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पत्ते तोड़ने वाले नहीं; छाँव देने वाले बनें…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • 2 hours ago
  • 3 min read

May 26, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, इस दुनिया में किसी को दुख देना या दुखी करना तो आसान है, लेकिन किसी के जीवन में छाँव बनना याने दुख की घड़ी में उसके साथ खड़े रहना साधना है। यह एक ऐसी सच्चाई है जिसे मैंने जीवन के गहरे अनुभवों से सीखा है। इसलिए ही मैं कहता हूँ किसी का दिल दुखाना उतना आसान है, जितना किसी पेड़ से एक पत्ता तोड़ लेना। आपको बस सामान्य स्थिति या बातचीत में एक कठोर शब्द, एक व्यंग्य कहना है या फिर उसकी उपेक्षा या तुलना करना है, इतने में साधारण व्यक्ति भीतर से टूट जाएगा। लेकिन किसी के चेहरे पर सच्ची मुस्कान लाना पेड़ लगाने जैसा है। इसमें समय लगता है, आपको उस रिश्ते को निरंतर देखभाल करते हुए, धैर्य और विश्वास के साथ सींचना पड़ता है।


दोस्तों, आज हम ऐसे समय में जी रहे हैं जहाँ लोग प्रतिक्रिया तो बहुत जल्दी देते हैं, लेकिन समझते बहुत देर से हैं। इसीलिए वे शब्दों को बस ‘एक शब्द’ मान कर चलते हैं और इसीलिए उनका प्रयोग बिना सोचे-समझे करते हैं। लेकिन सच्चाई इससे इतर है, कई बार एक शब्द या वाक्य किसी व्यक्ति के भीतर वर्षों तक गूंजता रहता है। चलिए एक कहानी से इसे समझते हैं-


गाँव में रहने वाले दो पड़ोसियों के बीच छोटी-सी बात पर विवाद हो गया। जिसके कारण पहले व्यक्ति ने दूसरे के बारे में ग़लत बातें पूरे गाँव में फैला दी। कुछ दिनों बाद उस व्यक्ति को अपनी गलती का एहसास हुआ। वह गाँव के एक बुज़ुर्ग के पास गया और बोला, “मैं अपनी गलती सुधारना चाहता हूँ। क्या करूँ?” बुज़ुर्ग ने उसे पेपर दिया और कहा, “जाओ इसे गाँव के बीच जाकर फाड़ दो।” उसने बुजुर्ग व्यक्ति की आज्ञा का पालन किया और गाँव के बीच जाकर पेपर को छोटे-छोटे टुकड़ों में फाड़ दिया। उसके ऐसा करते ही पेपर के टुकड़े हवा में उड़ गए।


इतना कर वह व्यक्ति जैसे ही बुज़ुर्ग के पास गया, वे बोले, “गलती से मैंने तुम्हें ग़लत पेपर दे दिया था। जल्दी से जाओ और उस पेपर का छोटे से छोटा टुकड़ा भी वापस लेकर आओ।” इतना सुनते ही वह बोला, “यह कैसे संभव है?” बुज़ुर्ग मुस्कुराए और बोले, “बेटा, ठीक इसी तरह बोले हुए शब्द भी वापस नहीं आते।”


दोस्तों, हम बोलने के बाद भूल जाते हैं, लेकिन हमारे शब्द उन्हें कैसा एहसास करवाते हैं वे उसे जीवनभर याद रखते हैं। किसी बच्चे को बार-बार कहना, “तुमसे नहीं होगा”, उसे कमजोर बना सकता है। किसी कर्मचारी की मेहनत को अनदेखा करना, उसकी ऊर्जा खत्म कर सकता है। किसी बुज़ुर्ग की बात को टाल देना, उन्हें भीतर से अकेला महसूस करवा सकता है। लेकिन दूसरी तरफ, एक सच्ची प्रशंसा, एक भरोसे का हाथ, शांति के साथ सुनना और एहसास करवाना कि, “मैं तुम्हारे साथ हूँ”, किसी व्यक्ति का जीवन बदल सकता है।


याद रखिएगा दोस्तों, दुनिया में सबसे दुर्लभ लोग वे नहीं हैं जो बहुत बुद्धिमान हैं, बल्कि वे हैं जिनके पास संवेदनशील हृदय है। यकीन मानियेगा किसी की पीड़ा समझ लेना, बिना कहे किसी की थकान पढ़ लेना, किसी की छोटी-सी कोशिश की तारीफ कर देना - ये छोटे काम नहीं हैं। कई बार लोग हमारी मदद नहीं, हमारा अपनापन चाहिए होता है। इसी तरह कई बार वे हमसे सलाह या समाधान नहीं बल्कि सिर्फ़ यह एहसास चाहते हैं कि कोई उन्हें सुन रहा है। दोस्तों, कई बार हम यह नहीं जानते कि हमारी एक मुस्कान, एक फोन कॉल, एक धन्यवाद या एक प्यार भरा शब्द किसी के जीवन के सबसे अंधेरे दिन में रोशनी ला सकता है।


याद रखिएगा, पेड़ लगाने वाले जल्दी नहीं करते। वे बीज बोते हैं, पानी देते हैं, धूप सहते हैं, इंतजार करते हैं और फिर एक दिन वही पेड़ न सिर्फ उन्हें बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी छाँव देता है। इसी तरह अच्छे शब्द, दयालु व्यवहार और संवेदनशील रिश्ते धीरे-धीरे जीवन बदलते हैं। इसलिए आज एक संकल्प लीजिए, बोलने से पहले सोचेंगे। आलोचना से पहले समझेंगे और जहाँ संभव होगा, किसी के जीवन में एक पेड़ बनेंगे, पत्ता तोड़ने वाले नहीं। दोस्तों, दुनिया को आपकी प्रतिभा से पहले आपकी संवेदनशीलता याद रहती है क्योंकि पत्ते तोड़ने वाले को नहीं; छाँव देने वाले को हमेशा याद रखा जाता है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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