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नमन कर विनम्र और मनन कर समझदार बनें...

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • Jul 19, 2025
  • 2 min read

July 19, 2025

फिर भी ज़िंदगी हसीन है...

दोस्तों, मन एक बड़ा चमत्कारी शब्द है, इसके आगे ‘न’ लग जाये, तो ये ‘नमन’ हो जाता है और पीछे ‘न’ लग जाये, तो ये ‘मनन’ हो जाता है और अगर जीवन में ‘नमन’ और ‘मनन’ कर लिया जाये, तो दोस्तों यह जीवन यकीनन सिर्फ़ सफल ही नहीं, सार्थक भी हो सकता है। जी हाँ, मन, नमन और मनन की शक्ति वाकई आपके जीवन को नई दिशा दे सकती है।


इस बात को गहराई से समझने के लिए सर्वप्रथम आपको इन तीनों शब्दों के बीच के गहरे संबंध को समझना होगा। चलिए सबसे पहले हम इन तीनों शब्दों को समझते हैं। “मन”, याने विचारों का समुद्र; “नमन”, याने विनम्रता या सम्मान और “मनन”, याने विचार या आत्म-चिंतन करना। दोस्तों, ‘मन’ अगर नियंत्रण में हो, तो जीवन में कुछ भी असंभव नहीं। पर यही ‘मन’ अगर बेकाबू हो जाए, तो जीवन की दिशा भटक जाती है। इसलिए सबसे ज़्यादा ज़रूरी है, मन को साधना…


अब आपके मन में सवाल आ रहा होगा, ‘कैसे?’ तो जवाब बड़ा सीधा सा है, नमन और मनन के रास्ते। जब हम विनम्रता के साथ दूसरों को आदर देते हैं, तब यह नमन हमको ‘अहंकार’ से दूर रखता है। यह हमें इंसानियत से जोड़ता है और जब हम किसी बात को गहराई से सोचते हैं, उस पर विचार करते हैं, आत्मचिंतन करते हैं, तब ‘मनन’ हमें आत्म-ज्ञान देने के साथ, सही निर्णय लेने की शक्ति भी देता है। चलिए, इसी बात को एक छोटे से उदाहरण से समझने का प्रयास करते हैं-


एक बार एक राजा ने अपने गुरु से पूछा, “गुरुदेव, मैं इतना कुछ हासिल कर चुका हूँ, पर मन की शांति नहीं है। क्या करूँ?” गुरु मुस्कराए और बोले, “राजन, दो काम करो, पहला, हर सुबह सूरज को नमन करो। यह तुम्हें प्रकृति के प्रति कृतज्ञ बनायेगा और दूसरा, हर रात, दिन-भर में किए कार्यों का मनन करो। इससे तुम आत्म-मूल्यांकन कर पाओगे।” राजा ने वैसा ही किया और कुछ ही दिनों में उसका चेहरा शांत, मन स्थिर और हृदय प्रसन्न रहने लगा।


दोस्तों, तेज़ी से भागती इस ज़िंदगी में, जहाँ हर कोई अपने लक्ष्यों को पाने; अपने कार्यों को पूरा करने के लिए दौड़ रहा है। उसके पास चिंतन, मनन आदि करने, धन्यवाद कहने के लिए समय ही नहीं है। दूसरे, शब्दों में कहूँ तो एक चीज़ या एक लक्ष्य पाने के प्रयास में हम जीवन की मूल चीजों से ही भटक गए है। दोस्तों, अगर जीवन को काटना नहीं जीना है तो अपने हर दिन की शुरुआत किसी चीज को नमन कर करें। अपने माता-पिता को, प्रकृति को, या उस जीवन को जो हमें मिला है और इसी तरह हर रात, दिन भर में किए गए कार्यों पर मनन करें, और सोचें कि आज हमने क्या अच्छा किया; क्या सुधारना है। बस एक बात याद रखियेगा, इस प्रक्रिया में खुद को दोष नहीं देना है, बस सोचना है।



दोस्तों, मन अगर बेकाबू हो जाए, तो जीवन अशांत होता है। नमन करना हमें विनम्र बनाता है और मनन करना समझदार। अगर इन दोनों के साथ मन को साध लिया जाए, तो जीवन निश्चित तौर पर सफल ही नहीं, सार्थक हो जाता है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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