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जो आपको नहीं मिला उसे दूसरों को देने का साहस रखिए…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • 2 days ago
  • 3 min read

May 23, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, अक्सर इंसान अपने भीतर अनावश्यक नकारात्मक ऊर्जा लेकर चलता है। जैसे अगर कभी किसी ने उसके कार्य की सराहना नहीं की या उसकी मेहनत को सामान्य मानते हुए नजरअंदाज कर दिया या फिर किसी विशेष उपलब्धि को सेलिब्रेट नहीं किया या उसके लिए ताली नहीं बजी तो वह परेशान हो जाता है। कई बार वो चाहता है कि कभी तो कोई उससे कहे, “तुम अच्छा कर रहे हो।” लेकिन जब बहुत दिनों तक उसकी इस इच्छा को नजरअंदाज किया जाता है तो बीतते समय के साथ वो भीतर से इसे सामान्य मान लेता है और वह दूसरों की सराहना करना बंद कर देता है और मजे की बात तो यह है कि उसे इस बात का एहसास भी नहीं होता। इसी वजह से दोस्तों, जो व्यक्ति कभी अनदेखा किया गया था, वही आगे चलकर दूसरों को अनदेखा करने लगता है।


जी हाँ दोस्तों, हर इंसान अपने बीते हुए समय, अपने अनुभव और अपनी सीमाओं का परिणाम होता है। कई बार जो लोग हमें प्रोत्साहित नहीं करते, उन्हें भी जीवन में प्रोत्साहन नहीं मिला होता है। इसलिए ही तो कहा गया है, “जिस व्यक्ति को प्रेम नहीं मिला, वह प्रेम देना भी देर से सीखता है।” इसी तरह जिस व्यक्ति ने प्रशंसा नहीं सुनी, वह दूसरों की सराहना करना भी देर से सीखता है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि हम भी इन्हीं बातों को दोहराएँ। इसी बात को समझाते हुए महान विचारक रिक वारेन ने कहा, “हम अपने अतीत की उपज हो सकते हैं, लेकिन उसके कैदी बनने की आवश्यकता नहीं है।”


दोस्तों, ‘जो मिला, वही दिया’, वाला नजरिया रखने के स्थान पर, सजगता के साथ, अपने अतीत के नकारात्मक अनुभवों से बचते हुए जीवन में आगे बढ़ना ही आपको महान बनाता है। इसीलिए कहते हैं, “महान लोग अपने अतीत से घायल होकर जीवन नहीं जीते, वे अपने अतीत से सीखकर जीवन में आगे बढ़ते हैं।” यही बात महान लोगों को साधारण लोगों से अलग बनाती है।


दोस्तों, आपके साथ जो हुआ वह आपकी कहानी है, लेकिन आप दूसरों के साथ क्या करते हैं, वही आपका चरित्र है। अगर आपको कभी साथ नहीं मिला, तो किसी जरूरतमंद का हाथ थाम लीजिए। किसी ने आपके प्रयास नहीं देखे, तो आप किसी और की छोटी-सी कोशिश को पहचानिए। याने जिस बात की आपके जीवन में कमी रही है, वह दूसरों को देने का प्रयास कीजिए। याद रखियेगा, ‘ना मिलने के बाद भी देना’ आपको तो महान बनायेगा ही, साथ ही इस दुनिया को और भी बेहतर बनाएगा क्योंकि जिस व्यक्ति को सम्मान और सराहना मिलती है, वह अपेक्षा से कहीं अधिक योगदान देता है।


दोस्तों, एक टीम, एक परिवार, एक संस्था - इन सभी का विकास सिर्फ नियमों से नहीं होता। इनका विकास मान्यता से होता है। कई बार एक शिक्षक का “बहुत अच्छा”, एक पिता का “मुझे तुम पर गर्व है”, एक प्रबंधक का “तुमने अच्छा प्रयास किया”, किसी व्यक्ति के जीवन को पूरी दिशा बदल देता है। याद रखियेगा, लोग हमेशा वेतन के लिए काम नहीं करते, बहुत बार वे मूल्य और सम्मान के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ देते हैं।


एक बात और याद रखिएगा, दुनिया बदलने की शुरुआत हमेशा अपने भीतर से होती है। जैसा कि सुकरात ने कहा था, “जो दुनिया को बदलना चाहता है, उसे पहले स्वयं को बदलना होगा।” इसलिए अगली बार जब कोई आपके साथ काम करे, कोई बच्चा प्रयास करे; कोई सहयोगी छोटा कदम उठाए, तो उसकी आलोचना करने से पहले उसकी कोशिश देखिएगा क्योंकि सराहना अहंकार नहीं बढ़ाती, सराहना क्षमता जगाती है। याद रखियेगा, जिसकी कमी कभी ख़ुद के पास रही हो, उसे दूसरों को देना; उन्हें ऊपर उठाना, वास्तव में आपके क़द को बढ़ाता है; आपको महान बनाता है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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