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टाइम नहीं है...

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • 1 day ago
  • 3 min read

May 16, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


यकीन मानियेगा इस आधुनिक युग में हममें से ज्यादातर लोग एक अजीब विरोधाभास में जी रहे हैं। आज सुविधाओं ने जीवन को आसान और तकनीक ने जीवन को गतिशील बना दिया है। लेकिन फिर भी इस युग में लगभग हर इंसान एक ही बात कह रहा है, “मेरे पास समय नहीं है।” सोच कर देखियेगा, जो यात्रा पहले बारह घंटे में पूरी होती थी, आज चार घंटे में हो जाती है। जो संदेश कभी हफ्तों में पहुँचते थे, आज वे सेकंडों में पहुँच जाते हैं। बैंक, टिकट, खरीदारी, मीटिंग आदि से संबंधित सभी कार्य अब मोबाइल पर हो रहे हैं। फिर भी मनुष्य पहले से ज्यादा व्यस्त, ज्यादा बेचैन और ज्यादा थका हुआ है। क्यों? क्योंकि समस्या समय की है ही नहीं। असल समस्या तो हमारी उस सोच में है, जिसकी वजह से हमने जीवन को जीने के बजाय सिर्फ़ “मैनेज” करना शुरू कर दिया है।


आज अधिकांश लोग तेज़ी से दौड़ तो रहे हैं, लेकिन उन्हें स्वयं ही नहीं पता कि वे जा कहाँ रहे हैं या पहुँच कहाँ रहे हैं। हम कई घंटों तक सोशल मीडिया पर ऐक्टिव रह सकते है, लेकिन माता-पिता के लिए समय निकालना मुश्किल लगता है। हम पूरी रात वेब सीरीज़ देख सकते हैं, लेकिन खुद के भीतर झाँकने के लिए समय नहीं है। दूसरे शब्दों में कहूँ तो हम जीवन से ‘कनेक्ट’ हुए बिना ही हमेशा ‘ऑनलाइन’ रहने का प्रयास करते हैं।


इसलिए ही मैं हमेशा लोगों को कहता हूँ, “मरने से ज़्यादा बड़ी त्रासदी जीवन जीना भूल जाना है।” सफलता, सम्मान, अचीवमेंट की पराकाष्ठा तक पहुँचने के बाद भी महान उद्योगपति रतन टाटा जी अक्सर कहते थे, “जीवन में रिश्ते और इंसानियत सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।” इसी सोच को समझाते हुए उन्होंने कहा था, “अगर आप तेज़ चलना चाहते हैं तो अकेले चलिए, लेकिन अगर दूर तक जाना चाहते हैं तो साथ चलिए।” सोचिए… एक ऐसा व्यक्ति जिसके पास दुनिया की हर सुविधा थी, वह भी रिश्तों और संवेदनाओं को सबसे ऊपर रखता था। दोस्तों, जीवन उपलब्धियों से नहीं, अनुभूतियों से याद रखा जाता है।


आज हम समय बचाने के लिए आधुनिक मशीनें बना रहे हैं, लेकिन उस बचे हुए समय का उपयोग कहाँ करना है, इस पर ध्यान नहीं है। याद रखें, इस बचे हुए समय को हमें जीवन को शांत बनाने में लगाना है। इसके लिए इंटरनेट पर एक स्क्रीन से दूसरी स्क्रीन पर भागने याने स्क्रॉलिंग के स्थान पर हमें बच्चे समय को ख़ुद के भीतर उतरने में और परिवार के साथ समय बिताने में लगाना होगा।


याद रखें, “मेरे पास समय नहीं है”, यह अक्सर सच नहीं होता। ऐसा तो हम अक्सर अपनी आदत की वजह से कहते हैं और दोस्तों, जीवन की सबसे खतरनाक आदत वही होती है जो हमें धीरे-धीरे जीवन से दूर कर दे। ऐसे में आपको एक दिन अचानक एहसास होगा की उम्र आगे निकल गई है; बच्चे बड़े हो गए हैं; माता-पिता बूढ़े हो चुके हैं और दोस्त कहीं पीछे छूट गए हैं। यह स्थिति अंत में एहसास करवाती है कि समय तो हमेशा था, बस हमने उसे सही जगह नहीं लगाया। इसलिए दोस्तों, आज एक छोटा-सा निर्णय लीजिए और अपने व्यस्त जीवन में से थोड़ा समय खुद के लिए और थोड़ा समय अपनों के लिए निकालना शुरू कीजिए। इतना ही नहीं आपको थोड़ा समय प्रकृति के लिए और थोड़ा समय मौन के लिए भी निकालना होगा क्योंकि जीवन सिर्फ़ दौड़ने के लिए नहीं बल्कि महसूस करने के लिए मिला है।


दोस्तों, जीवन में भागिये मत, धीरे चलिए और गहराई से इस जीवन को जीने का प्रयास करिए और उन लोगों के लिए समय निकालिए जो आपके जीवन को सच में अर्थ देते हैं क्योंकि एक दिन जब समय चला जाएगा, तब सबसे ज्यादा अफसोस उन्हीं क्षणों का होगा जिन्हें हम “बाद में” जीना चाहते थे।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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