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अच्छा सोचिए, अच्छा करिए - सब अच्छा ही अच्छा होगा !!!

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • 4 days ago
  • 3 min read

Jan 4, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, अक्सर माना जाता है कि काम का दबाव, रिश्तों की उलझन, समाज की अपेक्षाएँ या हालात की मार जैसी स्थितियां हमारे जीवन को अशांत बनाती है। लेकिन मेरी नजर में सच्चाई इसके उलट होती है, हमारी शांति या अशांति परिस्थितियाँ तय नहीं करतीं, हमारी जीने की शैली तय करती है। बात गहरी है, लेकिन अगर आप अपने स्वभाव, अपने शब्दों और अपनी प्रतिक्रियाओं को ईमानदारी से देखेंगे और परखेंगे तो पाएंगे कि हम अपने स्वभाव, अपने शब्दों और अपनी प्रतिक्रियाओं से अकारण जीवन को क्लेशमय बना लेते हैं।


सहजता, सुखी जीवन की सबसे बड़ी कुंजी है। यकीन मानियेगा, जीवन को आनंद से जीने के लिए बहुत कुछ बदलने की नहीं, बस सहज रहने की ज़रूरत होती है। याने लोगों और परिस्थितियों को बदलने की ज़िद छोड़कर, उन्हें वैसे ही स्वीकार कर जीना, हर बात को सिर पर न चढ़ाना, अनावश्यक जिद ना करना आदि। सीधे शब्दों में कहूँ तो जब आप हर चीज़ को अपने अनुसार ढालने की कोशिश करने के स्थान पर जीवन को धैर्य और सरलता के साथ जीना शुरू करते हैं, तब वही जीवन सुखी भी बनता है और सबका प्रिय भी।


याद रखिएगा, हम हर स्थिति-परिस्थिति को नहीं बदल सकते लेकिन हम अपनी हर प्रतिक्रिया को हमेशा बदल सकते हैं। यही वो सोच है जो जीवन को बदलना शुरू करती है। जिस दिन हमारा स्वभाव बदलता है, उसी दिन से हमारा अनुभव बदलने लगता है। आइए इसी बात को हम महात्मा गांधी जी के जीवन से समझने का प्रयास करते हैं।


गांधी जी के जीवन के शुरुआती दिनों में परिस्थितियाँ उनके ख़िलाफ़ थी। उन्हें अत्याचार, अपमान और अन्याय आदि सब सहन करना पड़ रहा था, लेकिन इसके बाद भी उन्होंने ना तो हिंसा से और ना ही क्रोध से प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अपना तरीका, अपना स्वभाव बदला और वही बदलाव समय के साथ दुनिया को बदलने की शक्ति बन गया। अगर गांधी जी भी दुनिया को कोसने में लग जाते, तो शायद इतिहास कुछ और होता। उन्होंने यह सिद्ध किया कि ‘शांति परिस्थितियों से नहीं, चरित्र से आती है।’


याद रखियेगा, दुनिया को कोसने से कुछ नहीं बदलता। हम अक्सर कहते हैं, “दुनिया बहुत खराब हो गई है।”, “लोग अच्छे नहीं रहे।”, “समय ही गलत है।”, लेकिन दुनिया को कोसने से न दुनिया बदलती है, न समय। बदलाव तब आता है जब हम चीज़ों के गुण और स्वभाव को समझकर उन्हें समाज के हित में उपयोग करना सीखते हैं। आग जलाती भी है, और भोजन भी पकाती है। पानी डुबो भी सकता है, और जीवन भी देता है। दोष वस्तु का नहीं, उपयोग करने वाले की समझ का होता है।


इस आधार पर कहा जाए तो जीवन को सुंदर बनाने के लिए किसी जटिल सूत्र की नहीं है, बस तीन बातों को अपनाने की जरूरत है। अच्छा सोचिए, अच्छा कार्य करिए और धैर्य रखिए। यही वो जीवन दर्शन है जिससे धीरे-धीरे मन शांत होगा, रिश्ते मधुर होंगे और जीवन मंगलमय बनने लगेगा।


अंत में इतना ही दोहराऊँगा कि संसार को बदलना चाहते हैं तो बस अपने स्वभाव को बदल डालिये। यकीन मानियेगा, ख़ुद को बदलने से बड़ी कोई क्रांति नहीं हो सकती और इस क्रांति को शुरू करना बहुत कठिन भी नहीं है। जिस दिन आप क्रोध की जगह समझ चुनते हैं, शिकायत की जगह स्वीकार्यता चुनते हैं, और अहंकार की जगह सहजता - उसी दिन से आपका जीवन बदलना शुरू हो जाता है। इसलिए ही कहा गया है, “अच्छा सोचिए, अच्छा करिए - सब अच्छा ही अच्छा होगा।”


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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