जीना है खुलकर तो सच से भागना बंद करें!!!
- Nirmal Bhatnagar

- 1 day ago
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May 5, 2026
फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, पूर्णता के भाव से जीवन जीने की चाह में हर इंसान अपने जीवन में सब कुछ पाने की चाह रखता है। लेकिन अक्सर हर उस बात या चीज से दूर भागता है, जो उसे इन सब चीजों को पाने में मदद कर सकती है। इसमें भी सबसे मजेदार और महत्वपूर्ण बात यह है कि ‘सच’ जो हमें जीवन में सबसे आगे ले जा सकता है, हम सबसे ज्यादा उसी से दूर भागते हैं। आइए, एक छोटी सी कहानी से इसे समझते हैं…
एक छोटे शहर में एक समझदार, पढ़ा-लिखा और समाज में सम्मानित व्यक्ति रहता था। एक दिन उस शहर में एक तथाकथित “ज्ञानी” व्यक्ति आया और उसने बड़े आत्मविश्वास के साथ लोगों को समझाना शुरू किया, “साथियों, मैं तुम्हारे जीवन की हर समस्या का समाधान जानता हूँ।” बीतते समय के साथ धीमे-धीमे लोग उसकी बातों में आने लगे और उससे अपनी समस्यायें और व्यक्तिगत बातें साझा करने लगे। वह व्यक्ति भी इतनी प्रभावशाली बातें करता कि लोग बिना सोचे-समझे उस पर विश्वास कर लिया करते थे। अक्सर वह व्यक्ति लोगों को समाधान या सुझाव के रूप में उन्हें कुछ नियम बताता, कुछ डर दिखाता, और कहता, “अगर तुमने मेरी बात नहीं मानी, तो तुम्हारा नुकसान होगा।” शुरुआत में लोगों को थोड़ा संदेह हुआ, लेकिन जब उन्होंने देखा कि बाकी लोग उस व्यक्ति की बात मान रहे हैं, तो वे भी उसकी बात मानने लगे। एक दिन एक समझदार व्यक्ति उस तथाकथित ज्ञानी से मिला, शुरू में उसे उसकी बातों पर विश्वास नहीं हुआ लेकिन जब उसने देखा कि शहर के ज्यादातर लोग उस तथाकथित ज्ञानी की बात मानते हैं तो वह समझदार व्यक्ति भी उसी भीड़ का हिस्सा बन गया।
समय बीतता गया; लोग उस “ज्ञानी” पर पूरी तरह निर्भर हो गए। उनके निर्णय, उनकी सोच, सब कुछ उसी के अनुसार होने लगा। लेकिन धीरे-धीरे उन लोगों के साथ कुछ चीजें गलत होने लगीं। जैसे कुछ लोगों को नुकसान होने लगा, कुछ निर्णय उल्टे पड़ने लगे, लेकिन इसके बाद भी अब कोई उस तथाकथित ज्ञानी से सवाल नहीं पूछ रहा था। क्यों? क्योंकि अब सच स्वीकार करना कठिन था। अगर वे मान लेते कि वे गलत थे, तो उन्हें यह भी स्वीकार करना पड़ता कि वे इतने समय से भ्रम में जी रहे थे और यह स्वीकार करना, उन लोगों के लिए सबसे कठिन होता है।
एक दिन उस समझदार व्यक्ति के सामने स्पष्ट प्रमाण आया कि वह “ज्ञानी” व्यक्ति उसे धोखा दे रहा है। लेकिन उसने यह सोच कर आँखें बंद कर ली कि अगर मैंने यह मान लिया कि वह ‘ज्ञानी व्यक्ति’ गलत है, तो मेरा पूरा विश्वास टूट जाएगा।” विचार आते ही उस समझदार व्यक्ति ने अपनी पहली ग़लत धारणा के अनुसार ही चलते रहने का निर्णय ले लिया।
दोस्तों, ऐसा ही हमारे जीवन में भी होता है। कई बार हम किसी विचार, किसी व्यक्ति या किसी निर्णय से इतने जुड़ जाते हैं कि सच सामने होने के बावजूद उसे स्वीकार नहीं कर पाते क्योंकि सच हमें बदलने के लिए मजबूर करता है और बदलाव आसान नहीं होता। लेकिन याद रखिए, सच से भागने से वह बदलता नहीं है, बल्कि हमें और उलझा देता है। एक और गहरी बात कहना चाहूँगा, हम अक्सर उस चीज़ से बचने की कोशिश करते हैं जिससे हमें डर लगता है और डर से बचने की यही आदत अक्सर हमें वहाँ पहुँचा देती है, जिससे हम बचना चाहते हैं।
दोस्तों, जीवन में जागरूक रहना बहुत जरूरी है। इसलिए किसी भी बात को आँख बंद करके स्वीकार मत कीजिए। सवाल पूछिए, समझिए, और फिर निर्णय लीजिए। अगर आपको लगता है कि आप गलत थे, तो उसे स्वीकार करने का साहस रखिए क्योंकि गलती स्वीकार करना कमजोरी नहीं, बल्कि समझदारी की सबसे बड़ी निशानी है। वैसे भी सच कभी डराता नहीं, वह तो मुक्त करता है। इसलिए सच से भागिए मत, उसे अपनाइए क्योंकि जो सच को स्वीकार करता है, वही अपने जीवन की सही दिशा चुन पाता है।
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर




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