प्रेरणादायी बनना है तो अपनाएँ यह सूत्र…
- Nirmal Bhatnagar

- 1 day ago
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May 24, 2026
फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, हर इंसान के भीतर कुछ करने की, कुछ बदलने की, कुछ बनने की एक आग होती है। यही आग उसके सपनों को जन्म देती है; उसे मुश्किल रास्तों पर भी चलते रहने की ताकत देती है और यही आग उसके जीवन का प्रकाश बनती है। लेकिन समस्या यह है कि दुनिया अक्सर उस आग को समझ नहीं पाती। जब कोई व्यक्ति अलग सोचता है, अलग रास्ता चुनता है, या अपने दिल की सुनकर आगे बढ़ता है, तो लोग उसका मज़ाक उड़ाने लगते हैं। कुछ लोग कहते हैं, “यह व्यावहारिक नहीं है।”, कुछ कहते हैं, “इतना बड़ा सोचने का क्या फायदा?” और कुछ लोग सिर्फ इसलिए आलोचना करते हैं क्योंकि उनके भीतर खुद कोई आग बची ही नहीं होती। लेकिन याद रखिएगा, जिसके भीतर जुनून की आग होती है, वही उसके अर्थ को समझ सकता है। वही दुनिया को हमेशा के लिए बदल देने का सपना देखता है, बाकी लोग सिर्फ उसकी यात्रा, उसकी सफलता और अपने सपनों का हवा में उड़ता हुआ धुआँ देखते हैं।
दोस्तों, इसीलिए मैं बार-बार कहता हूँ कि जीवन में सबसे बड़ी चूक या गलती असफल होना नहीं है, बल्कि सबसे बड़ी गलती अपने भीतर की उस आग को ही बुझा देना या बुझने देना है, जो हमें जीवित महसूस कराती है। जो हमें रोज़ आगे बढ़ने का हौसला और ऊर्जा देती है। इसलिए दोस्तों, अपने सपनों को हल्के में मत लीजिए। अपने भीतर उठने वाली आवाज़ को दबाइए मत। उसे पहचानिए, उसे पोषित कीजिए, उसे मेहनत, धैर्य और विश्वास से मजबूत बनाइए क्योंकि वही आग एक दिन आपके साथ-साथ इस दुनिया को भी रोशन करेगी; उन्हें आगे का रास्ता दिखायेगी।
बस इस राह पर आगे बढ़ते वक्त इस गहरी बात को समझ कर हमेशा याद रखियेगा। अगर इस आग में सिर्फ अहंकार होगा, तो यह आपको याने आपके सपनों को जला देगी; ख़त्म कर देगी। लेकिन अगर आप अहंकार के स्थान पर करुणा और संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़ेंगे, तो यही आग दुनिया को रोशनी देगी; आपके जीवन को उद्देश्यपूर्ण बनाकर सफल बनायेगी।
याद रखियेगा दोस्तों, इस आधुनिक युग में आज दुनिया की सबसे बड़ी समस्या ज्ञान की कमी नहीं है, बल्कि संवेदना का कम होना है। सहमत ना हों तो जरा इस प्रश्न को ख़ुद से और दूसरों से पूछ कर देखियेगा, “क्या हम जितना प्रगति कर रहे हैं, उतना ही क्या हम इंसानियत में भी आगे बढ़ रहे हैं? दोस्तों, अगर हमारे भीतर दूसरों के लिए सम्मान नहीं है, अगर हमारे भीतर प्रकृति, पशु-पक्षियों और समाज के प्रति करुणा नहीं है, तो यकीन मानियेगा, हमारी सारी उपलब्धियाँ अधूरी हैं। सच्ची सफलता सिर्फ स्वयं के लिए जीने में नहीं, बल्कि दूसरों के जीवन को भी बेहतर बनाने में है।
दोस्तों, इस धरती पर हर जीव का अपना महत्व है और जब तक हम सभी के प्रति सम्मान और दया नहीं सीखेंगे, तब तक हमारा विकास सिर्फ बाहरी होगा, आंतरिक नहीं। इसलिए अपने भीतर की आग को सिर्फ महत्वाकांक्षा मत बनने दीजिए, उसे संवेदनशीलता से जोड़िए। वैसे भी दोस्तों, ऐसी सफलता का क्या लाभ जो हमें बड़ा तो बना दे, लेकिन भीतर से कठोर कर दे?
अंत में बस एक बार और दोहराना चाहूँगा, अपने भीतर की आग को प्रेम और करुणा से संतुलित रखते हुए बचाकर रखिए क्योंकि जुनून आपको आगे बढ़ाता है, और करुणा आपको इंसान बनाए रखती है और जब ये दोनों साथ आते हैं, तब व्यक्ति सिर्फ भौतिक दुनिया में सफल नहीं होता, बल्कि प्रेरणा बन जाता है।
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर




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