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असाधारण बनना है तो साधारण बन जाइए !!!

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • Jul 22, 2025
  • 3 min read

July 22, 2025

फिर भी ज़िंदगी हसीन है...

यकीन मानियेगा दोस्तों, हमारे जीवन का सबसे बड़ा संघर्ष ख़ुद को असाधारण सिद्ध करना या बनाना है। जी हाँ दोस्तों, इस दुनिया का लगभग हर इंसान असाधारण बनने की चाह में जीता है। वह चाहता है कि लोग उसे पहचानें, उसे सराहें, समाज में उसकी चर्चा हो। इसलिए ही तो इंसान कभी इस सपने को धन से पूरा करने का प्रयास करता है, तो कभी सत्ता से, तो कभी अपनी कला से, तो कभी नाम और यश से। लेकिन अगर आप गहराई से इस विषय में सोचेंगे तो पायेंगे कि यह अंतहीन दौड़ अक्सर हमें अनावश्यक प्रतिस्पर्धा की ओर धकेलती है, जो अंततः हमें अधूरी इच्छाओं के साथ तनावग्रस्त बनाता है।


इस विषय में हमारी सबसे बड़ी गलती यह है कि हम मानते हैं कि “कुछ बड़ा बनने” का मतलब, सबसे अलग, सबसे खास दिखना है। जबकि हक़ीक़त में जीवन का सबसे बड़ा चमत्कार साधारण बने रहना है। याने आपके पास सब कुछ हो तब भी सामान्य रहना और कुछ ना हो तब भी सामान्य और साधारण रहना।


सोच कर देखियेगा दोस्तों, बिना किसी पहचान, बिना किसी प्रदर्शन के, साधारण रहते हुए संतुष्ट होना, आसान या सामान्य है क्या? मेरी नजर में तो नहीं क्योंकि हमारा अहंकार हमें यह करने की इजाजत नहीं देता। वह बार-बार हमें याद दिलाता है, “तुम खास हो, तुम्हें लोगों से अलग दिखना है, तुम्हें साबित करना है कि तुम महान हो, तुम्हारा जन्म कुछ बड़ा कर अपना नाम बनाने के लिए हुआ है।” लेकिन दोस्तों, सच तो यही है कि जीवन का असली सौंदर्य इस अहंकार को छोड़ने में है। जब आप इस ब्रह्मांड का एक सहज हिस्सा बन जाते हैं। जब आपको किसी के सामने खुद को साबित करने की जरूरत नहीं पड़ती, तब ही आप जीवन को अपने हिसाब से, पूर्णता और संतुष्टि के भाव से जी पाते हैं। इसलिए दोस्तों, मैं हमेशा कहता हूँ, “साधारण होना कमजोरी नहीं, बल्कि सबसे बड़ी ताकत है।”


जी हाँ साथियों, क्योंकि साधारण होने का मतलब है, जो है, उसे उसी रूप में स्वीकार करना। भूख लगी है तो खाना, थक गए हैं तो आराम करना। बिना किसी दिखावे, बिना किसी आडंबर के जीवन जीना और मेरी नजर में यही सच्ची आज़ादी के साथ जीवन जीना है। आज ज्यादातर लोग तनाव ग्रस्त सिर्फ़ इसलिए हैं क्योंकि वे लगातार “कुछ बनने” की दौड़ में लगे हैं। वे कभी सोच ही नहीं पाते हैं कि जब आप ‘कुछ बनने’ की चिंता छोड़ देते हैं, तब आपका मन कितना हल्का हो जाता है?


दोस्तों, अब आप निश्चित तौर पर सोच रहे होंगे कि साधारण होने का मतलब क्या है?, तो चलिये मैं इसे एकदम आसान बिंदुओं में बता देता हूँ-

पहला - बिना पहचान की लालसा के जीना

दूसरा - बिना तुलना के खुद को स्वीकार करना, और

तीसरा - बिना दिखावे के अपने क्षणों का आनंद लेना।


दोस्तों, इसी बात को अलग-अलग शब्दों में महान दार्शनिकों ने समझाते हुए कहा है, “जब तुम यह स्वीकार कर लेते हो कि तुम ‘कोई नहीं’ हो, तब तुम सबसे ज्यादा आज़ाद हो जाते हो।” लेकिन हाँ इस विषय में एक बात और याद रखियेगा, इसका मतलब यह नहीं है कि हम महत्वाकांक्षा छोड़ दें, या प्रयास करना बंद कर दें। इसका मतलब तो यह है कि हमारी पहचान और खुशी दूसरों की स्वीकृति पर निर्भर न हो। आप अपने काम को आनंद से करें, न कि किसी को प्रभावित करने के लिए।



अंत में दोस्तों, मैं इतना ही कहूँगा कि असाधारण बनने की असली कुंजी, साधारण बनने का साहस होना है क्योंकि जो व्यक्ति साधारण होकर जीना जानता है, वही असल में जीवन के साथ एक हो जाता है। तो दोस्तों, अगली बार जब मन कहे, “मुझे खास बनना है”, तो मुस्कुराइएगा और कहिएगा, “मैं पहले से ही खास हूँ, क्योंकि मैं जीवन का हिस्सा हूँ।” याद रखिएगा दोस्तों, “साधारण होना ही सबसे असाधारण उपलब्धि है, इसलिए असाधारण बनना है तो साधारण बन जाइए!”


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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