top of page
Search

अहंकार और भय एक ही सिक्के के दो पहलू हैं !!!

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • 3 days ago
  • 3 min read

June 7, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, जब भी अहंकार की बात होती है, हम अक्सर ऐसे व्यक्ति की कल्पना करते हैं जो स्वयं को सबसे श्रेष्ठ समझता हो, दूसरों को महत्व न देता हो और हर समय अपनी उपलब्धियों का प्रदर्शन करता हो। लेकिन क्या वास्तव में अहंकार केवल इतना ही है?


मेरा मानना है कि अहंकार का सबसे खतरनाक रूप वह नहीं है जो दिखाई देता है, बल्कि वह है जो हमारे भीतर चुपचाप बैठा रहता है। जब हम बार-बार कहते हैं, “यह मेरा है!” जैसे “यह पद मेरा है, “यह सफलता मेरी है”, “यह व्यक्ति मेरा है”, “यह विचार मेरा है”, तभी अहंकार जन्म लेना शुरू कर देता है और जहाँ “मेरा” बढ़ता है, वहाँ भय भी बढ़ने लगता है। खोने का भय।  असफल होने का भय। अपमानित होने का भय। पीछे छूट जाने का भय।


दोस्तों, जरा सोचिए।  यदि किसी व्यक्ति को अपने पद से अत्यधिक लगाव हो, तो वह हर समय इस डर में रहेगा कि कहीं उसका पद न चला जाए यदि किसी को अपनी संपत्ति पर अत्यधिक गर्व हो, तो वह हर समय उसे बचाने की चिंता में रहेगा। यदि किसी को अपनी प्रतिष्ठा से अत्यधिक मोह हो, तो वह आलोचना से डरने लगेगा। यही कारण है कि अहंकार और भय एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। जहाँ अहंकार है, वहाँ भय अवश्य होगा और जहाँ भय है, वहाँ प्रेम पूरी तरह खिल नहीं सकता क्योंकि प्रेम का आधार अधिकार नहीं, स्वीकार है। प्रेम का आधार स्वामित्व नहीं, समर्पण है। प्रेम का आधार पकड़ना नहीं, विश्वास करना है।


हम जीवन में बहुत कुछ अपना मान लेते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि हम इस संसार में केवल कुछ समय के लिए आए हुए यात्री हैं। हम खाली हाथ आए थे। खाली हाथ ही जाएंगे। बीच का समय केवल एक जिम्मेदारी है, स्वामित्व नहीं। हम मालिक नहीं हैं, केवल संरक्षक हैं। हमें जो प्रतिभा मिली है, वह समाज के उपयोग के लिए है। जो धन मिला है, वह सेवा का अवसर है। जो ज्ञान मिला है, वह बाँटने के लिए है। जो संबंध मिले हैं, वे प्रेम सीखने के लिए हैं। जब यह समझ विकसित होती है, तब जीवन में एक अद्भुत सरलता और सहजता आने लगेगी। तब तुलना कम हो जाती है। प्रतिस्पर्धा कम हो जाती है। असुरक्षा कम हो जाती है और भीतर शांति बढ़ने लगती है।


दोस्तों, एक और महत्वपूर्ण बात है। बहुत से लोग गलती करने से डरते हैं। उन्हें लगता है कि यदि वे असफल हो गए तो लोग क्या कहेंगे। यदि निर्णय गलत हो गया तो क्या होगा। लेकिन याद रखिए— गलती करने का साहस भी अहंकार से मुक्ति का एक मार्ग है क्योंकि अहंकार हमेशा पूर्ण दिखाई देना चाहता है। वह स्वीकार नहीं करना चाहता कि उससे भी भूल हो सकती है। जबकि विनम्र व्यक्ति जानता है कि सीखने का मार्ग गलतियों से होकर ही गुजरता है। वह गिरने से नहीं डरता। वह सीखने के लिए तैयार रहता है और यही उसकी सबसे बड़ी शक्ति बन जाती है।


दोस्तों, यदि जीवन में सच्ची शांति चाहिए, तो “मेरा” शब्द को थोड़ा छोटा कीजिए और "हमारा" शब्द को थोड़ा बड़ा कीजिए। यदि प्रेम चाहिए, तो अधिकार कम कीजिए और स्वीकार बढ़ाइए। यदि निर्भय होना चाहते हैं, तो आसक्ति कम कीजिए और विश्वास बढ़ाइए क्योंकि अंततः जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि सब कुछ प्राप्त कर लेना नहीं है। वह तो सब कुछ पाकर भी विनम्र बने रहना है और जब अहंकार धीरे-धीरे विदा होता है, तब भय भी विदा होने लगता है। फिर हृदय में एक ऐसी शांति जन्म लेती है, जहाँ प्रेम बिना किसी शर्त के खिलता है और शायद वही जीवन की सबसे बड़ी सफलता है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

Comments


bottom of page