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ज़िंदगी बदलने के लिए अपनायें इस छोटी सी आदत को...

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • Jun 8, 2025
  • 4 min read

June 8, 2025

फिर भी ज़िंदगी हसीन है...

चलिए दोस्तों, सबसे पहले इस सवाल का जवाब दीजिए। मक्खियाँ कहाँ ज्यादा होंगी, सिरके के पास या फिर शहद के? क्या कहा आपने? शहद के… बिल्कुल सही! ठीक इसी तरह दोस्तों, मिठास और नम्रता से आप ज़्यादा लोगों को जीत सकते हैं, बजाय गुस्से और अकड़ के। सीधे शब्दों में कहूँ तो दूसरों के साथ विनम्रता से पेश आना सिर्फ एक विकल्प नहीं, एक आदत है और यही आदत आपकी पूरी ज़िंदगी की दिशा और दशा बदल सकती है। जी हाँ दोस्तों, इस तेज रफ़्तार ज़िंदगी में, जहाँ हर कोई आगे निकलने की होड़ में लगा है, वहाँ मानवीय स्वभाव से भरपूर याने अच्छा होना भी एक ताक़त है। चलिए अपनी बात को मैं आपको एक किस्से से समझाने का प्रयास करता हूँ-


बात कुछ साल पुरानी है, रविवार की एक शाम समीर कुछ सामान लेने के लिए एक मॉल में गया। चूँकि उस दिन मॉल में सामान्य से थोड़ी ज्यादा भीड़ थी, इसलिए उसे पार्किंग खोजने में थोड़ी दिक्कत हो रही थी। अभी वह पार्किंग के लिए जगह ढूँढ ही रहा था कि समीर की नज़र एक ख़ाली पार्किंग पर पड़ी। जहाँ एक बुजुर्ग गाड़ी रिवर्स कर पार्क करने की कोशिश कर रहे थे। समीर ने उसी क्षण अपनी गाड़ी की गति बढ़ाई और झट से उस पार्किंग स्लॉट में अपनी गाड़ी खड़ी कर दी।


बुजुर्ग व्यक्ति समीर और उसकी इस हरकत को देख थोड़े निराश हुए और फिर चुपचाप दूसरी जगह खोजने के लिए आगे बढ़ गए। कुछ क्षणों के लिए समीर को बुरा लगा, लेकिन फिर उसने सोचा, “ज़िंदगी की दौड़ में जीतना ही पड़ता है! इसलिए ही तो ‘सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट’ कहा जाता है।” एक तेज़-तर्रार और महत्वाकांक्षी सेल्समैन के रूप में समीर को अपनी यह सोच ठीक लग रही थी।


इस घटना के दो दिन बाद, समीर एक बहुत बड़े क्लाइंट से मिलने गया। यह मीटिंग उसके करियर की सबसे अहम मीटिंग थी और अभी तक हुई बातचीत और मीटिंग के आधार पर डील लगभग फाइनल ही लग रही थी। कुल मिलाकर समीर सहित सभी को लग रहा था कि बस एक औपचारिक मीटिंग बाकी है। इसलिए उस मीटिंग से पूर्व समीर की चाल-ढाल में एक अलग ही कॉन्फिडेंस याने आत्मविश्वास नजर आ रहा था। लेकिन, जैसे ही समीर ने मीटिंग रूम में कदम रखा, वह चौंक गया। असल में सीईओ के रूप में उसके सामने कोई और नहीं, वही बुजुर्ग व्यक्ति बैठे थे, जिनसे समीर ने पार्किंग छीनी थी। दोस्तों, आगे क्या हुआ होगा उसका अंदाज़ा आप स्वयं ही लगा सकते हैं।


दोस्तों, हर दिन, हमें ऐसे कई मौके मिलते हैं जहाँ हम अपने चरित्र का परिचय दे सकते हैं; अपनी अमिट छाप छोड़ सकते हैं। लेकिन सामान्य जीवन में अक्सर हम समीर की ही तरह इन मौकों को गँवा देते हैं। असल में दोस्तों, विनम्रता के साथ दूसरों से पेश आना या यूँ कहूँ मानवीयता से भरपूर व्यवहार करना, वे छोटे-छोटे मौके होते हैं जो दुनिया को आपका असली चेहरा दिखाते हैं। सहमत ना हों तो उस क्षण को याद करके देखिए जब आपके लिए किसी ने दरवाज़ा खोला था। अब बताइए, उस एक क्षण ने आपको कैसा महसूस करवाया था? अच्छा, है ना? लेकिन क्या आप भी हर बार दूसरों के लिए वैसा ही करते हैं? असल में हम में से ज्यादातर लोग ख़ुद में इतने व्यस्त हो गए हैं कि हमारे पास अब दूसरों के विषय में सोचने के लिए वक्त ही नहीं है।


दोस्तों, दूसरों के लिए दरवाजा खुला रखना न सिर्फ़ विनम्रता से भरपूर कार्य है बल्कि एक जीवनशैली है। यह दूसरों को अपने से ऊपर रखने की भावना है। यह दिखाता है कि आपके अंदर सिर्फ़ कामयाबी पाने की ही नहीं, बल्कि दूसरों को ऊपर उठाने की भी चाह है। इसलिए इसे एच.टी.डी.ओ. याने ‘होल्ड द डोर ओपन’ मानसिकता या जीवनशैली भी कहा जाता है। इस शैली के साथ जीवन जीना आपको न सिर्फ़ मानसिक और भावनात्मक रूप से मजबूत बनाता है, बल्कि आपको दूसरों के दिल में जगह बनाने का मौका भी देता है। जो अंततः आपको एक बेहतर इंसान, बेहतर लीडर और प्रेरणा का स्त्रोत बनाता है।


याद रखिएगा दोस्तों, एक अच्छा इंसान वो नहीं जो सबसे आगे निकल जाए, बल्कि वो है जो औरों को साथ लेकर चलना जानता है क्योंकि सच्ची कामयाबी, सिर्फ़ ख़ुद जीतने में नहीं, बल्कि दूसरों को जिताने में है। इसलिए ही तो कहा जाता है, “महत्वपूर्ण बनना अच्छी बात है, लेकिन अच्छा इंसान बनना उससे भी ज़्यादा ज़रूरी है।”


इसलिए दोस्तों, अगली बार जब भी मौक़ा मिले तब एक पल के लिए ठहरें और और पीछे से आने वालों के लिए दरवाजा खुला रखें। उनसे विनम्रता से पेश आयें। दिखने में यह कार्य छोटा हो सकता है, लेकिन यह ये बताता है कि आप किस मिट्टी से बने हैं। याद रखिएगा दोस्तों, 99% लोग ख़ुद के लिए दरवाजा खोलते हैं और 1% लोग दरवाज़ा खोल कर दूसरों को पहले निकलने देते हैं। अब यह आपको तय करना है कि आप किस 1% में रहना चाहते हैं?


मैं तो सिर्फ़ इतना ही कहूँगा कि एच.टी.डी.ओ. को अपनाइये और ख़ुश रहते हुए, इंसानियत फैलाइए। जब आप दूसरों के लिए दरवाजा खुला रखेंगे तो ज़िंदगी आपके लिए और भी दरवाज़े खोलेगी। अंत में इतना ही कहूँगा दोस्तों कि नम्र रहें, मददगार बनें और सदैव ब्लेस्ड याने आशीर्वादित रहें।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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