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जीवन में आगे बढ़ने का मतलब दूसरों से आगे निकलना नहीं है…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • Jun 17
  • 3 min read

June 16, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, प्रोफेशनल जीवन की शुरुआत में हममें से अधिकांश लोग सफलता को पद, वेतन, पुरस्कार और उपलब्धियों से जोड़कर देखते हैं। हमें लगता है कि आगे बढ़ना मतलब दूसरों से आगे निकल जाना है। तुलना, प्रतिस्पर्धा और स्वयं को साबित करने की इच्छा हमारे करियर का प्रमुख ईंधन बन जाती है। यह स्वाभाविक भी है। लेकिन जैसे-जैसे व्यक्ति अनुभव प्राप्त करता है, एक समय ऐसा आता है जब सफलता की उसकी परिभाषा बदलने लगती है। वह समझने लगता है कि जीवन केवल स्वयं आगे बढ़ने का नाम नहीं है, बल्कि दूसरों को आगे बढ़ते हुए देखकर प्रसन्न होने की क्षमता विकसित करने का भी नाम है।


मेरे अनुभव में प्रोफेशनल परिपक्वता की सबसे बड़ी पहचान विजिटिंग कार्ड पर लिखा पद नहीं बल्कि अपने जूनियर्स की सफलता को देखने का नज़रिया है। यदि आपके साथ काम करने वाला कोई युवा सहयोगी आपसे आगे निकल जाए और आपके मन में असुरक्षा के बजाय गर्व का भाव आए, तो समझिए आप सही दिशा में बढ़ रहे हैं। यदि आपकी टीम का कोई सदस्य नई ऊँचाइयाँ छू ले और आपको ऐसा महसूस हो जैसे आपके अपने परिवार का कोई सदस्य सफल हुआ हो, तो यह केवल नेतृत्व नहीं, बल्कि व्यक्तित्व की विशालता का प्रमाण है। इसके विपरीत कई लोग अपने ज्ञान को दूसरों से इसलिए साझा नहीं करते क्योंकि उन्हें इस बात का डर होता है कि कहीं दूसरा व्यक्ति उनसे आगे न निकल जाए। इसी तरह कुछ लोग अपने अनुभव साझा नहीं करते क्योंकि उन्हें अपनी जगह खोने का भय होता है। लेकिन इतिहास गवाह है कि जो लोग दूसरों को आगे बढ़ाने का साहस रखते हैं, वही सबसे लंबे समय तक सम्मान पाते हैं।


दोस्तों, एक शिक्षक की सफलता उसके ज्ञान में नहीं, बल्कि उसके विद्यार्थियों की उपलब्धियों में दिखाई देती है। एक कोच की पहचान उसके रिकॉर्ड से नहीं, बल्कि उसके तैयार किए गए खिलाड़ियों की उपलब्धियों से होती है। एक लीडर की महानता उसके पद से नहीं, बल्कि उसके द्वारा तैयार किए गए लीडर्स से मापी जाती है। इसी प्रकार किसी भी पेशेवर व्यक्ति की वास्तविक सफलता तब दिखाई देती है जब उसके जूनियर्स उसके मार्गदर्शन से नई ऊँचाइयाँ प्राप्त करने लगते हैं।


लेकिन केवल जूनियर्स ही नहीं, अपने साथ काम करने वाले साथियों अर्थात् पीयर्स की सफलता से खुश होना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। हाँ! यह आसान नहीं होता क्योंकि सामान्यतः तुलना समान स्तर पर कार्य कर रहे लोगों के बीच ही होती है। जब किसी सहकर्मी को पदोन्नति मिलती है या कोई नया अवसर मिलता है अथवा उसे विशेष सम्मान प्राप्त होता है, तब हमारे भीतर छिपी असुरक्षाएँ जाग सकती हैं। यदि उस क्षण भी आप दिल से उसकी सफलता का उत्सव मना सकें, तो समझिए आपने ईर्ष्या पर विजय प्राप्त कर ली है और अपने नकारात्मक भावों पर विजय पाने से बड़ी उपलब्धि कोई और हो ही नहीं सकती।


दोस्तों, जब हम दूसरों की सफलता से प्रेरित होना सीख जाते हैं, तब हमारी ऊर्जा तुलना में नहीं, विकास में लगती है। हम शिकायत करना छोड़ कर, सीखना शुरू कर देते हैं। हम प्रतिस्पर्धा से सहयोग की ओर बढ़ते हैं और यही परिवर्तन हमें एक साधारण पेशेवर से असाधारण पेशेवर बनाता है। इसलिए स्वयं से समय-समय पर एक प्रश्न पूछिए, ‘क्या मुझे अपने जूनियर्स की प्रगति देखकर गर्व होता है? और क्या मुझे अपने साथियों की सफलता देखकर खुशी मिलती है?’ यदि उत्तर “हाँ” है, तो निश्चिंत रहिए। आप करियर में आगे बढ़ने के साथ-साथ एक बेहतर इंसान भी बन रहे हैं।


याद रखिएगा, सच्ची सफलता वह नहीं है जब आप अकेले शिखर पर पहुँच जाएँ; सच्ची सफलता वह है जब आपकी उपस्थिति से और लोग भी शिखर तक पहुँचने लगें। यही नेतृत्व है। यही परिपक्वता है और यही एक सफल प्रोफेशनल जीवन की सबसे सुंदर पहचान है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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