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दिल की सुनिए…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • 7 hours ago
  • 3 min read

May 6, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, जीवन में आप जितना आगे बढ़ेंगे, उतने ही ज़्यादा लोग आपके पीछे शोर मचाने लगेंगे। कोई तारीफ करेगा, तो कोई आलोचना या फिर कोई सलाह देगा, तो कोई आपको रोकने की कोशिश करेगा। ऐसे में मन में सवाल उठना लाजमी है कि “अब क्या किया जाए? तो मेरा जवाब है इस सवाल को साइड में रखकर ख़ुद से पूछा जाए कि “क्या मैं अपने दिल की सुनकर जीवन में आगे बढ़ रहा हूँ या लोगों की राय के अनुसार?” चलिए, कल घटी एक घटना से इसे समझते हैं…


मध्यप्रदेश के प्रतिष्ठित विद्यालय के शिक्षकों से चर्चा के दौरान जब मैंने प्रश्न किया कि “आने वाले पाँच वर्षों में आप ख़ुद को कहाँ देखते हैं?”, तो एक युवा शिक्षिका बोली, “कक्षा ग्यारहवीं और बारहवीं की शिक्षिका के रूप में।” मेरे लिए उसका यह जवाब थोड़ा चौंकाने वाला था क्योंकि मेरी नजर में वह कक्षा पांचवीं तक पढ़ाने वाली एक बहुत ही बेहतरीन शिक्षिका थी। जब मैंने उससे इस विषय में विस्तार से चर्चा करी तो मुझे पता चला कि उसके आसपास मौजूद लोगों की राय ने उसकी सोच को प्रभावित किया था। जैसे उसके बड़े भाई का सुझाव था, “आमदनी बढ़ानी है, तो बड़ी कक्षा के बच्चों को पढ़ाओ।”, इसी तरह उसके कुछ दोस्तों का कहना था, “छोटी कक्षा के शिक्षकों का कोई करियर नहीं होता।” एक ने तो उसे यहाँ तक कह दिया था कि “जीवन में कुछ स्थायी करो, ये क्या राह चलता काम पकड़ रखा है।” और एक का कहना था, “इतने छोटे बच्चों को पढ़ाने के लिए इतनी शिक्षा ली थी?” धीरे-धीरे इन सब सलाहों ने उसकी सोच को प्रभावित करना शुरू कर दिया था और अब वह समझ नहीं पा रही थी कि वह अपनी सुनें या दुनिया की।


जब इस विषय में हमारी चर्चा आगे बढ़ी तो वह मुझसे बोली, “सर, मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैं क्या करूँ? हर कोई अपनी समझ से कुछ ना कुछ कहता और सलाह देता है।” मैंने मुस्कुराते हुए उससे एक प्रश्न पूछा, “जंगल या किसी भी रास्ते से गुजरता मस्त हाथी अपने पीछे भौंकते कुत्तों की चिंता करता है?” उसने कहा, “बिल्कुल भी नहीं!” मैंने तुरंत अगला प्रश्न पूछा, “क्यों?” वह कुछ कहती उसके पहले ही मैंने बात आगे बढ़ाते हुए कहा, “क्योंकि हाथी यह जानता है कि वह कितना ताकतवर है और साथ ही उसका मार्ग, उसका लक्ष्य क्या है और उसे वहाँ पहुँचने के लिए किसी की स्वीकृति की जरूरत नहीं है।” एक क्षण रुकने के पश्चात मैंने बात आगे बढ़ाते हुए कहा,“याद रखो, जो लोग अपनी राह जानते हैं, वे दूसरों की आवाज़ों में नहीं उलझते।अगर जीवन में आगे बढ़ना है, तो अपने भीतर की आवाज़ को मजबूत करो और उसकी सुनो।”


दोस्तों, जीवन में अपनी पूरी क्षमता के साथ वही आगे बढ़ता है, जो अपने दिल की सुनता है और बिना शोर मचाए आगे बढ़ता है। याद रखिएगा, जो व्यक्ति हर समय लोगों की बातों को समझने और लोगों को समझाने में लगा रहता है, वह अपनी ऊर्जा खो देता है। लेकिन जो व्यक्ति अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहता है, वह धीरे-धीरे अपनी पहचान बना लेता है।


हमारे जीवन में कई ऐसे लोग होते हैं, जो बिना जाने ही हमें प्रेरित करते हैं। जैसे, मित्र, शिक्षक, परिवार का कोई सदस्य, रिश्तेदार या कई बार कोई अनजान व्यक्ति। कई बार तो वे यह भी नहीं जानते कि उन्होंने हमें क्या दिया, लेकिन उनके व्यवहार, उनके संघर्ष और उनके जीवन ने हमारे भीतर एक नई दिशा जगा दी होती है। इसलिए हमेशा अपने आसपास की अच्छाई को देखिए। जब हम अच्छे उदाहरणों को देखते हैं, तो हमें भी आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है और जब हम सकारात्मक नजरिया अपनाते हैं, तो हम हर असफलता से जल्दी उबर पाते हैं।


दोस्तों, जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहेंगे लेकिन अगर हमारा नजरिया सही है, तो हम हर परिस्थिति को एक अवसर में बदल सकते हैं। एक बात और याद रखियेगा अपने लक्ष्य पर ध्यान रखिए, न कि आसपास के शोर पर क्योंकि शेर अपनी राह पर चलता है, और इतिहास उसी के कदमों के निशान याद रखता है। इसलिए आज से तय कीजिए, आपको लोगों को समझाना नहीं है, आगे बढ़ना है और जब आप अपनी राह पर सच्चाई से चलते हैं, तो दुनिया खुद-ब-खुद आपकी कहानी सुनने लगती है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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