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पवित्र इरादे की शक्ति…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • 13 hours ago
  • 2 min read

July 12, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, जीवन में सफलता केवल प्रतिभा, धन या शक्ति से नहीं मिलती। कई बार हमने देखा है कि साधारण संसाधनों वाला व्यक्ति भी असाधारण उपलब्धियाँ हासिल कर लेता है, जबकि अपार साधनों वाला व्यक्ति भीतर से खाली रह जाता है। इसका सबसे बड़ा कारण है—इरादा।


किसी भी कार्य का वास्तविक मूल्य उसके परिणाम से पहले उसके उद्देश्य में छिपा होता है। यदि हमारा इरादा केवल स्वयं का लाभ हो, तो सफलता मिल भी जाए, तो संतोष नहीं मिलता। लेकिन यदि हमारा उद्देश्य स्वयं के साथ-साथ दूसरों का जीवन बेहतर बनाना हो, तो प्रकृति भी हमारे लिए नए रास्ते खोलने लगती है। इसी कारण कहा जाता है, “जब आपका इरादा पवित्र होता है, तो पूरी सृष्टि आपके सहयोग में लग जाती है।”


दोस्तों, पवित्र इरादा केवल शब्दों से नहीं, बल्कि विचारों, व्यवहार और कर्मों से बनता है। जब हम किसी की मदद बिना स्वार्थ के करते हैं, किसी को क्षमा करते हैं, किसी के दर्द को अपना समझते हैं या किसी के चेहरे पर मुस्कान लाने का प्रयास करते हैं, तब हम केवल अच्छा कार्य नहीं कर रहे होते, बल्कि अपने व्यक्तित्व को भी ऊँचा उठा रहे होते हैं। इसी तरह अगर हम अपने हर नए दिन की शुरुआत सही भावना से करें, तो हमारे निर्णय, हमारे संबंध और हमारा व्यवहार अपने आप ही बदलने लगता है। इसलिए मेरा सुझाव है दोस्तों कि प्रतिदिन की जाने वाली प्रार्थना को केवल कुछ माँगने का माध्यम मत बनाइये, बल्कि इसे स्वयं को बेहतर बनाने का संकल्प बना लीजिए। उदाहरण के लिए आप प्रतिदिन ऐसी प्रार्थना कर सकते हैं —


“हे प्रभु! मुझे ऐसा धन देना, जिससे मैं केवल अपना नहीं, बल्कि दूसरों का भी दुःख-दर्द दूर कर सकूँ। मुझे इतनी शक्ति देना कि यदि कोई मेरे साथ बुरा भी करे, तब भी मैं उसके प्रति भलाई का मार्ग न छोड़ूँ। मेरे हृदय में इतनी करुणा भर देना कि मैं अपने विरोधियों को भी घृणा से नहीं, प्रेम से जीतने का प्रयास करूँ। मुझे क्षमा का ऐसा गुण देना कि आलोचना करने वालों के प्रति भी मेरे मन में कटुता न आए। मेरे किसी भी विचार, वचन या कर्म से किसी के मन को पीड़ा न पहुँचे। मुझे ऐसा विवेक देना कि मैं जहाँ भी रहूँ, वहाँ शांति, सहयोग और सद्भाव का वातावरण बना सकूँ। मुझे किसी का सहारा बनने योग्य बनाना, लेकिन स्वयं ऐसा आत्मबल देना कि मुझे तेरे सिवा किसी और सहारे की आवश्यकता न पड़े। मेरे जीवन को सेवा का माध्यम बना देना। मेरे हाथों से भलाई हो, मेरे शब्दों से आशा मिले और मेरे व्यवहार से लोगों के जीवन में विश्वास जागे। मुझे ऐसा व्यक्तित्व देना कि मैं खुशियाँ बाँट सकूँ, लोगों की दुआएँ कमा सकूँ और इस संसार को थोड़ा-सा बेहतर बनाकर जाऊँ।”


दोस्तों, यदि हमारे हर दिन की शुरुआत ऐसी भावना से होगी, तो निश्चित तौर पर समय के साथ हमारा जीवन धीरे-धीरे बदलने लगेगा क्योंकि बदलती हुई परिस्थितियों से पहले हमारा मन बदलता है और बदलते हुए मन से हमारी दुनिया बदलती है। इसीलिए तो कहते हैं, “जब आपका इरादा शुद्ध होता है, तो ईश्वर केवल आपकी प्रार्थना नहीं सुनता, बल्कि आपको स्वयं किसी की प्रार्थना का उत्तर बना देता है।”


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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