जीवन की अनमोल चीज़े देखी नहीं महसूस की जाती है !!!
- Nirmal Bhatnagar

- 13 minutes ago
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May 17, 2026
फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, आज के लेख की शुरुआत सोशल मीडिया पर पढ़ी कहानी से करते हैं-
घटना कई सौ साल पुरानी है, बहुत समय पहले की बात है, एक प्रसिद्ध चित्रकार था जो अपनी कला में इतना निपुण था कि उसके बनाए फूल देखकर तितलियाँ उन पर आ बैठती थी। लेकिन उसे एक अजीब शिकायत थी, उसे लगता था कि लोग उसकी कला की प्रशंसा तो करते हैं, पर उसकी आत्मा को नहीं समझते। एक दिन उसने घोषणा की कि वह अपनी सबसे सर्वश्रेष्ठ कृति बनाएगा, लेकिन वह इसे "शून्य" पर बनाएगा। उसने एक विशाल खाली फ्रेम दीवार पर टांग दिया और उसके सामने महीनों तक हाथ में खाली कूची याने ब्रश लेकर हवा में चित्र उकेरने का अभिनय करता रहा। नगर के लोग उसे देखने आते। कुछ कहते, "यह पागल हो गया है," तो कुछ अपनी विद्वत्ता दिखाने के लिए कहते, “वाह! क्या सूक्ष्म कलाकारी है!” राजा ने भी आकर देखा और अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए कहा, “अद्भुत! ऐसा रंग संयोजन मैंने आज तक नहीं देखा।” अंत में, चित्रकार ने कहा कि चित्र पूरा हो गया है। उसने एक अंधे व्यक्ति को बुलाया और पूछा, “क्या तुम इस चित्र को देख सकते हो?” भीड़ हंसी, “एक अंधा चित्र कैसे देखेगा?” लेकिन उस अंधे व्यक्ति ने फ्रेम के पास जाकर अपना हाथ हवा में लहराया और मुस्कुराते हुए बोला, “यह अब तक का सबसे सुंदर चित्र है, क्योंकि इसमें कलाकार ने रंगों का नहीं, बल्कि 'शांति' का प्रयोग किया है। बाकी सब लोग इसे आँखों से देखने की कोशिश कर रहे थे, इसलिए उन्हें कुछ नहीं दिखा। मैंने इसे हृदय की खामोशी से महसूस किया।” उसकी बात सुन चित्रकार मुस्कुराया और उसने उसी क्षण अपनी कूची त्याग दी।
दोस्तों, यह छोटी-सी कहानी हमें जीवन का बहुत बड़ा सत्य सिखाती है। दुनिया की सबसे मूल्यवान चीजें आँखों से नहीं देखी जा सकतीं। प्रेम दिखाई नहीं देता, महसूस होता है। सम्मान दिखाई नहीं देता, व्यवहार में झलकता है। शांति दिखाई नहीं देती, भीतर उतरती है। आज हम ऐसे दौर में जी रहे हैं जहाँ लोग सब कुछ “दिखाने” में लगे हुए हैं। खुशी भी दिखाई जाती है, सफलता भी दिखाई जाती है, रिश्ते भी दिखाए जाते हैं। लेकिन भीतर से मनुष्य पहले से ज्यादा खाली होता जा रहा है क्योंकि हमने महसूस करना कम कर दिया है। हम तस्वीरें ज्यादा लेते हैं, क्षण कम जीते हैं। हम शब्द ज्यादा बोलते हैं, मौन कम समझते हैं और शायद यही कारण है कि सुविधाएँ बढ़ने के बाद भी सुकून कम हो गया है।
इस संदर्भ में मुझे सदी के महान अभिनेता अमिताभ बच्चन का जीवन याद आता है। इतनी प्रसिद्धि, इतना सम्मान और इतनी उपलब्धियों के बाद भी उन्होंने अपने जीवन में कई कठिन दौर देखे। एक समय ऐसा भी आया जब उनकी कंपनी घाटे में चली गई, आर्थिक संकट आया और लोग यह मानने लगे कि उनका समय खत्म हो चुका है। लेकिन उस कठिन समय में उन्होंने एक बात नहीं छोड़ी, अपनी विनम्रता और अपने भीतर की शांति। उन्होंने फिर से शुरुआत की। धीरे-धीरे काम किया और आज भी करोड़ों लोग सिर्फ उनकी सफलता नहीं, उनकी गरिमा और संवेदनशीलता के कारण उन्हें सम्मान देते हैं।
दोस्तों, जीवन की असली सुंदरता बाहरी चमक में नहीं होती। कई लोग बहुत कुछ पा लेते हैं, लेकिन भीतर से शांत नहीं होते और कुछ लोग साधारण जीवन जीते हुए भी इतने संतुलित और शांत होते हैं कि उनके पास बैठकर ही सुकून महसूस होता है। याद रखिए, मनुष्य की असली पहचान उसके कपड़ों, शब्दों या उपलब्धियों से नहीं होती… उसकी पहचान उस शांति से होती है, जो उसके आसपास के लोगों को महसूस होती है। अगर आपके पास धन है लेकिन संतोष नहीं, तो भीतर खालीपन रहेगा। अगर आपके पास प्रसिद्धि है लेकिन प्रेम नहीं, तो जीवन अधूरा लगेगा। इसलिए जीवन में सिर्फ बाहरी सफलता के पीछे मत भागिए। अपने भीतर भी उतरिए। थोड़ा समय मौन में बिताइए। प्रकृति को महसूस कीजिए। अपनों के साथ बिना मोबाइल के बैठिए और स्वयं से पूछिए, “क्या मैं सच में शांति में हूँ?” अंत में बस एक बात, जीवन की सबसे अनमोल चीजें कभी दिखाई नहीं देतीं वे सिर्फ महसूस होती हैं और जिस दिन मनुष्य महसूस करना सीख जाता है, उस दिन वह सिर्फ सफल नहीं…वास्तव में जीवित हो जाता है।
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर




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