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मनुष्य जन्म से नहीं, कर्म से बनता है…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • Dec 7, 2025
  • 3 min read

Dec 7, 2025

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, “मनुष्य जन्म से नहीं, कर्म से बनता है”, जी हाँ इस दुनिया में प्रतिदिन लगभग तीन लाख पिच्चयासी हज़ार लोग जन्म लेते हैं, लेकिन इनमें बहुत थोड़े से ही लोग मनुष्यता का धर्म निभा पाते हैं। इसी बात के महत्व को समझाते हुए महान दार्शनिक स्वामी विवेकानंद ने कहा था, “Man is not born to become an animal; he is born to become divine.” यानी मनुष्य होना जैविक प्रक्रिया है, पर मानवता का धर्म अपनाना एक चुनाव है।


सीधे शब्दों में कहूँ तो हम सब इस दुनिया में “मनुष्य” बनकर जन्म लेते हैं, लेकिन हम इंसान अपने आचरण से बनते हैं। याने मनुष्य का मूल्य उसके विचारों और कर्मों से तय होता है। जब आपके मन में एक विचार आता है और आप उस विचार के साथ समय बिताते हैं तो वह विचार आपकी सोच बनता है। यही सोच आपका जीवन के प्रति नजरिया तय करती है और आपका नजरिया आपके निर्णय को प्रभावित कर आपके एक्शन याने कर्म को तय कर देता है। कर्म ही आपको अंतिम परिणाम दिलाते हैं और अगर आप लगातार, बार-बार एक जैसे परिणाम देते हैं तो वह आपकी छवि, आपकी पहचान बनाते हैं। इसी बात को समझाते हुए महात्मा गांधी जी ने कहा था, “A man is the product of his thoughts; what he thinks, he becomes.” याने इंसान जैसा सोचता है वैसा ही बन जाता है।


याद रखियेगा दोस्तों, हम सब इस दुनिया में सीमित समय के लिए आए हैं और एक दिन हम सभी को इतिहास बन जाना है। हम में से कुछ लोग अच्छाई का प्रतीक बनेंगे और कुछ को बुराई के प्रतीक के रूप में याद रखा जायेगा और उनका यह निर्णय हमारे कर्मों के आधार पर बनी छवि पर आधारित होगा। सहमत ना हों तो जरा इतिहास के पन्ने खोल कर देख लीजिएगा। उसमें रावण भी है और राम भी; हिटलर भी है और मदर टेरेसा भी; दानवीर कर्ण भी है और दुर्योधन भी। यह सभी लोग जन्में तो एक जैसे थे, पर सारा फर्क सिर्फ उनके विचार, स्वभाव और कर्म से पड़ा था। याने उनकी आज की छवि उनके किए गए कर्मों से बनी थी। इसलिए, मैं हमेशा कहता हूँ, ‘असली इंसान वो है, जो इंसानियत को निभाए और आज के समय में ‘इंसान’ के लिए ‘इंसान’ कहलाना तो आसान है, पर "इंसानियत" निभाना कठिन। इसी तरह किसी के बारे में नकारात्मक बातें कह के गिराना आसान है, पर उसकी तारीफ़ करके उसे उठाना कठिन और इसी बात को समाज के स्तर पर कहूँ तो नफरत फैलाना आसान है, पर प्रेम बाँटना कठिन। लेकिन दोस्तों, यही कठिन काम हमें सच्चा मनुष्य बनाते हैं।


याद रखियेगा, इतिहास नाम याद नहीं रखता, कर्म याद रखता है और एक दिन हम सब को केवल “नाम” बनकर रह जाना है। कोई हमें फोटो के नीचे “स्वर्गीय...” कहकर याद करेगा तो कोई हर त्योहार पर “उन जैसा बनो” कहकर बच्चों को सिखाएगा और यह पूरी तरह हमारे आज के कर्मों पर निर्भर होगा। दोस्तों, कौन जानता था कि एक वकील, महात्मा गांधी के रूप में याद रखा जायेगा? दक्षिण अफ़्रीका की जेल से निकलकर एक कैदी वैश्विक न्याय का प्रतीक बन नेल्सन मंडेला बनेगा और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम नाम का शिक्षक “भारत के मिसाइल मैन” और “जनता के राष्ट्रपति” के रूप में याद रखा जायेगा। दोस्तों, यह नाम अमर इसलिए हुए क्योंकि इन्होंने जीवन को सिर्फ जिया नहीं, बल्कि लोगों को मानवता का मार्ग दिखाया।


इसलिए मैंने लेख की शुरुआत में कहा था, “मनुष्य होना प्राकृतिक है, लेकिन मानव होना एक साधना है।” और अगर आप इस साधना को पूरा कर अमर बनना चाहते हैं तो आज से अपने व्यवहार में करुणा, क्षमा, ईमानदारी, दया, संवेदनशीलता जैसे गुणों को जोड़ लें और याद रखें अपने अंदर सही चुनने का साहस पैदा करे बिना उपरोक्त भावों को अपनाना संभव नहीं होगा क्योंकि अच्छाई अक्सर संघर्ष मांगती है, और बुराई हमेशा आसान रास्ता देती है और आसान रास्ते अक्सर गलत मंज़िल तक ले जाते हैं।


अंत में इतना ही कहूँगा दोस्तों, समय बीत जाएगा, हम सब मिट्टी में मिल जाएँगे, पर मिटने से पहले किए गए कर्म तय करेंगे कि हम इतिहास की किस पंक्ति में दर्ज होंगे। इसलिए ही कहते हैं, “मानव बनकर जन्म लेना नियति है, पर इंसान बनकर जीवन जीना साधना है।”


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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