प्रतिष्ठा उपलब्धियों से और सम्मान योगदान से मिलता है…
- Nirmal Bhatnagar

- Aug 5
- 3 min read
Aug 5, 2026
फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, कुछ दिन पहले एक समारोह में मेरी मुलाक़ात एक बुजुर्ग शिक्षक से हुई, जिन्होंने ना तो कभी किसी बड़े पद पर कार्य किया और ना ही कभी अपार संपत्ति इकट्ठा की। उस दिन जैसे ही उन्होंने सभागार में प्रवेश किया वैसे ही कई लोग अपनी सीटों से उठकर उनके पास पहुँचे। उनमें से कोई उनके चरण छू रहा था, कोई उनके हालचाल जानने के लिए उत्सुक था, तो कोई अपनी सफलता का श्रेय उन्हें दे रहा था। कुछ देर तक यह नजारा देखने के बाद मेरे मन में एक विचार आया, इस दुनिया में दो तरह की कमाई होती है। पहली, जो बैंक खाते में जमा होती है, दूसरी वह, जो लोगों के दिलों में जमा होती है। पहली कमाई, आपकी जीवनशैली बदलती है, लेकिन दूसरी आपकी पहचान बना देती है। पहली कमाई आपके जाने के बाद उत्तराधिकारियों में बँट जाती है, जबकि दूसरी पीढ़ियों तक प्रेरणा बनकर जीवित रहती है; आपको अमर कर देती है।
दोस्तों, जीवन में किसी काम को उत्कृष्ट ढंग से करना हमें संतोष देता है। जब हम किसी कार्य में निपुण होते हैं, तो भीतर एक अद्भुत आनंद का अनुभव होता है। उत्कृष्टता हमें आत्मविश्वास देती है और हमारी पहचान बनाती है। लेकिन केवल उत्कृष्ट होना पर्याप्त नहीं है। यदि हमारी योग्यता केवल हमारे लाभ तक सीमित रह जाए, तो वह सफलता तो बन सकती है, सम्मान नहीं। सम्मान तब जन्म लेता है जब हमारी योग्यता किसी और के जीवन को भी बेहतर बनाती है।
दोस्तों, एक शिक्षक केवल विषय के ज्ञान के कारण सम्मानित नहीं होता, उसे तो सम्मान अपने पढ़ाये हुए विद्यार्थियों के जीवन में आगे बढ़ने के कारण मिलता है। एक डॉक्टर सिर्फ़ सफल ऑपरेशन के कारण महान नहीं बनता, इसके लिए उसे ऑपरेशन करने के कौशल के साथ, अपने व्यवहार से मरीज के मन में विश्वास पैदा करना होता है। इसी तरह एक उद्योगपति केवल धन कमाने से बड़ा नहीं होता, बल्कि उसका बड़प्पन लोगों को दिए गए रोजगार, अवसर और सम्मान से तय होता है। याद रखिएगा, प्रतिष्ठा आपकी उपलब्धियों से बनती है, लेकिन सम्मान आपके योगदान से।
दोस्तों, इसी तरह साहस भी जीवन का एक और अद्भुत नियम है। इसीलिए कहते हैं, “प्रकृति भी साहसी लोगों का साथ देती है।” जब कोई व्यक्ति सकारात्मक संकल्प लेकर पूरी निष्ठा से आगे बढ़ता है, तो शुरुआत में रास्ते कठिन अवश्य लगते हैं, लेकिन धीरे-धीरे परिस्थितियाँ भी उसका सहयोग करने लगती हैं। मैंने अपने जीवन में अनेक ऐसे लोगों को देखा है जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद केवल अपने साहस और संकल्प के बल पर असंभव लगने वाले कार्य कर दिखाए। उन लोगों के पास हर प्रश्न का उत्तर पहले से नहीं था। लेकिन उनके पास पहला कदम उठाने का साहस था और यही साहस आगे चलकर नए अवसरों का कारण बन गया। अक्सर हम इसलिए रुक जाते हैं क्योंकि हमें पूरा रास्ता दिखाई नहीं देता। जबकि प्रकृति का नियम है कि रास्ता चलने वालों के लिए बनता है, खड़े रहने वालों के लिए नहीं।
दोस्तों, यदि आप इस जहाँ से सम्मान पाना चाहते हैं, तो स्वयं से प्रतिदिन यह तीन प्रश्न पूछें। पहला, क्या मेरे कारण किसी का जीवन थोड़ा आसान हुआ? दूसरा, क्या मेरी उपस्थिति से किसी को प्रेरणा मिली? और तीसरा, क्या मेरी सफलता केवल मेरी रही, या उसमें समाज का भी हिस्सा था? यदि इन प्रश्नों के उत्तर आपको “हाँ” में मिल रहे हैं, तो विश्वास रखिए, सम्मान आपके पीछे-पीछे चलेगा और यदि आप किसी बड़े लक्ष्य के लिए साहसपूर्वक पहला कदम उठाने वाले हैं, तो डरिए मत क्योंकि जब आपका संकल्प स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज के हित से जुड़ जाता है, तब परिस्थितियाँ भी आपके पक्ष में बदलने लगती हैं।
अंत में केवल एक बात याद रखिएगा, उत्कृष्टता आपको सफल बनाती है, योगदान आपको सम्मान दिलाता है और साहस आपको वहाँ पहुँचा देता है, जहाँ पहुँचने का साहस अधिकांश लोग केवल सपनों में करते हैं। इसलिए आज से केवल सफल बनने का नहीं, सम्माननीय बनने का संकल्प लीजिए क्योंकि सफलता जीवन बदलती है, लेकिन सम्मान जीवन के बाद भी आपकी पहचान को जीवित रखता है।
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर




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