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ग़लत लगता व्यवहार भी आपका भविष्य बना सकता है…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • 2 hours ago
  • 3 min read

Mar 13, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, जीवन में कई बार हमें लगता है कि सब कुछ हमारे नियंत्रण में है। हम अपने काम में इतने डूब जाते हैं; अपनी उपलब्धियों में इतने खो जाते हैं कि हमें यह भी दिखाई नहीं देता कि हम किस दिशा में जा रहे हैं। सफलता, प्रशंसा और उपलब्धियाँ कभी-कभी हमें इतना तल्लीन कर देती हैं कि हम अपने आसपास के खतरे या सच्चाई को देख ही नहीं पाते। ऐसे दौर में अक्सर ईश्वर हमारे जीवन में एक ऐसे हितैषी को भेजता है जो हमें रोकता है - कभी कठोर शब्दों से, तो कभी किसी ऐसे व्यवहार से जो उस समय हमें गलत लगता है, लेकिन बाद में वही कठोर शब्द या ग़लत लगने वाला व्यवहार हमारे लिए वरदान सिद्ध होता है। चलिए, एक कहानी से इसे थोड़ा गहराई से समझने का प्रयास करते हैं -


पर्वतारोहण के दौरान प्राकृतिक सुंदरता से मोहित हो एक महान चित्रकार वहीं चित्रकारी करने बैठ गया। कुछ ही क्षणों में वो अपने कार्य में इतना तल्लीन हो गया कि उसे अपने आसपास की दुनिया का बिल्कुल भी ध्यान नहीं रहा। वह कई घंटों तक इसी तरह कार्य करता रहा और फिर जब उसे अपनी पेंटिंग पूर्ण लगी तो वह अपनी उस नायाब कलाकृति को दूर से निहारने के लिए पीछे हटने लगा। इस दौराना इसे एहसास ही नहीं हुआ कि वो पहाड़ी के एकदम किनारे पर पहुँच गया है और अगर उसने एक कदम और पीछे लिया तो वह हज़ारों फीट गहरी खाई में गिर जाता।


इस पूरे घटनाक्रम को पास ही में खड़ा उसका शिष्य देख रहा था, वह तुरंत इस खतरे को भांप गया। लेकिन तभी उसने यह भी महसूस किया कि चिल्लाकर गुरु को सचेत करना भी संभव नहीं है क्योंकि तेज आवाज से घबरा कर गुरु अपना संतुलन खोकर, खाई में गिर सकते थे। उसने एक ही क्षण में निर्णय लिया और पास ही पड़े कलर के ब्रश को लेकर गुरु की बनाई अनमोल चित्रकारी पर पोत दिया। कुछ ही पलों में पूरी पेंटिंग खराब हो गई। जब चित्रकार ने यह देखा, तो वह क्रोध से भर उठा। ढेर सारी मेहनत और लगन से बनी कलाकृति किसी ने क्षण भर में खराब कर दी थी।


वह गुस्से में तेज़ी से अपने शिष्य को डांटने के लिए आगे बढ़ा, तभी शिष्य ने शांत स्वर में नीचे की खाई की ओर इशारा करते हुए उसे पूरी बात कह सुनाई। जिसे सुन चित्रकार ने खाई में नीचे झाँका तो उसकी रूह तक काँप गई। उसे समझ में आ गया कि यदि वह पीछे हटता रहता, तो कुछ ही सेकंड में उसकी जान चली जाती। अब उस महान चित्रकार की आँखों में आँसू थे। उसने उसी क्षण अपने शिष्य को गले लगा लिया और समझ गया कि जिस पेंटिंग को वह अपना सबसे बड़ा खजाना समझ रहा था, उसकी तुलना में उसका जीवन कहीं अधिक मूल्यवान था।


दोस्तों, यह क़िस्सा सिर्फ़ एक कहानी नहीं, बल्कि जीवन का गहरा सत्य है। कई बार हमारे जीवन में भी ऐसे लोग आते हैं जो हमें रोकते हैं, हमारी गलतियों की ओर इशारा करते हैं या हमारे रास्ते में बाधा बनते हुए दिखाई देते हैं। उस समय हमें लगता है कि वे हमारी प्रगति रोक रहे हैं या हमारी मेहनत को नुकसान पहुँचा रहे हैं। लेकिन समय के साथ हमें समझ आता है कि उनका उद्देश्य हमें गिरने से बचाना था।


दोस्तों, हमेशा याद रखियेगा कि जीवन में जो व्यक्ति हमें टोकता है, वह हमेशा हमारा विरोधी नहीं होता। कई बार वही व्यक्ति हमारे जीवन का सबसे सच्चा शुभचिंतक होता है। इसलिए जब कोई व्यक्ति ग़लतियाँ बताये या रोके या हमारी दिशा सुधारने की कोशिश करे, तो तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय थोड़ा ठहरकर गंभीरता से सोचिएगा। हो सकता है वह हमारी “पेंटिंग” बिगाड़ नहीं रहा हो, बल्कि हमारा “जीवन” बचाने की कोशिश कर रहा हो।


दोस्तों, सच्चे गुरु, सच्चे मित्र और सच्चे मार्गदर्शक वही होते हैं जो आवश्यकता पड़ने पर हमें रोकने का साहस रखें और जीवन की सबसे बड़ी बुद्धिमानी यही है कि हम ऐसे लोगों की बात को समझें, उन्हें सम्मान दें और उनसे सीखने की विनम्रता बनाए रखें।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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