ऐसे जियो की जाने के बाद लोग तुम्हारी कमी महसूस करें…
- Nirmal Bhatnagar

- 12 hours ago
- 3 min read
Aug 31, 2026
फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, कई साल पहले एक किस्सा सुना था, “समुद्र किनारे कुछ बच्चे खेलते हुए रेत पर अपने-अपने नाम लिख रहे थे। कोई दिल बना रहा था, कोई घर बना रहा था। तभी एक लहर आई और सब कुछ मिटा कर चली गई। यह देख वहाँ टहल रहे एक बुज़ुर्ग मुस्कुराते हुए बोले, “बेटा, रेत पर लिखी चीज़ें लहरें मिटा सकती हैं, लेकिन लोगों के दिलों पर लिखी बातें समय भी नहीं मिटा पाता।” दोस्तों, यह बात आज तक मेरे मन में अंकित है क्योंकि मैं जानता हूँ कि एक दिन मैं इस दुनिया से सचमुच चला जाऊँगा और ऐसा ही आप सब के साथ होना भी तय है। इसलिए यह मायने नहीं रखता कि हम सब कितने दिन या वर्ष जिए। मायने तो यह रखता है कि जाते वक्त हम अपने पीछे क्या छोड़कर गए; प्रेरणा, पहचान, निशान... या केवल कुछ अधूरे अफ़सोस?
दोस्तों, जीवन केवल साँस लेने का नाम नहीं है। जीवन का अर्थ है, ऐसे सपने देखना जो केवल हमारे लिए नहीं, समाज के लिए भी उपयोगी हों। ऐसा प्रेम करना जिसमें स्वार्थ से अधिक अपनापन हो और ऐसा कर्म करना जो थकान से नहीं, उद्देश्य से प्रेरित हो। हाँ, यह भी सही है कि आपके उद्देश्य सुन दुनिया आपको समझौता करने की सलाह देगी। आपसे कहेगी, “इतनी ईमानदारी से क्या मिलेगा?” हो सकता है यह भी कहे, “सब ऐसा ही करते हैं, तुम भी कर लो।” आपके अपने भी बोल सकते हैं, “सिद्धांतों से जीवन नहीं चलता।” लेकिन इतिहास गवाह है कि दुनिया को बदलने वाले लोग वही थे, जिन्होंने समझौते की आवाज़ से अधिक अपने अंतःकरण की आवाज़ सुनी। याद रखिएगा, समझौता सुविधा देता है, लेकिन सत्य पहचान देता है।
दोस्तों, मेरी नजर में इस सोच के पीछे तनाव नहीं बल्कि इसी क्षण सब कुछ पाने की बीमार सोच है। सभी को इसी क्षण सफल होना है; अपनी पहचान बनाना है। हर कोई अभी परिणाम चाहता है। याने लोग बीज बोते ही पेड़ से फल प्राप्ति की इच्छा रखने लगे हैं। शायद ऐसे सभी लोग प्रकृति द्वारा पढ़ाये गए धैर्य के पाठ को भूल गए है। याद रखिएगा, सूरज अपने समय पर निकलता है। ऋतुएँ भी अपने समय पर बदलती हैं। बीज भी अपनी गति से वृक्ष बनता है। इसी तरह अगर सब कुछ समय पर हो रहा है तो जीवन में इतनी जल्दबाज़ी करने से क्या फ़ायदा?
दोस्तों, “सब कुछ अभी होना चाहिए।”, की सोच तनाव पैदा करती है और यह विश्वास होना कि जो होना है सही समय पर अवश्य होगा, हमें तनाव रहित रखता है। इसका अर्थ यह नहीं है कि हम कर्म करना छोड़ दें। इसका अर्थ तो केवल इतना है कि पूरी निष्ठा से कर्म करने के बाद हमें परिणाम को समय के हाथों में सौंप देना है। इसी बात के महत्व को समझाते हुए दार्शनिक सेनेका ने कहा था, “अंतर बुद्धि में नहीं, बल्कि उसके उपयोग में होता है।” अर्थात् ज्ञान होना बड़ी बात नहीं है। ज्ञान को सही दिशा में लगाना बड़ी बात है। आज जानकारी हर मोबाइल में उपलब्ध है। लेकिन विवेक हर मन में उपलब्ध नहीं है। शिक्षा हमें कमाना सिखाती है। लेकिन विवेक हमें बताता है कि कमाई का उपयोग कहाँ करना है। इसी तरह बुद्धि हमें आगे बढ़ा सकती है। लेकिन हमारा चरित्र तय करता है कि हम आगे बढ़कर किसका हाथ पकड़ेंगे। इसलिए बुद्धिमान नहीं बल्कि विवेकवान बनने का प्रयास कीजिए।
दोस्तों, जब जीवन की अंतिम साँझ आएगी, तब लोग यह नहीं गिनेंगे कि आपके पास कितनी संपत्ति थी। वे तो बस इतना याद करेंगे कि आपके कारण कितने लोगों के जीवन में आशा आई… कितने चेहरों पर मुस्कान आई… और कितने लोगों ने आपको याद करके यह कहा, “इस इंसान के आने से मेरी ज़िंदगी थोड़ी बेहतर हुई थी।” अंत में बस इतना याद दिलाऊँगा कि बड़े सपने देखिए, सच्चे मन से प्रेम कीजिए, पूरी निष्ठा से कर्म कीजिए और परिणाम के लिए धैर्य रखिए क्योंकि जो लोग सत्य पर अडिग रहकर, विश्वास के साथ, अपनी बुद्धि का सदुपयोग करते हुए जीवन जीते हैं, वे दुनिया पर अपने व्यक्तित्व की ऐसी अमिट छाप छोड़ जाते हैं, जो समय के साथ और गहरी होती जाती है। दोस्तों, जीवन ऐसा जियो कि तुम्हारे जाने के बाद लोग तुम्हारी कमी महसूस करें, तुम्हारी गलतियाँ नहीं।
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर




Comments