जीवन हमेशा वही लौटाता है, जो आप उसे देते हैं…
- Nirmal Bhatnagar

- 1 day ago
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Apr 19, 2026
फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, जीवन को समझना कभी-कभी बहुत कठिन लगता है, लेकिन कई बार यह हमें बहुत सरल तरीके से अपनी सच्चाई समझा देता है, बस हमें उसे देखने की नजर चाहिए। चलिए एक घटना से इसे समझते हैं…
बात कई साल पुरानी है, पिता अपने बच्चे को गर्मी की छुट्टियों में शहर की भागदौड़ से दूर, पहाड़ी इलाके में घुमाने के लिए लेकर गए। पिता का उद्देश्य बच्चे को प्रकृति के साथ जोड़ने के साथ-साथ कुछ समय प्रकृति के बीच बिताना था। जिससे वे कुछ समय शांति और सुकून के साथ बिता सकें और जीवन को थोड़ा गहराई के साथ महसूस कर सकें।
एक दिन सुबह-सुबह वे दोनों एक छोटी पहाड़ी पर घूमने निकले। अभी वे कुछ ही दूर गए थे कि बच्चा पैर फिसलने की वजह से गिर गया और उसके पैर में हल्की चोट लग गई। दर्द की वजह से कराहते हुए उस बच्चे के मुँह से “आह” की आवाज़ निकली, जो पहाड़ से टकराने के बाद गूंजती हुई वापस सुनाई दी। गूँजती हुई “आह” की आवाज़ को सुन बच्चा चौंक गया। उसने चारों तरफ देखा और जोर से बोला, “कौन है?” कुछ ही क्षणों बाद फिर वही आवाज लौटी, “कौन है?”, जिसे सुन बच्चा थोड़ा घबरा गया और जोर से बोला, “तुम कौन हो?” फिर से वही जवाब वापस आया, “तुम कौन हो?” वह दौड़कर अपने पिता के पास आया और बोला, “पापा, वहाँ कोई है जो मेरी हर बात दोहरा रहा है!”
बच्चे की बात सुन पिता मुस्कुराए और उन्होंने बेटे का हाथ पकड़ा और उसी दिशा में देखकर जोर से कहा, “तुम बहुत कमजोर हो!” पहाड़ों से वही आवाज लौटी, “तुम बहुत कमजोर हो!” फिर पिता ने मुस्कुराकर और ज़ोर से कहा, “तुम बहुत बहादुर हो, तुम विजेता हो!” इस बार भी वही शब्द गूंज कर लौटे, “तुम बहुत बहादुर हो, तुम विजेता हो!”
पिता के कहे शब्दों को गूँजता देख बच्चे की आँखों में डर का स्थान जिज्ञासा ने ले लिया। जिसे देख पिता ने उसे प्यार से समझाते हुए कहा, “बेटा, यह पहाड़ नहीं बोल रहे… यह तुम्हारी अपनी आवाज है, जो तुम्हारे पास वापस आ रही है। इसे ही गूंज कहते हैं।” इतना कह पिता कुछ क्षणों के लिए रुके फिर अपनी बात आगे बढ़ाते हुए बोले, “जीवन भी ठीक ऐसा ही है। तुम जो सोचते हो, जो बोलते हो, जो दूसरों के साथ करते हो, वही किसी न किसी रूप में तुम्हारे पास वापस आता है।”
दोस्तों, उस बच्चे के पिता का दिया सूत्र था तो बड़ा साधारण, लेकिन अक्सर हम इसे भूल जाते हैं और सोचते हैं कि जीवन हमारे साथ ऐसा अनपेक्षित सा व्यवहार क्यों कर रहा है? जबकि हकीकत तो इतनी सी है कि जीवन हमारे व्यवहार का ही प्रतिबिंब है। अगर हम नकारात्मक सोचेंगे, तो हमें हर जगह समस्या नजर आएगी। अगर हम दूसरों के प्रति कठोर होंगे, तो हमें भी कठोरता ही वापस मिलेगी। इसके विपरीत अगर हम अपने विचारों में सकारात्मकता रखें, अपने शब्दों में मिठास रखें, और अपने व्यवहार में सम्मान रखें, तो जीवन भी हमें वही लौटाएगा - सम्मान, प्रेम और अवसर।
दोस्तों, इसलिए जीवन को बेहतर बनाने के लिए मेरी नजर में सबसे ज्यादा जरूरी कार्य है, अपने अंदर झाँकना और यह जानना कि हम क्या सोच रहे हैं?, हम क्या बोल रहे हैं?, हम दूसरों के साथ कैसा व्यवहार कर रहे हैं? क्योंकि यही सब मिलकर हमारा भविष्य बनाते हैं।
दोस्तों, जीवन कोई अलग कहानी नहीं लिखता… वह हमारी ही लिखी हुई पंक्तियों को हमें वापस पढ़ाता है। इसलिए आज से ध्यान रखिए, आप जो भी दुनिया में भेज रहे हैं, वही कई गुना होकर आपके पास लौटेगा। इसलिए सोच सकारात्मक रखें, शब्द मधुर रखें, और व्यवहार सच्चा रखें क्योंकि जीवन हमेशा वही लौटाता है, जो आप उसे देते हैं।
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर




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