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कर्मों की छाप ही जीवन में सच्ची ख़ुशी लाती है !!!

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • 12 minutes ago
  • 2 min read

Feb 12, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, आज मैं आपसे खुश रहने का कोई आसान नुस्खा नहीं, बल्कि जीवन को अर्थ देने वाली वह समझ साझा करना चाहता हूँ जिसने मेरे जीवन को एक नया अर्थ दिया। जिसने समय के साथ मेरा सामना इस सच्चाई से करवाया कि जीवन में खुशी परिस्थितियों से नहीं बल्कि, दृष्टि और दिशा से आती है। दोस्तों, अगर आप सच में खुश रहना चाहते हैं, तो ऐसा लक्ष्य चुनिए जो आपके विचारों को भटकने से रोके, आपकी ऊर्जा को व्यर्थ होने से बचाए और आपकी आशाओं को रोज़ नया अर्थ दे। जिसके पास स्पष्ट लक्ष्य नहीं होता, वह हर बदलाव से हिल जाता है और जिसके पास उद्देश्य होता है, वह कठिन समय में भी स्थिर रहता है।


लक्ष्य चुनते वक्त एक बात और याद रखियेगा, आपके तमाम लक्ष्यों में एक लक्ष्य देने के भाव वाला भी होना चाहिए क्योंकि जीवन में सबसे गहरी बातें अक्सर शब्दों से नहीं कही जातीं। हृदय से जितना दिया जा सकता है, उतना हाथ से नहीं दिया जा सकता और मौन से जो समझाया जा सकता है, वह हजार शब्दों से भी नहीं समझाया जा सकता। कभी आपने महसूस किया है, किसी का चुपचाप साथ बैठ जाना, बिना कुछ कहे आपके दुख को समझ लेना, आपके कंधे पर हाथ रख देना, कितना सुकून दे जाता है? यही सच्ची संवेदना है।


लेकिन दोस्तों, जीवन का एक कड़वा सच यह भी है, कई बार समय के बदलने से उतना कष्ट नहीं होता, जितना कष्ट अपनों के बदल जाने से होता है। वे लोग, जिनके लिए हम खड़े रहे, जिन्हें हमने प्राथमिकता दी, जब वही बदल जाते हैं, तब भीतर कुछ टूटता है। पर यहीं जीवन हमें परिपक्व बनाता है। यहीं हम सीखते हैं कि हर साथ स्थायी नहीं होता, और हर दूरी हमारी गलती नहीं होती।


इसी सच्चाई को अपने जीवन में पूरी करुणा और कर्म से जिया मदर टेरेसा ने। उन्होंने कभी यह नहीं देखा कि लोग कैसे बदलते हैं, उन्होंने यह देखा कि ज़रूरतमंद को आज क्या चाहिए?, लोगों ने उन्हें आलोचना दी, सवाल उठाए, पर उन्होंने उत्तर शब्दों से नहीं, सेवा से दिया। उन्होंने कहा था, “हम बड़े काम नहीं कर सकते, पर छोटे काम बड़े प्रेम से कर सकते हैं।” यही कर्म की सच्ची भाषा है।


दोस्तों, एक बेहतरीन इंसान अपनी बातों से नहीं, अपनी जुबान और कर्मों से पहचाना जाता है। आप क्या कहते हैं, यह उतना मायने नहीं रखता, जितना यह कि आप क्या करते हैं। जो व्यक्ति अपने कर्म को समझ लेता है, उसे धर्म को समझने के लिए किसी व्याख्यान की ज़रूरत नहीं पड़ती क्योंकि धर्म कोई किताब नहीं, धर्म सही कर्म की निरंतरता है।


आज की दुनिया में जहाँ दिखावा तेज़ है और संवेदना धीमी, वहाँ असली पहचान शांत कर्मों से बनती है। आपका व्यवहार, आपकी प्रतिक्रिया, आपकी ईमानदारी; यही आपकी पहचान है।


तो दोस्तों, आज अगर खुश रहना है तो तीन बातों को जीवन में उतारिए—

ऐसा लक्ष्य चुनिए जो आपको रोज़ दिशा दे।

शब्दों से ज़्यादा हृदय और मौन से जुड़िए।

बदलते लोगों से कटु न बनिए, बल्कि अपने कर्मों में स्थिर रहिए।

क्योंकि अंत में लोग आपकी बातें भूल सकते हैं, पर आपके कर्मों की छाप कभी नहीं भूलते और यही छाप आपकी असली खुशी बन जाती है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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