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मौकों को पहचान कर जीवन में कंसिस्टेंसी के साथ आगे बढ़े !!!

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • 1 day ago
  • 3 min read

Jan 8, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, जिन अवसरों का फायदा आप नहीं उठाते, उन 100% अवसरों को आप हमेशा के लिए खो देते हैं। सुनने में यह बात सरल और साधारण लगती है, लेकिन इसके भीतर जीवन का एक कठोर सत्य छिपा है। ज़िंदगी में ज़्यादातर लोग अवसर या मौके ना मिलने की वजह से पीछे नहीं रहते हैं बल्कि वे इसलिए पीछे छूट जाते हैं क्योंकि वे अवसरों या मौकों को स्वीकारने का साहस नहीं करते।


मनुष्य का अस्तित्व सजगता, नई सोच को स्वीकारने की क्षमता और बदलाव के दौर में चुनौतियों से तत्परता से निपटने की क्षमता पर निर्भर करता है। याने जो व्यक्ति सजग रहते हुए, बिना समय गँवाये नई सोच को स्वीकारता है और बदलाव की वजह से आई चुनौतियों को नकारने या उस पर रोने की जगह, तत्परता से उनका सामना करता है वही अंततः सफल होता है। दूसरे शब्दों में कहूँ तो जो व्यक्ति यह मानकर चलता है कि, “जैसा चल रहा है, वैसा ही चलता रहेगा,” वह समय के साथ धीरे-धीरे अप्रासंगिक हो जाता है और जो व्यक्ति सीखने, बदलने और खुद को ढालने के लिए तैयार रहता है, वही आगे निकल जाता है।


एक बात और, मौके कभी खाली नहीं जाते याने जो मौक़ा एक इंसान से छूटता है, उसे पहले से सजग लोग तत्काल उठा लेते हैं और फिर मौक़ा छोड़ने वाले लोग कहते हैं, “मेरी तो किस्मत ही खराब है…”, “काश परिस्थितियाँ थोड़ी बेहतर होती…”, “काश मुझे भी वैसा मौका मिलता…”, आदि। दोस्तों, सच्चाई तो यह है कि मौके सबके आसपास होते हैं। अंतर सिर्फ़ इतना होता है, कुछ लोग उन्हें लपकने के लिए तैयार होते हैं और कुछ सिर्फ़ इंतज़ार करते रहते हैं। इसलिए ही कहते है, “मौका उस व्यक्ति को मिलता है जो हर क्षण सीखता है, अभ्यास करता है, और असहज स्थिति में भी एक कदम आगे बढ़ाने का साहस रखता है।


चलिए, इसे हम 1972 में चेन्नई के एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे बालक की कहानी से समझने का प्रयास करते हैं। माता-पिता द्वारा दी गई सीख कि, ‘शिक्षा से ही सब कुछ पाया जा सकता है’, ने इस बालक के अंदर सीखने की ललक और जिज्ञासा पैदा की और उसने सीमित संसाधनों के साथ स्कूली शिक्षा पूर्ण कर आईआईटी खड़गपुर से इंजीनियरिंग की और उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका चले गए। शिक्षा के साथ उन्होंने वैश्विक तकनीकी मंच पर बदलाव से बचने के स्थान पर हर नए विचार को अवसर माना और चुनौतियों का सामना बिना शिकायत किए किया। सतर्कता, निरंतर सीख और समय पर निर्णय लेने की इसी प्रवृत्ति ने उन्हें विश्व की सबसे बड़ी टेक कंपनी गूगल का सीईओ बना दिया। जी हाँ! आप सही पहचान रहे हैं मैं सुंदर पिचाई के बारे में ही बात कर रहा हूँ।


जब उन्होंने गूगल में काम करना शुरू किया, तो वे कोई सुपरस्टार नहीं थे। लेकिन वे लगातार सीखते रहे, नई ज़िम्मेदारियाँ लेते रहे और हर अवसर को पूरी तैयारी के साथ अपनाते रहे। क्रोम ब्राउज़र के प्रोजेक्ट में भी उन्होंने पीछे हटने के बजाय, उसे अवसर के रूप में स्वीकारा और लगातार मेहनत, धैर्य और संगत प्रयासों से उसे पूर्ण किया और अंततः गूगल के सीईओ बने। अगर वे यह सोचते, “परिस्थितियाँ मेरे अनुकूल नहीं है…” या “अभी समय सही नहीं है…”, तो शायद यह कहानी कभी न बनती।


दोस्तों, सफलता का रहस्य निरंतरता में छुपा है। लगातार मेहनत सफलता लाती है और सफलता इंसान को महान बनाती है। बहुत लोग शुरुआत तो करते हैं, लेकिन बीच में रुक जाते हैं। वे परिणाम जल्दी चाहते हैं। जबकि जीवन उन लोगों को आगे बढ़ाता है जो रोज़ मेहनत कर अपने अपने लक्ष्य की ओर धीमे ही सही आगे बढ़ते हैं, फिर चाहे उन्हें तालियाँ मिलें या नहीं।


अगर आप भी इस सूत्र से सफल होना चाहते हैं तो ख़ुद से निम्न प्रश्न पूछें-

1) मैं मौके आने पर आगे बढ़ता हूँ या डर जाता हूँ?

2) मैं बदलाव को चुनौती मानता हूँ या अवसर?

3) क्या मैं रोज़ थोड़ा बेहतर बनने की कोशिश करता हूँ?

इन सवालों के जवाब आपको अपना भविष्य बदलने में मदद करेंगे।


दोस्तों, ज़िंदगी उन लोगों का इंतज़ार नहीं करती जो परफेक्ट पल का इंतज़ार करते हैं। वह तो उन लोगों के साथ आगे बढ़ती है, जो सीखते हैं, जो बदलते हैं और जो लगातार मेहनत करते हैं। याद रखिएगा, जो मौका आप नहीं लेते, वह किसी और के जीवन की कहानी बन जाता है। इसलिए आज से तैयार और सतर्क रहकर निरंतर प्रयास कीजिए क्योंकि सफलता उन्हीं को मिलती है जो पूरी तैयारी के साथ सजग रहते हुए मौकों को पहचान कर जीवन में कंसिस्टेंसी के साथ आगे बढ़ते हैं।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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