी खतरे में न पड़ जाए…” ऑफिस में हर कोई तनाव में था। लोग काम तो कर रहे थे, लेकिन डर के साथ। कोई खुलकर अपनी बात नहीं रखता, कोई नए आइडिया नहीं देता… सब सिर्फ बचने की कोशिश में लगे रहते।
लेकिन उसी ऑफिस में एक युवा कर्मचारी था, हमेशा शांत, आत्मविश्वासी और खुश। उसे देखकर बाकी लोग हैरान रहते थे। वही काम, वही माहौल… फिर भी वह तनाव में नहीं रहता था। एक दिन कुछ लोगों ने उससे पूछा, “तुम्हें डर नहीं लगता? अगर कोई गलती हो गई तो? अगर बॉस ने कुछ कह दिया तो?” वह मुस्कुराया और बोला, “डर तो तब लगता है जब हम छिपने की कोशिश करते हैं।” उसका जवाब सुन सब चौंक गए, लेकिन वह पूरी तरह शांत रहा।
एक क्षण रुकने के बाद उसने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा, “जब कोई गलती होती है, तो मैं उससे बचने या छुपाने की कोशिश नहीं करता। मैं सीधे जाकर उसे स्वीकार कर लेता हूँ, और समाधान भी साथ लेकर जाता हूँ।” लोगों ने पूछा, “लेकिन ऐसा करने से डांट नहीं पड़ती?” वह बोला, “शायद कभी-कभी पड़ती है… लेकिन विश्वास भी बनता है और जहाँ विश्वास बनता है, वहाँ डर की जगह नहीं बचती।” उसकी बात सुनकर सभी सोच में पड़ गए। धीरे-धीरे लोगों ने महसूस किया कि वे अपने डर से भाग रहे थे, जबकि यह युवक अपने डर के सबसे करीब जाकर खड़ा हो जाता था।
दोस्तों, जीवन में हम अक्सर समस्याओं से दूर भागने की कोशिश करते हैं। हम सोचते हैं कि अगर हम उन्हें टाल देंगे, तो वे खत्म हो जाएँगी। लेकिन सच्चाई यह है, जिस चीज़ से हम भागते हैं, वही हमें सबसे ज्यादा डराती है और जिस चीज़ का हम सामना करते हैं, वही धीरे-धीरे हमारी ताकत बन जाती है। जैसे उस छोटे कर्मचारी ने समझ लिया था।
डर से बचने का सबसे आसान तरीका है, उसका सामना करना। जब हम अपने डर के करीब जाते हैं, तो हमें एहसास होता है कि वह उतना बड़ा नहीं था, जितना हमने उसे बना लिया था। दोस्तों, जीवन में सुरक्षा बाहर नहीं मिलती, वह हमारे भीतर के साहस में छिपी होती है। जब हम ईमानदारी से, खुले मन से और स्वीकार्यता के साथ जीते हैं, तो परिस्थितियाँ चाहे जैसी भी हों, हम भीतर से शांत रहते हैं।
इसलिए अगली बार जब कोई डर आपको रोके, तो उससे भागिए मत, उसके पास जाइए क्योंकि कई बार, सबसे सुरक्षित जगह वही होती है, जहाँ जाने से हम सबसे ज्यादा डरते हैं और याद रखिएगा, डर खत्म होने से पहले नहीं जाता और डर को ख़त्म करने के लिए उसका सामना करना पड़ता है। इसलिए ही कहा जाता है, “डर के आगे ही जीत है!”
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर




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