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हर परिस्थिति को अपना शिक्षक बना लीजिए…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • 6 hours ago
  • 3 min read

June 25, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, जीवन में दो प्रकार के लोग होते हैं। एक वे जो हर परिस्थिति में शिकायत खोज लेते हैं, और दूसरे वे जो हर परिस्थिति में सीख खोज लेते हैं। दोनों के सामने लगभग एक जैसी चुनौतियाँ आती हैं, लेकिन दोनों का जीवन बिल्कुल अलग दिशा में आगे बढ़ता है। मेरा अनुभव कहता है कि जिस दिन हम जीवन को "सीखने की यात्रा" मान लेते हैं, उसी दिन हमारी परेशानियाँ भी हमारी शिक्षक बन जाती हैं। जब हम हर परिस्थिति से सीखने का दृष्टिकोण विकसित करते हैं, तब हम केवल बड़ी घटनाओं से ही नहीं, बल्कि छोटी-छोटी बातों से भी सीखने लगते हैं। हम समझने लगते हैं कि हर व्यक्ति हमें कुछ सिखाने आया है। कुछ लोग हमें अच्छा व्यवहार सिखाते हैं और कुछ लोग यह सिखाते हैं कि हमें कैसा व्यवहार नहीं करना चाहिए। धीरे-धीरे यह अहसास भी होने लगता है कि हम हर समय सही नहीं हो सकते। यह समझ व्यक्ति को विनम्र बनाती है। अहंकार कहता है—"मैं हमेशा सही हूँ।” ज्ञान कहता है—"मैं सीख रहा हूँ।” और बुद्धिमत्ता कहती है—"हो सकता है सामने वाले के पास भी सत्य का कोई हिस्सा हो।”


दोस्तों, जीवन का एक और सुंदर सत्य हमारे प्राचीन ग्रंथ पंचतंत्र में बताया गया है, "जो वास्तव में आपका है, उसे कोई आपसे छीन नहीं सकता और जो आपका नहीं है, उसे आप चाहकर भी स्थायी रूप से प्राप्त नहीं कर सकते।” इस सत्य को समझ लेने के बाद जीवन बहुत सरल हो जाता है। हम तुलना करना छोड़ देते हैं। हम ईर्ष्या से मुक्त होने लगते हैं। हम दूसरों की सफलता देखकर परेशान नहीं होते। हम समझ जाते हैं कि हर व्यक्ति की यात्रा अलग है और हर व्यक्ति को वही मिलेगा जिसके लिए उसने कर्म किया है। आज अधिकांश तनाव का कारण यह नहीं है कि हमारे पास क्या नहीं है, बल्कि यह है कि हम बार-बार दूसरों के पास क्या है, उसे देखने लगते हैं। जबकि जीवन का नियम स्पष्ट है, जो आपका है, वह सही समय पर आपके पास आएगा और जो आपका नहीं है, उसके पीछे भागकर केवल शांति खोई जा सकती है।


दोस्तों, आज के समय में एक और चुनौती बढ़ती जा रही है—आलोचना और अपमान। सोशल मीडिया हो, कार्यस्थल हो या व्यक्तिगत जीवन, लोग कई बार बिना सोचे-समझे कटु शब्द बोल देते हैं। ऐसे समय में हमारी पहली प्रतिक्रिया होती है—तुरंत उत्तर देना। लेकिन यहीं हम सबसे बड़ी गलती कर बैठते हैं। याद रखिए, जो व्यक्ति आपका अपमान करता है, उसका उद्देश्य अक्सर आपको सोचने की क्षमता से दूर ले जाकर प्रतिक्रिया देने के लिए उकसाना होता है। वह चाहता है कि आप क्रोधित हों।

वह चाहता है कि आप आवेश में आकर कुछ ऐसा कहें या करें जिसका बाद में आपको पछतावा हो। ऐसी स्थिति में मौन सबसे शक्तिशाली उत्तर बन जाता है। मौन कमजोरी नहीं है। मौन आत्मनियंत्रण है। मौन यह घोषणा है कि आपके शब्द और आपकी भावनाएँ आपके नियंत्रण में हैं, किसी और के नहीं।


दोस्तों, जीवन को सरल बनाने के लिए तीन सूत्र याद रखिए, हर परिस्थिति से सीखिए। जो आपका है, उसके लिए धैर्य रखिए और अपमान का उत्तर प्रतिक्रिया से नहीं, परिपक्वता से दीजिए क्योंकि अंततः जीवन की सबसे बड़ी जीत दूसरों को हराने में नहीं, बल्कि स्वयं पर विजय पाने में है और जो व्यक्ति सीखना, स्वीकार करना और शांत रहना सीख जाता है, वह परिस्थितियों का शिकार नहीं रहता, बल्कि अपने जीवन का निर्माता बन जाता है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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