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सबसे बड़ी जीत ख़ुद को जीतना है !!!

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • 2 days ago
  • 3 min read

June 8, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, जीवन एक अद्भुत शिक्षक है। इसके सिखाये पाठ समय पर सीख लीजिए, वरना समय आपको इसे बेरहमी से भी सिखा सकता है। जी हाँ दोस्तों, जीवन हमें रोज़ कुछ न कुछ सिखाने की कोशिश करता है। कभी किसी व्यक्ति के माध्यम से, तो कभी किसी असफलता के माध्यम से, या फिर कभी किसी रिश्ते के माध्यम से और कई बार तो किसी छोटी-सी घटना के माध्यम से।लेकिन हमारे जीवन की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि अक्सर हम उन संकेतों को अनदेखा कर देते हैं और यकीन मानियेगा तब जीवन प्रकृति के एक कठोर नियम का पालन करता है, “जो पाठ हम सही समय पर नहीं सीखते, वही पाठ जीवन हमें बाद में कठिन परिस्थितियों के माध्यम से सिखाता है।” उदाहरण के लिए कोई विद्यार्थी यदि समय रहते पढ़ाई का महत्व नहीं समझता, तो परीक्षा उसे अनुशासन का पाठ पढ़ाती है। इसी तरह यदि कोई स्वास्थ्य की उपेक्षा करता है, तो बीमारी उसे शरीर का महत्व समझाती है और अगर कोई इंसान रिश्तों की कद्र नहीं करता है, तो एक दिन अकेलापन उसे प्रेम और अपनत्व का मूल्य सिखाता और समझाता है। याद रखियेगा, जीवन बहुत धैर्यवान है, लेकिन वह अपने पाठ अधूरे नहीं छोड़ता।


दोस्तों, यकीन मानियेगा, जीवन की सबसे बड़ी सच्चाई यह नहीं है कि जीवन में समस्याएँ आएँगी। बल्कि इस सत्य को स्वीकारना है कि इन तमाम समस्याओं के बावजूद भी हमें आगे बढ़ना होगा। महान लेखक अर्नेस्ट हेमिंग्वे ने कहा था, “वयस्क होने के बाद सबसे कठिन पाठ जो मैंने सीखा, वह यह है कि भीतर से टूटे होने के बावजूद भी हमें जीवन में आगे बढ़ते रहना पड़ता है।” दोस्तों, उनकी कही यह बात हर उस व्यक्ति के हृदय को छूती है जिसने जीवन में संघर्ष देखा है क्योंकि वास्तविक जीवन में हमेशा सब कुछ ठीक नहीं होता। कई बार हम मुस्कुरा रहे होते हैं लेकिन भीतर चिंता चल रही होती है। कई बार हम दूसरों को प्रेरित कर रहे होते हैं लेकिन स्वयं संघर्ष कर रहे होते हैं। कई बार हम मजबूत दिखाई देते हैं लेकिन भीतर से बिखरे हुए होते हैं और फिर भी जीवन चलता रहता है और हमें भी चलना पड़ता है।


दोस्तों, यहाँ एक बात और समझना महत्वपूर्ण है, आगे बढ़ने का अर्थ यह नहीं कि हम अपने दर्द को दबा दें। आज बहुत से लोग अपने नकारात्मक भावों को स्वीकारने और महसूस करने के बजाय छिपाने लगे हैं। जैसे दुखी हैं तो चेहरे पर नक़ली मुस्कान लगा लो। तनाव है तो व्यस्त हो जाओ। चोट लगी है तो दिखाओ कि सब ठीक है। याद रखियेगा, दर्द को छुपा लेने से दर्द कभी ख़त्म नहीं होता, वह केवल रूप बदल लेता है। याने वह कभी तनाव, तो कभी क्रोध या कभी चिड़चिड़ापन या फिर अवसाद बन जाता है। दोस्तों, तमाम तरह के नकारात्मक अनुभवों या भावों का उपचार उन्हें भूलना नहीं है। उपचार याने हीलिंग का अर्थ है अपनी भावनाओं को स्वीकारना, उन्हें महसूस करना, उनका सामना करना और अंत में धीरे-धीरे उनसे मुक्त हो जाना।



याद रखिएगा, मनुष्य को जितना नुकसान बाहरी परिस्थितियाँ नहीं पहुँचातीं, उससे कहीं अधिक नुकसान भीतर की नकारात्मक भावनाएँ पहुँचाती हैं। याद रखियेगा, डर, असुरक्षा, ईर्ष्या, क्रोध, कटुता, नफरत, तुलना आदि धीरे-धीरे हमारी ऊर्जा को खा जाते हैं। जैसे लोहे को बाहर की बारिश नहीं, भीतर लगने वाला जंग कमजोर करता है। ठीक उसी तरह मनुष्य को बाहरी चुनौतियाँ से ज़्यादा भीतर की नकारात्मकता कमजोर बनाती हैं। इसलिए स्वयं के प्रति सजग बनिए। अपने मन को देखिए और अगर मन में ईर्ष्या आए, तो उसे पहचानिए। जब क्रोध आए, उसे समझिए और अगर डर आए, तो उसके कारण को जानिए क्योंकि जिस भावना को हम पहचान लेते हैं, उस पर नियंत्रण पाना आसान हो जाता है।


अंत में इतना ही कहूँगा की कभी भी यह मत सोचिए की मैं कभी गिरूँगा नहीं याने कभी असफल या फेल नहीं होऊँगा। इसके स्थान पर अपने जीवन का लक्ष्य हर गिरावट से सीखना बनाएँ क्योंकि हर दर्द से इंसान को परिपक्व बनाता है और इसी तरह हर चुनौती उसे मजबूत बनाती है। इसलिए जीवन के संकेतों को समय रहते समझिए और अपने घावों को दबाने के स्थान पर, भरने दीजिए। जो व्यक्ति अपने भीतर के डर, क्रोध और नकारात्मकता पर विजय पा लेता है, उसे बाहरी दुनिया की कोई भी चुनौती लंबे समय तक हरा नहीं सकती। इसलिए ही तो कहते हैं, “इंसान की सबसे बड़ी जीत दुनिया पर नहीं, स्वयं पर विजय प्राप्त करना है।”


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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