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जानते हैं आपका पूरा जीवन कहाँ आकार लेता है ?

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • 2 days ago
  • 3 min read

Feb 11, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, आज मैं आपसे उस जगह की बात करना चाहता हूँ जहाँ से आपका पूरा जीवन आकार लेता है, आपका मन। आपका मन एक बगीचे की तरह है और आपके विचार, उसमें बोए गए बीज। अब यह पूरी तरह आप पर निर्भर करता है कि आप उसमें फूल उगाते हैं या खरपतवार। बस इस बगीचे में विचारों के बीज बोते वक्त एक बात याद रखियेगा कि हमें किसी भी हाल में काँटे नहीं उगाने हैं क्योंकि वे न तो आपको सुख देंगे और ना ही किसी और को।


चलिए, इसे थोड़ा और विस्तार से समझते हैं। हमारे विचार हमारी भाषा बनती है; हमारी भाषा हमारा व्यवहार बनती है और हमारा व्यवहार ही हमारा भविष्य गढ़ता है, लेकिन अक्सर हम इस साधारण से सूत्र को भूल जाते हैं। अगर मन में ईर्ष्या होगी तो बगीचे में खरपतवार उगेगी। अगर मन में डर होगा, तो काँटे उगेंगे और अगर मन में विश्वास, करुणा और साहस होगा, तो जीवन रूपी बगीचे में फूल खिलेंगे।


रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने इस सत्य को अपने जीवन में पूरी गहराई से जिया था। उनके विचारों को समझने के लिए आपको उनके जीवन को गहराई से देखना होगा। उन्होंने ऐसे समय में स्वतंत्र सोच और रचनात्मकता की बात की जब समाज डर, परंपरा और बंधनों से जकड़ा हुआ था। उन्होंने अपनी एक कविता में कहा था, “जहाँ मन भय से मुक्त हो, और मस्तक ऊँचा उठा हो, वहीं सच्चा स्वर्ग है।” यह पंक्ति केवल कविता का हिस्सा नहीं थी, बल्कि यह तो उनके मन के बगीचे में खिले फूल थे।


आप उनके पूरे जीवन को देखेंगे तो पायेंगे कि टैगोर ने कभी अपने विचारों को नफरत, कटुता या बदले के काँटों से नहीं भरा। उन्होंने शिक्षा, कला और मानवता को सबके कल्याण के लिए उपयोग किया। उनका मानना था, हर इंसान के भीतर प्रतिभा का बीज होता है। लेकिन वह तभी अंकुरित होता है जब उसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मिले।


दोस्तों, यही कारण है कि प्रतिभा किसी एक व्यक्ति की जागीर नहीं है। उसके तत्व हम सभी में मौजूद हैं। लेकिन मुख्य प्रश्न यह है कि, ‘क्या हम अपने मन को ऐसा वातावरण दे रहे हैं, जहाँ वह प्रतिभा पनप सके?’ अगर मन लगातार नकारात्मक खबरों, तुलना, और डर से भरा रहेगा, तो फूल याने प्रतिभा के बीज घुट जाएंगे और अगर मन को स्वतंत्रता, सकारात्मकता और उद्देश्य के बीज मिले, तो साधारण व्यक्ति भी असाधारण बन जायेगा।


एक बात और याद रखिएगा, आपके विचार केवल आपके नहीं रहते। वे आपके परिवार, आपके बच्चों, आपके कार्यस्थल और समाज तक पहुँचते हैं। इसलिए यह आपकी ज़िम्मेदारी है कि आप अपने मन में अच्छे विचारों के बीज बोयें। इसलिए आज ही एक छोटा-सा संकल्प लीजिए और कहिए, “आज से मैं अपने मन के बगीचे की देखभाल करूँगा। मैं अब कभी भी उसमें घृणा के बीज नहीं बोऊँगा और साथ ही निराशा को खाद और भय को पानी नहीं बनाऊँगा। मैं अपने विचारों में स्वतंत्रता रखूँगा, अपनी प्रतिभा को कभी नहीं दबाऊँगा, और अपनी क्षमता का उपयोग सिर्फ़ अपने लिए नहीं, बल्कि सबके भले के लिए करूँगा।”


दोस्तों, जब ईश्वर-प्रदत्त क्षमताएँ स्वतंत्र होकर मानव कल्याण के लिए काम करती हैं, तभी असली प्रतिभा प्रकट होती है, और समाज आगे बढ़ता है। याद रखिएगा, बगीचा आपका है, बीज आपके हैं, और भविष्य भी आपके ही हाथों में है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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