क्षमा करें, बड़ा बनें…
- Nirmal Bhatnagar

- Aug 9, 2025
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Aug 9, 2025
फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, अगर वाक़ई जीवन में बड़ा बनना चाहते हो तो क्षमा करना सीख लो, और हाँ यह मैं नहीं कह रहा हूँ यह बात तो हमारी पुरातन संस्कृति हमें सिखाती है। जी हाँ, क्षमा करना कितना बड़ा गुण है इस बात का अंदाजा आप इस दोहे से भी समझ सक्त हैं, “क्षमा बड़न को चाहिए, छोटन को उत्पात। का हरि को घटि गयो, जौं भृगु मारी लात।।” अर्थात् क्षमा करना बड़ों का गुण होता है।
यकीनन दोस्तों, सच्ची महानता उसी में होती है जो सहनशीलता और धैर्य से दूसरों की गलतियों को माफ कर सके। यह गुण न केवल व्यक्ति के चरित्र को ऊँचा उठाता है बल्कि समाज में भी एक सकारात्मक संदेश देता है। इसी बात को मैं आपको एक कहानी से समझाने का प्रयास करता हूँ। बात कई सौ साल पुरानी है, एक राजा अपने महल में भोजन कर रहा था। उसी दौरान खाना परोसते समय एक सेवक से गलती से थोड़ी सब्जी उनके कपड़ों पर गिर गई, जिसकी वजह से राजा का चेहरा गुस्से से लाल हो गया।
राजा को गुस्से में देख सेवक घबरा गया, लेकिन तत्काल स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए उसने एक अनोखा निर्णय लिया। उसने परोसने के बरतना में बची पूरी सब्जी को राजा के कपड़ों पर उड़ेल दिया। इस घटना ने राजा के गुस्से को चरम पर पहुँचा दिया। उसने क्रोधित स्वर में सेवक से पूछा, “तुमने यह दुस्साहस कैसे किया?” सेवक ने दोनों हाथ जोड़ कर बड़े शांत भाव से उत्तर दिया, “महाराज, जब पहली बार सब्जी गिरी तो मुझे लगा कि अब मेरी जान नहीं बचेगी। लेकिन फिर मैंने सोचा कि अगर आप मुझे इस छोटी सी गलती पर कड़ी सजा देंगे, तो लोग आपको क्रूर राजा समझेंगे और आपकी बदनामी होगी। इसलिए मैंने सोचा कि पूरी सब्जी ही गिरा दूँ, ताकि सारा दोष मुझ पर आए और मेरे दयालु राजा की छवि खराब न हो।”
सेवक की बात सुनकर राजा को गहरा बोध हुआ। उसे अहसास हुआ कि एक सच्चा सेवक केवल आज्ञा का पालन ही नहीं करता, बल्कि स्वामी की प्रतिष्ठा का भी ध्यान रखता है। राजा ने सेवक को क्षमा कर दिया और इस घटना से एक महत्वपूर्ण सीख ली कि गुस्से में प्रतिक्रिया देने के मुकाबले गहराई से विचार करना हमेशा बेहतर होता है। वैसे भी किसी के प्रति क्रोध करना आसान है, लेकिन किसी को माफ कर देना और उसकी गलती को प्रेम से सुधारने का अवसर देना असली महानता की पहचान होती है।
दोस्तों, जीवन में दोस्त, परिवार के सदस्य, सहकर्मी या सेवक के रूप में हमें कई बार ऐसे लोग मिलते हैं, जो हमारे साथ समर्पण और ईमानदारी से जुड़े होते हैं। उनकी छोटी-मोटी गलतियों पर गुस्सा करने के बजाय हमें उनके प्रेम और समर्पण को पहचानना चाहिए और उन्हें क्षमा कर जीवन में आगे बढ़ जाना चाहिए। याद रखियेगा, दूसरों की गलती को समझकर क्षमा करना ना सिर्फ़ सच्चा बड़प्पन होता है, बल्कि यह रिश्ते को और ज्यादा मजबूत बनाता है।
राजा और सेवक की यह कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि महान व्यक्ति वही होता है जो अपने क्रोध को त्यागकर क्षमा का भाव रखे। अगर हम अपने रिश्तों में यह गुण अपनाते हैं, तो न केवल हमारे संबंध मधुर होंगे, बल्कि समाज में भी शांति और प्रेम का संदेश फैलेगा। इसलिए, जब भी किसी की कोई गलती दिखे, तो सबसे पहले ख़ुद को याद दिलायें कि हम भी इंसान हैं और हमसे भी गलतियां हो सकती हैं। उसके बाद सामने वाले की गलती पर ध्यान देने के स्थान पर उसके पीछे छिपे भाव को समझने की कोशिश करें और फिर सहृदयता से निर्णय लें। यही सच्ची मानवता की पहचान है।
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर




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