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गलती को बोझ नहीं, सीढ़ी बनाएँ…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • 6 hours ago
  • 3 min read

July 2, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, हम सभी अपने जीवन में बिना कोई गलती करे सफल होना चाहते हैं। हालाँकि हम सब जानते हैं कि आज तक किसी भी इंसान ने बिना गलती किए सफलता नहीं पाई है। इस विरोधाभासी सोच के कारण ही लोग अपनी ग़लतियों से कम, बल्कि उससे होने वाले अपराधबोध से अधिक हार जाते हैं। ऐसे लोगों को मैं एक ही बात याद दिलाना चाहता हूँ, गलती करना मनुष्य का स्वभाव है, लेकिन गलती को जीवन भर ढोना मनुष्य की भूल है।


दोस्तों, मैंने ऐसे अनेक लोगों को देखा है जो वर्षों पहले हुई एक असफलता या एक गलत निर्णय के कारण आज भी स्वयं को दोषी मानते हैं। वे वर्तमान में जीवन जीने के स्थान पर अतीत की अदालत में स्वयं को बार-बार सजा सुनाते हैं। याद रखिएगा, गलती का एहसास बुद्धिमत्ता की शुरुआत है, लेकिन गलती में ही अटक जाना विकास का अंत है। इसी बात को समझाते हुए किसी ने क्या खूब कहा है, “अपनी गलतियों को सिर पर मत रखिए, उनका बोझ आपको कुचल देगा। उन्हें तो सीढ़ी मान अपने पैरों के नीचे रखिए और सफलता की ऊँचाइयों को छू लीजिए।” दोस्तों, यही जीवन को सफल बनाने का नियम है। राह में पड़ा पत्थर आपका रास्ता भी रोक सकता है और वही पत्थर सीढ़ी के निर्माण में भी काम आ सकता है। इसलिए ही कहते हैं, आपका दृष्टिकोण या नजरिया तय करता है कि चुनौतियाँ आपकी राह का रोड़ा बनेंगी या सफलता का कारण।


दोस्तों, जीवन कभी सीधी रेखा में नहीं चलता। कई बार हम एक मंज़िल तय करने के लिए निकलते हैं और जीवन हमें किसी दूसरी दिशा में ले जाता है। कभी मनचाहा कॉलेज नहीं मिलता। कभी मनचाही नौकरी छूट जाती है। कभी जिस व्यवसाय पर वर्षों की मेहनत की, वह अचानक असफल हो जाता है। कभी जिन लोगों के साथ पूरी जिंदगी बिताने का सपना देखा था, वे बीच रास्ते में साथ छोड़ देते हैं। उस समय हमें लगता है कि जीवन ने हमारे साथ अन्याय किया है। लेकिन वर्षों बाद जब पीछे मुड़कर देखते हैं, तो एहसास होता है कि यदि वह मोड़ न आया होता, तो शायद हम अपने वास्तविक उद्देश्य तक कभी पहुँच ही नहीं पाते। जीवन हमेशा हमें वहाँ नहीं ले जाता जहाँ हम जाना चाहते हैं। जीवन कई बार हमें वहाँ ले जाता है, जहाँ हमें होना चाहिए।


दोस्तों, जब एक दरवाज़ा बंद होता है, तो हमारा पूरा ध्यान उसी बंद दरवाज़े पर लगा रहता है। हम बार-बार उसी को खोलने का प्रयास करते हैं। लेकिन इसी बीच जीवन हमारे लिए कहीं और एक नया द्वार खोल चुका होता है। दुर्भाग्य यह है कि हमारा ध्यान पीछे होता है और अवसर आगे खड़ा हमारा इंतज़ार कर रहा होता है। इसलिए अतीत को सम्मान दीजिए, लेकिन उसमें निवास मत कीजिए। गलतियों से सीखिए, लेकिन उन्हें अपनी पहचान मत बनाइए। हर ठोकर अपने साथ एक शिक्षा लेकर आती है। हर असफलता एक नया कौशल सिखाती है। हर मोड़ हमारे भीतर छिपी हुई नई क्षमता से परिचय कराता है।


दोस्तों, आज यदि आपके जीवन में कुछ वैसा नहीं हो रहा जैसा आपने सोचा था, तो निराश मत होइए। हो सकता है, ईश्वर आपकी योजना से बड़ी योजना पर काम कर रहा हो। हो सकता है, जिस रास्ते को आप भटकाव समझ रहे हैं, वही आपको आपकी वास्तविक मंज़िल तक पहुँचा रहा हो। इसलिए स्वयं पर विश्वास रखिए। अपने प्रयासों पर विश्वास रखिए और उस अदृश्य शक्ति पर भी विश्वास रखिए जो हर अनुभव को किसी बड़े उद्देश्य से जोड़ती है क्योंकि जीवन में गलती करना हार नहीं है। गलती से कुछ न सीखना हार है और याद रखिए, जो लोग अपनी गलतियों को बोझ नहीं, बल्कि सीढ़ी बना लेते हैं, वही अंततः वहाँ पहुँचते हैं जहाँ पहुँचने के लिए शायद जीवन ने उन्हें शुरू से चुना था।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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