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- Nirmal Bhatnagar

- 1 day ago
- 3 min read
Aug 29, 2026
फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, एक बार किसी ने माली से पूछा, “तुम्हें अपने बगीचे में सबसे सुंदर पेड़ कौन-सा लगता है?” माली मुस्कुराते हुए बोला, “वह पेड़, जिसकी शाखाएँ दसों दिशाओं में फैली हैं, जिसके पत्ते अलग-अलग आकार के हैं, लेकिन जिसकी जड़ एक ही है।” पहली नजर में सुनने में यह बात विचित्र लगी, लेकिन जब इसपर गंभीरता से विचार किया तो एहसास हुआ की माली किसी पेड़ की नहीं, बल्कि मानवता की परिभाषा समझा रहा है।
जी हाँ, हम सब भी प्रकृति के बनाए उसी विशाल पेड़ के पत्ते हैं। हम सभी का रंग अलग-अलग है, सभी अलग-अलग भाषाएँ बोलते हैं, अलग-अलग धर्म को मानते हैं, अलग-अलग विचार रखते हैं, अलग-अलग कार्य करते हैं याने हर तरह से एक-दूसरे से भिन्न हैं, लेकिन उसके बाद भी ‘मानवता’ की जड़ से जुड़े होने के कारण एक हैं। इसलिए आज की दुनिया की सबसे बड़ी विडंबना लोगों का अलग-अलग होना नहीं है, बल्कि विचारों के आधार पर लोगों को बाँटना, धर्म के आधार पर निर्णय करना आदि है। सोच कर देखिए आज जाति, भाषा, प्रदेश, राजनीतिक विचारधारा और आर्थिक स्थिति के आधार पर लोग रिश्ते तय करने लगे हैं और साथ ही धीरे-धीरे यह भूल रहे हैं कि हमारी पहचान अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन संवेदनाएँ एक जैसी होती हैं। हर माँ अपने बच्चे के लिए दुआ करती है। हर पिता अपने परिवार की खुशियाँ चाहता है। हर बच्चा प्रेम चाहता है। हर वृद्ध सम्मान चाहता है। हर इंसान दुःख में सहारा और सुख में अपनापन चाहता है और यही हमारी साझा पहचान है।
दोस्तों, प्रकृति ने कभी एक जैसे फूल नहीं बनाए। एक ही बगीचे में गुलाब भी खिलता है, चमेली भी और सूरजमुखी भी। यदि माली यह निर्णय कर ले कि केवल गुलाब ही सुंदर है, तो वह अपने ही बगीचे की सुंदरता समाप्त कर देगा। ठीक वैसे ही, जब हम केवल अपने जैसे लोगों को स्वीकार करते हैं, तब हम जीवन की सबसे बड़ी सुंदरता खो देते हैं। इसलिए ही मेरा मानना है कि विविधता विरोध नहीं बल्कि विविधता तो प्रकृति का संगीत है। याद रखें, आप सही मायने में परिपक्व तब होते हैं, जब आप यह समझ कर स्वीकार लेते हैं कि किसी का अलग होना, उसका गलत होना नहीं है।
दोस्तों, आज मानवीय दृष्टि वो गुण है, जिसकी समाज को सबसे अधिक आवश्यकता है। इसलिए किसी भी व्यक्ति से मिलने के पहले यह मत पूछिए कि वह कौन-से धर्म का है, बल्कि यह देखिए कि उसका हृदय कैसा है। इसी तरह उससे यह मत पूछिए कि वह किस भाषा में बात करता है, बल्कि यह देखिए कि उसके शब्दों में संवेदना कितनी है और साथ ही यह मत देखिए कि वह कितना बड़ा पद सम्भालता है, बल्कि यह देखिए कि वह छोटे से छोटे व्यक्ति के साथ कैसा व्यवहार करता है। क्योंकि इंसान की पहचान उसके परिचय-पत्र से नहीं, बल्कि उसके व्यवहार से होती है।
दोस्तों, जब हम केवल अंतर देखते हैं, तो मन में तुलना जन्म लेती है। तुलना से अहंकार या हीनता पैदा होती है और जहाँ अहंकार और हीनता है, वहाँ शांति हो ही नहीं सकती। इसके विपरीत जिस दिन हम समानताओं को देखना शुरू कर देते हैं, उसी दिन करुणा जन्म लेती है और जहाँ करुणा है, वहाँ संघर्ष कम और सहयोग अधिक होता है। इसलिए यदि जीवन में शांति चाहिए, तो लोगों में कमियाँ ढूँढ़ने से पहले उनके भीतर मौजूद इंसान को देखना सीखिए।
अंत में बस इतना याद रखिएगा कि पेड़ कभी अपनी किसी शाखा से युद्ध नहीं करता। नदी कभी अपनी किसी लहर से भेदभाव नहीं करती। सूरज कभी यह नहीं पूछता कि उसकी रोशनी किस पर पड़ेगी। याने दोस्तों, प्रकृति हमें हर दिन याद दिलाती है कि एकता का अर्थ एक जैसा होना नहीं, बल्कि अलग-अलग होकर भी एक-दूसरे से जुड़े रहना है और जिस दिन यह सत्य हमारे हृदय में उतर जाएगा, उस दिन केवल हमारा जीवन ही नहीं, बल्कि पूरी मानवता का जीवन और अधिक सुंदर हो जाएगा।
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर




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