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जीवन के अँधेरे में जो साथ दे, वही तारा है हमारा !!!

Writer: Nirmal Bhatnagar
Nirmal Bhatnagar
20 hours ago
3 min read

Sep 25, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, जब सब कुछ ठीक चल रहा होता है, सफलता हमारे साथ होती है और जीवन अपनी गति से आगे बढ़ रहा होता है, तब हमारे आसपास मौजूद कुछ रिश्ते हमें सामान्य लगने लगते हैं। लेकिन जब परिस्थितियाँ कठिन होती हैं, रास्ते धुंधले पड़ते हैं और मन भीतर से थकने लगता है, तब अचानक कुछ चेहरे बहुत स्पष्ट दिखाई देने लगते हैं। इसलिए मैं हमेशा कहता हूँ, जरूरत के समय ही लोगों की क़ीमत समझना, जीवन की सबसे बड़ी विडम्बनाओं में से एक है।


दोस्तों, जो लोग सच में हमारा भला चाहते हैं, वे हमारे जीवन के सितारों की तरह होते हैं। वे हमेशा हमारे साथ होते हैं, लेकिन अक्सर हमारा ध्यान उनपर तभी जाता है, जब हमारे जीवन में अँधेरा घिरता है। मेरी राय में ऐसे रिश्तों को पहचानना और संजोकर रखना, जीवन की बड़ी समझदारी है।


एक कोच और कंसल्टेंट के रूप में मैंने महसूस किया है कि कठिन समय केवल हमारी सहनशक्ति की परीक्षा नहीं लेता, वह हमारे रिश्तों की वास्तविकता भी हमारे सामने रख देता है। कुछ लोग सफलता के दौर में साथ दिखाई देते हैं, जबकि कुछ लोग हमारी असफलता के समय भी बिना किसी अपेक्षा के हमारे साथ खड़े रहते हैं। पहले प्रकार के लोग हमारे साथ सेलिब्रेट करते हैं; जबकि दूसरे प्रकार के लोग हमें रिबिल्ड करने में मदद करते हैं। इसलिए मैं दूसरे लोगों को जीवन की असली पूँजी मानता हूँ।


दोस्तों, जीवन में केवल अच्छे रिश्ते होना पर्याप्त नहीं है। रिश्तों को समझना और उन्हें सही ढंग से निभाना भी आना चाहिए। रिश्ते कुछ-कुछ डिक्शनरी की तरह होते हैं। जिस तरह डिक्शनरी में हजारों शब्द और उनके अर्थ मौजूद होने के बाद भी उनका अर्थ वही व्यक्ति समझ पाता है, जो उसे सही तरीके से खोलकर देखता है। ठीक उसी तरह रिश्तों में प्रेम, विश्वास, अपनापन और सहयोग मौजूद होने के बाद भी, दिखता तभी है जब आप उसे समझने, संवाद करने और उसकी भावनाओं को पढ़ने का प्रयास करते हैं। दोस्तों, इस दुनिया में कई रिश्ते प्रेम समाप्त होने की वजह से नहीं, बल्कि एक दूसरे को समझने का प्रयास बंद कर देने की वजह से कमजोर हो जाते हैं।


भागमभाग वाले इस युग में हम चाहते हैं कि सामने वाला हमारी भावनाएँ समझे, लेकिन उसकी भावनाओं को समझने के लिए हम समय नहीं निकालते। हम सम्मान चाहते हैं, लेकिन असहमति के क्षण में सम्मान देना भूल जाते हैं। हम चाहते हैं कि कोई हमारी बात सुने, लेकिन स्वयं सुनने का धैर्य खो देते हैं। मेरी नजर में रिश्तों में सबसे बड़ी भूल उन्हें टेकन फॉर ग्रांटेड लेना है। आज जो व्यक्ति हर दिन हमारे लिए उपलब्ध है, उसकी उपस्थिति हमें सामान्य लगती है। लेकिन ध्यान रखिए, हर स्थायी दिखाई देने वाली चीज़ हमेशा स्थायी नहीं होती।


इसलिए ऐसे लोगों को याने जिन्होंने आपकी जरूरत के समय आपको संभाला था, उनको केवल जरूरत के समय याद मत कीजिए। उनके साथ समय बिताइए। उनका आभार व्यक्त कीजिए। उनकी बात सुनिए। और कभी-कभी बिना किसी विशेष कारण के सिर्फ इतना कह दीजिए, “तुम मेरे जीवन में हो, यह मेरे लिए महत्वपूर्ण है।”


याद रखिएगा, जीवन की असली संपत्ति केवल वे लोग नहीं हैं जो हमारी सफलता देखकर तालियाँ बजाते हैं, बल्कि वे हैं जो जीवन के अँधेरे दौर याने चुनौती पूर्ण समय में हमारे भीतर रोशनी देखने का विश्वास बनाए रखते हैं। ऐसे रिश्ते संयोग से नहीं मिलते; इसलिए उन्हें समझना, सम्मान देना और जीवनभर सँभालना पड़ता है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर


 
 
 

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