टैलेंट नहीं, सही नजरिया और सतत कर्म दिलाते हैं सफलता…
- Nirmal Bhatnagar

- 2 days ago
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Jan 7, 2026
फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, एक अफ्रीकी कहावत है, “सबसे अच्छा बर्तन भी अपने आप खाना नहीं बना सकता।” ठीक उसी तरह साधन संपन्न या प्रतिभा संपन्न होना या फिर जीवन में ढेरों मौकों का होना भी जीवन को बेहतर नहीं बना सकता है। जीवन में परिवर्तन तो तब आता है जब कर्म, प्रयास और सही नजरिया उस प्रतिभा, साधन और मौकों से जुड़ता है। मैंने कई लोगों को कहते सुना है कि “मेरे पास टैलेंट है।”, “मुझमें क्षमता है।”, “बस एक बार सही मौका मिल जाए फिर देखना।” पर मैं जानता हूँ इन सब से भी कुछ नहीं होगा क्योंकि जीवन “मिल जाएगा” से नहीं, “मैं कर रहा हूँ” से बदलता है।
जी हाँ दोस्तों, टैलेंट नहीं, एक्शन अंतर पैदा करता है। डिग्री, कौशल, संसाधन, ये सब बर्तन याने साधन हो सकते हैं लेकिन जब आप इस बर्तन में मेहनत की सामग्री डालकर, सही नजरिये की आँच में, धैर्य के साथ पकाते हैं तब सही पकवान बनता है याने सफलता मिलती है। इसी वजह से कहा जाता है कि “असाधारण सफलता हमेशा असाधारण कर्म से नहीं, निरंतर कर्म याने कंसिस्टेंसी से आती है।
धीरूभाई अंबानी को ही ले लीजिए, उनका जन्म किसी बड़े बिज़नेस परिवार में नहीं हुआ था। इतना ही नहीं, उनके पास ना तो डिग्री थी, ना ही पूंजी और ना ही अच्छे और प्रभावशाली लोगों का नेटवर्क। उनके पास तो बस हार ना मानने का नजरिया और धैर्य के साथ कार्य करने का साहस था। यमन में साधारण नौकरी से लौटने के बाद उन्होंने छोटे स्तर पर व्यापार शुरू किया। शुरुआती दौर में उन्होंने कई गलतियाँ करी, आलोचनाएँ झेलीं, लेकिन उसके बाद भी लगातार प्रयास किया। याने उन्होंने विपरीत दौर में सब कुछ ठीक होने का इंतज़ार करने के स्थान पर जो सीखा था, उसी से शुरू किया। यही विश्वास याने मेहनत, जोखिम और निरंतरता उनका जीवन मूल्य बन गया। सोच कर देखिए अगर धीरूभाई सिर्फ़ यह कहते कि, “मेरे पास क्षमता है, पर हालात सही नहीं हैं”, तो आज क्या रिलायंस का अस्तित्व होता? दोस्तों, उनके पास शुरू में सबसे अच्छा बर्तन नहीं था, लेकिन उन्होंने जो था उसी में खाना बनाना शुरू कर दिया।
प्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर टोनी रॉबिन्स कहते हैं, “आपका पूरा जीवन आपके विश्वास याने बिलीफ और आपके जीवन मूल्य याने वैल्यूज़ से नियंत्रित होता है।” अर्थात् आप क्या संभव मानते हैं और सही मानते हैं, वही तय करता है कि आप क्या करेंगे और क्या टालेंगे। अगर आपका विश्वास है, “असफलता बुरी है,” तो आप जोखिम से बचेंगे। अगर आपका मूल्य है, “सुरक्षा सबसे ज़रूरी है,” तो आप अवसर छोड़ देंगे।
यहाँ एक बात और ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि बहुत से विश्वास हमारे अपने नहीं होते। वे हमें परिवार, समाज, संस्कृति या डर से मिलते हैं। जीवन में सफल वही होता है जो यह पहचान लेता है कि कौन-सा विश्वास सच है और कौन-सा सिर्फ़ आदत या डर। जब यह विवेक आ जाता है, तो इंसान कंडीशनिंग से बाहर निकलकर प्रामाणिक रास्ते पर चलने लगता है।
दोस्तों, अगर आप मेरी उपरोक्त बात से सहमत हैं और कर्म, प्रयास और सही नजरिये से जीवन में सफ़ल होना चाहते हैं तो आज ख़ुद से पूरी ईमानदारी के साथ प्रश्न पूछें-
1) क्या मैं सिर्फ़ क्षमता पर भरोसा कर रहा हूँ, या कर्म कर रहा हूँ?
2) क्या मेरे विश्वास मेरे अपने हैं, या उधार लिए हुए? और
3) क्या मैं परिस्थितियों या मौकों का इंतज़ार कर रहा हूँ, या शुरुआत कर चुका हूँ?
इन प्रश्नों के उत्तर आपको सही आकलन करने के साथ आवश्यक बदलाव लाने के लिए प्रेरित करेंगे। याद रखिएगा, सबसे अच्छा बर्तन भी तभी उपयोगी है जब उसमें सही सामग्री डालकर उसे आग पर रखा जाए। अपने विश्वासों को जाँचिए, अपने मूल्यों को स्पष्ट कीजिए, और आज से कर्म में उतर जाइए क्योंकि इन्हीं से जीवन सच में बदलता है।
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर




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