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लगन, मेहनत और निरंतर प्रयास से पाएँ सफलता…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • Jun 23, 2025
  • 3 min read

June 23, 2025

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, इस दुनिया में हर इंसान सफल होना चाहता है, लेकिन हो नहीं पाता है। मेरी नजर इसकी मुख्य वजह समय से पहले सब कुछ पाने की चाह है। जबकि सफलता कोई ‘2 मिनिट नूडल नहीं है’ जिसके विषय में सोचा और पा लिया, यह तो एक ऐसी प्रक्रिया है जो हमारे भीतर की इच्छाशक्ति, हमारे प्रयासों की गहराई और जीवन व कार्य के प्रति हमारे दृष्टिकोण पर निर्भर करती है। जी हाँ दोस्तों, सफलता पाने के लिए केवल सोचना या उसे पाने की इच्छा रखना पर्याप्त नहीं है। उसके लिए तो इच्छा को क्रियान्वित करने की योजना और धैर्य के साथ उस योजना पर सतत् मेहनत करने की आवश्यकता होती है। इसलिए ही कहा गया है, “जीवन में आपकी सफलता का आकार दो चीजों पर निर्भर करता है, पहली, आपकी चाह की गहराई और दूसरी, उसे पाने के लिए किए गए प्रयास!’


यकीन मानियेगा दोस्तों, साधारण सा यह सूत्र असल में एक बहुत गहरा सत्य है। अगर आपकी इच्छा सतही है, तो आपके प्रयास भी साधारण या सतही ही होंगे और जब इच्छा और प्रयास हल्का या साधारण होगा तो परिणाम भी वैसा ही मिलेगा। लेकिन इसके विपरीत अगर आपकी चाहत दिल से है और आपके अंदर उसे पाने का जुनून है, तो आपके प्रयास भी उसी स्तर के होंगे और आप सफलता की राह में आने वाली बाधाओ को आसानी से पार करते हुए, अपने लक्ष्यों को पा लेंगे।


लेकिन हाँ इस विषय में आपको एक और महत्वपूर्ण बात को हमेशा याद रखना होगा, सफल होने के लिए सपनों की आवश्यकता होती है, प्रतिस्पर्धा की नहीं, इसलिए हमेशा ख़ुद को ख़ुद से बेहतर बनाने के लिए प्रयासरत रहें। ऐसा मैंने इसलिए कहा क्योंकि इस दुनिया में बहुत से लोग केवल दूसरों से आगे निकलने को ही अपनी सफलता मानते हैं और इसीलिए सिर्फ़ उतना ही प्रयास करते हैं। दूसरे और सरल व सीधे शब्दों में कहूँ तो उनका लक्ष्य सिर्फ़ किसी से आगे निकलना याने किसी विशेष व्यक्ति या ब्रांड को हराना होता है। ऐसे लोग बीतते समय के साथ थक जाते हैं, भ्रमित हो जाते हैं और अक्सर बीच राह में ही हार मान कर बैठ जाते हैं।


मेरी नजर में इसकी मुख्य वजह लक्ष्य के रूप में उधार का सपना होना है। लेकिन अगर आप वाकई सच्चा विजेता या सफल इंसान बनना चाहते हैं तो सबसे पहले ख़ुद का लक्ष्य तय कीजिए और बिना शोर किए चुपचाप सीखिये और अपने कौशल, अपने कार्य को दिन-ब-दिन बेहतर बनाइये। याने अपना फोकस दूसरों के स्थान पर, ख़ुद पर रखिए क्योंकि इस दुनिया में आपका असली प्रतिस्पर्धी वो नहीं है जो छोटी से छोटी बात पर बार-बार शोर करता है, बल्कि वो है जो बड़ी खामोशी के साथ अपने लक्ष्यों की ओर बिना रुके बढ़ता है और साथ ही साथ दिन-प्रतिदिन अपनी कमियों को उसी खामोशी के साथ दूर करता है।


हो सकता है अब आप कहेंगे कि यह सब तो समझ आ गया लेकिन यह बताइए कि शुरुआत कैसे होगी? तो मैं कहूँगा कि सबसे पहले अपनी ज़िंदगी का एक बड़ा लक्ष्य बनाइये और फिर उसे पाने के लिए छोटे कदम उठाइये क्योंकि सफलता कोई ऐसी चीज नहीं है, जिसे एक बड़ा कदम उठाकर एक ही बार में पा लिया जाये। याद रखियेगा, हर बड़ी उपलब्धि छोटे-छोटे प्रयासों का ही परिणाम होती है। फिर चाहे वह कोई नौकरी हो, व्यवसाय हो या कोई शौक, सबके लिए निरंतर अभ्यास और फोकस की ज़रूरत होती है। जिस तरह एक कुम्हार धीरे-धीरे मिट्टी को गढ़कर मटका, सुराही या कोई अन्य चीज बनाता है, ठीक वैसे ही हमें भी अपनी क्षमताओं को रोज़ सुधारना होता है।


इस आधार पर कहा जाए तो स्पष्ट लक्ष्य रखकर, अपनी क्षमताओं को रोज़ सुधारते हुए, लक्ष्य की दिशा में लगातार बढ़ना ही सफलता का मूल मंत्र है। इसलिए दोस्तों, सफल होना चाहते हो तो बड़े सपने देखो; उन्हें पाने के लिए रोज़ छोटे-छोटे कदम उठाओ; दूसरों से नहीं ख़ुद से प्रतिस्पर्धा करो; सीखने की भूख अपने अंदर बनाए रखो और हर दिन खुद को बीते हुए ‘कल’ से बेहतर बनाओ क्योंकि सफलता कोई मंज़िल नहीं, बल्कि एक सतत् यात्रा है, अपने आप को निखारने की।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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