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आपका दृष्टिकोण ही आपके जीवन की दिशा और दशा तय करता है…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • 19 hours ago
  • 3 min read

Apr 8, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, जीवन में घटने वाली हर घटना अपने साथ कोई न कोई संदेश लेकर आती है। यह संदेश हमारे जीवन के लिए कैसा होगा यह इस बात पर निर्भर करता है कि हम उसे कैसे देखते हैं। उदाहरण के लिए कक्षा बारहवीं उत्तीर्ण करने के बाद मैं पीईटी क्लियर कर इंजीनियर बनना चाहता था, बन नहीं पाया। सामान्य रूप में देखा जाये तो यह एक असफलता थी। ऐसी ही एक असफलता का स्वाद मैंने कंप्यूटर व्यवसाय के समय भी चखा था। लेकिन यकीन मानियेगा यह दोनों घटनाएँ मेरे लिए असफलता नहीं, बल्कि सफलता की नींव थी। मेरा मानना है कि एक अच्छा काउंसलर बनने में इन दोनों असफलताओं ने बड़ा योगदान दिया। आज जब कोई बच्चा जेईई या नीट में असफल होकर आता है तो मुझे उसकी सोच, उसकी स्थिति को समझने में जरा भी परेशानी नहीं होती है। ऐसा ही कुछ असफल स्टार्टअप या असफल व्यवसायी को काउंसिल करते वक्त भी मैं महसूस करता हूँ। याने एक अच्छा काउंसलर बनने में पुरानी असफलताओं का भी योगदान है। इसलिए ही तो कहा जाता है जिन परिणामों या परिस्थितियों में कोई व्यक्ति टूट जाता है, उन्हीं परिणामों या परिस्थितियों को अपनी ताकत बना कर कोई जीवन संवार लेता है। दोस्तों, अंतिम परिणाम का यही अंतर हमारी सोच और हमारे दृष्टिकोण का अंतर है। सीधे तौर पर कहूँ तो नकारात्मक और सकारात्मक सोच या दृष्टिकोण का यही अंतर हमारे जीवन की दिशा और दशा को तय करता है।


जी हाँ! जिंदगी की कोई भी बाधा ऐसी नहीं होती, जिससे हम कुछ सीख न ले सकें। दुःख में भी सुख की एक किरण छिपी होती है, हानि के भीतर भी कोई न कोई लाभ छिपा होता है, और हर प्रतिकूलता अपने साथ एक नया अवसर लेकर आती है। जरूरत सिर्फ उसे पहचानने की होती है। जैसे रास्ते में पड़ा एक पत्थर किसी के लिए ठोकर बन जाता है, तो किसी के लिए सीढ़ी का काम करता है।


दोस्तों, जीवन में लोग किसी चीज की कमी के कारण नहीं, बल्कि अपनी नकारात्मक सोच और दृष्टिकोण के कारण दुखी होते हैं। अगर हम अभावों में भी सकारात्मक रहना सीख जाएँ, तो वही अभाव हमें मजबूत बना देते हैं। इसके विपरीत अगर शिकायतों या परिस्थितियों में उलझे रहे तो जीवन में कमी ही नजर आएगी। याद रखिएगा, जीवन में संकल्प शक्ति का बहुत महत्व होता है। जब हमारा संकल्प स्पष्ट और मजबूत होता है, तो कठिन से कठिन रास्ते भी आसान लगने लगते हैं। इतिहास गवाह है कि महान कार्य कभी आसान परिस्थितियों में नहीं, बल्कि मजबूत इरादों से हुए हैं। जब मन ठान लेता है, तो सीमाएँ खुद पीछे हट जाती हैं। इसलिए अपने लक्ष्य को लेकर स्पष्ट रहें, और बार-बार निर्णय ना बदलें क्योंकि डगमगाते निर्णय सफलता की गति को धीमा कर देते हैं।


अंत में बस इतना कहना चाहूँगा, जीवन में अगर अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं; सफल होना चाहते हैं तो अपनी काबिलियत पर विश्वास रखिए। आज जो लोग आपकी असफलता या आपके तरीक़ों पर सवाल उठा रहे हैं, वही लोग कल आपकी सफलता पर तालियाँ बजाएँगे। इस दुनिया का सबसे बड़ा रोग, ‘क्या कहेंगे लोग…’ ही है। अगर आप लोगों के कहे की चिंता करेंगे, तो कभी भी अपने दिल की नहीं सुन पायेंगे।


याद रखियेगा, जीवन को बदलने; अपने सपनों के जीवन को जीने के लिए किसी बड़ी घटना; किसी बड़े बदलाव की जरूरत नहीं होती। सिर्फ़ सकारात्मक नज़रिया रखते हुए सोच का एक छोटा सा बदलाव ही काफी होता है। इसलिए सकारात्मक सोचिए, शांत रहिए, और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़िए। मेरी नजर में यही जीवन को सुंदर और सार्थक बनाने का सबसे सरल मार्ग है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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