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सिद्धांत ही व्यक्ति को महान बनाते हैं !!!

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • 3 hours ago
  • 3 min read

'Aug 30, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, चलिए आज लेख की शुरुआत एक किस्से से करते हैं। एक बार एक युवा अधिकारी ने अपने वरिष्ठ से पूछा, “सर, ईमानदारी से काम करने वाले लोगों को अक्सर संघर्ष क्यों करना पड़ता है?” वरिष्ठ अधिकारी मुस्कुराते हुए बोले, “क्योंकि नदी की धार के विपरीत तैरने में साहस और ताक़त दोनों ज़्यादा लगती है।” वरिष्ठ अधिकारी का यह उत्तर जीवन के हर क्षेत्र में लागू होता है।”


जी हाँ दोस्तों, नदी की धार के अनुरूप तैरना याने समझौता करते हुए जीना, हकीकत में आज के समय में सबसे आसान काम है। याद रखिएगा, इतना तो चलता है…, सब कर रहे हैं…, चलने दो… इतना कौन सोचता है…, एक बार से क्या फर्क पड़ता है… की सोच रखना धीरे-धीरे इंसान के चरित्र को खोखला कर देता है। इसलिए ही कहा जाता है, “चरित्र एक दिन में नहीं गिरता। वह तो समय के साथ दी गई छोटी-छोटी रियायतों से गिरता है।” याने इंसान पहले सत्य के साथ थोड़ा समझौता करता है, फिर ईमानदारी से, उसके बाद अपने सिद्धांतों से और अंत में एक दिन ऐसा आता है जब आईने में खड़ा व्यक्ति सफल तो दिखाई देता है, लेकिन सम्मानित नहीं।


दोस्तों, जिस व्यक्ति का जीवन सिद्धांतों पर आधारित होता है, उसका प्रभाव उसके शब्दों से नहीं, उसके आचरण से दिखाई देता है। ऐसे लोग बोलते या भाषण कम देते हैं, लेकिन अपने आचरण से उदाहरण अधिक बनते हैं। वे भीड़ को खुश करने के लिए अपने मूल्य नहीं बदलते। उन्हें लोकप्रिय बनने की नहीं, विश्वसनीय बनने की चिंता होती है। याद रखिएगा, जो व्यक्ति हर किसी को खुश करने निकलता है, वह अंततः स्वयं से ही दूर हो जाता है। जीवन में कई अवसर ऐसे आयेंगे, जब आपके सत्य बोलने से लोग नाराज होंगे, ईमानदार होने की वजह से कुछ अवसर छूटेंगे और सही निर्णय लेने के कारण आप अकेले पड़ जाएँगे। लेकिन यही वे क्षण होंगे, जो आपके चरित्र का निर्माण करेंगे।


दोस्तों, अब्राहम लिंकन ने इसे दूसरे शब्दों में समझाते हुए कहा था, “बल से सब कुछ जीता जा सकता है, लेकिन उसकी विजय बहुत थोड़े समय के लिए होती है।” याने डर दिखाकर लोगों को कुछ समय तक नियंत्रित किया जा सकता है। पद के बल पर आदेश मनवाए जा सकते हैं। धन के बल पर लोग साथ आ सकते हैं। लेकिन सम्मान, विश्वास, और प्रेरणा, ये कभी बल से नहीं मिलते। ये केवल चरित्र से अर्जित होते हैं। इतिहास गवाह है कि जिन लोगों ने समाज में स्थायी परिवर्तन किए, उनके हाथ में सबसे बड़ा हथियार शक्ति नहीं, सत्य था। महात्मा गांधी के पास सेना नहीं थी। स्वामी विवेकानंद के पास कोई राजनीतिक सत्ता नहीं थी। डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के पास धन का प्रदर्शन नहीं था। फिर भी आज करोड़ों लोग उन्हें याद करते हैं। क्यों? क्योंकि उन्होंने लोगों को अपने प्रभाव से नहीं, अपने चरित्र से जीता।


दोस्तों, आज दुनिया में प्रतिभाशाली लोगों की कमी नहीं है। कमी है तो ऐसे लोगों की, जिन पर आँख बंद करके विश्वास किया जा सके। इसलिए अपने बच्चों को केवल सफल बनना मत सिखाइए। उन्हें सिद्धांतों पर अडिग रहना भी सिखाइए। इसी तरह अपने सहयोगियों को सही रास्ते पर चलते हुए लक्ष्य प्राप्त करना भी सिखाइए और स्वयं से प्रतिदिन एक प्रश्न पूछिए, “क्या मैं सुविधा के अनुसार निर्णय ले रहा हूँ, या अपने सिद्धांतों के अनुसार?” यही प्रश्न आपके भविष्य का निर्माण करेगा।


अंत में बस इतना दोहराऊँगा कि समझौते आपको कुछ समय के लिए सुरक्षित बना सकते हैं। लेकिन सिद्धांत आपको जीवनभर सम्मानित बनाते हैं और जब व्यक्ति का चरित्र इतना मजबूत हो जाता है कि वह दुनिया की नाराज़गी से नहीं, अपने अंतःकरण की आवाज़ से निर्णय लेने लगता है, तब वही व्यक्ति समाज में सकारात्मक परिवर्तन का कारण बनता है। क्योंकि दुनिया ताकतवर लोगों को नहीं, बल्कि सिद्धांतों पर अडिग रहने वाले लोगों को ही सच्चा सम्मान देती है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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