top of page
Search

प्रतीक्षा, परीक्षा और समीक्षा के मार्ग से बनायें जीवन श्रेष्ठ…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • May 14, 2025
  • 3 min read

May 14, 2025

फिर भी ज़िंदगी हसीन है...

दोस्तों, अपने जीवन को महान बनाने की चाह होना एकदम सामान्य है। अर्थात् मेहनत करके, फल याने अपने लक्ष्यों को पाने की इच्छा होना स्वभाविक है। लेकिन चाहना या इच्छा होना आपको सफल और श्रेष्ठ नहीं बनाता है। इसके लिए तो आपको तीन चरणों को ध्यान में रख जीवन जीना होगा क्योंकि जब आप इन तीन चरणों को पड़ाव मान जीवन में आगे बढ़ते हैं, तब आप अपने जीवन को जीवन को श्रेष्ठ, सार्थक और आत्मिक रूप से समृद्ध बनाते हैं।


पहला चरण - प्रतीक्षा

प्रतीक्षा याने धैर्य का मार्ग। जिस तरह बीज बोते ही आपको तत्काल फसल नहीं मिलती ठीक वैसे ही जीवन में कर्म करते ही तुरंत फल नहीं मिलता। अगर आप श्रेष्ठ जीवन जीना चाहते हैं तो आपको ईश्वर की कृपा पर विश्वास रखते हुए, धैर्य के साथ लगातार अच्छे कर्म करते रहना होगा। जिस तरह माँ-बाप हर हाल में अपने बच्चों का अच्छा करते हैं, ठीक वैसे ही ईश्वर भी हमेशा सबका कल्याण करते हैं। बस कई बार हमारी अपेक्षा और उनके देने के समय का अंतर मन में दुविधा उत्पन्न करता है। ऐसे समय में धैर्य के साथ मन में श्रद्धा और और कर्म में ईमानदारी रखते हुए जीवन में आगे बढ़ जाना है।


दूसरा चरण - परीक्षा

परीक्षा याने जीवन अनुभव। असल में यह संसार एक परीक्षा स्थल है, जहाँ ईश्वर हमें रोज किसी ना किसी तरह परखता है। हकीकत में यह परीक्षा हमें नए अनुभवों के द्वारा कुछ सिखाने के लिए ईश्वर द्वारा ली जाती है। दूसरे शब्दों में कहूँ तो जीवन हमें निरंतर परखता है; कभी सुख देकर तो कभी दुख देकर या फिर कभी भ्रमित करके और इस तरह यह हमें हर दिन नया अनुभव देता है। इन अनुभवों के ज़रिए हम इस संसार को बेहतर तरीके से समझ पाते हैं।


इस आधार पर कहा जाए तो सच्चा ज्ञानी वही है जो संसार को समझने की कोशिश करता है, उसकी अस्थिरता को जानता है और उसमें आसक्ति नहीं करता। जैसे ही हम जान जाते हैं कि यह सब नश्वर है, हम भीतर से मुक्त होने लगते हैं। इसलिए समय-समय पर स्वयं की भी परीक्षा लेते रहना भी जरूरी है। आत्मनिरीक्षण का यह तरीका हमें अपने उद्देश्य से भटकने से बचाता है और सही मार्ग पर बनाए रखता है।


तीसरा चरण - समीक्षा

समीक्षा याने आत्मचिंतन का बल, इसलिए मैं इसे सबसे गहरा चरण मानता हूँ। इसका अर्थ है कि हम अपने जीवन, विचारों और कर्मों की समय-समय पर समीक्षा करें। ऐसा करना हमको ख़ुद को गहराई से जानने का मौका देता है। बड़े-बड़े महापुरुष और ज्ञानी लोगों द्वारा यही तरीका अपनाया गया है क्योंकि हमारी भौतिक और आध्यात्मिक उन्नति तब ही संभव होती है, जब हम आत्मचिंतन करते हैं। ऐसा करना हमें अपने भीतर झांकने, ख़ुद को समझने और ख़ुद में निरंतर सुधार करने का मौका देता है। इसके विपरीत, जो लोग केवल दूसरों के दोष देखते हैं, उनकी आलोचना करते हैं, वे स्वयं के विकास से चूक जाते हैं। इसलिए आवश्यक है कि हम अपनी ऊर्जा दूसरों में कमियाँ खोजने में नहीं, बल्कि अपने जीवन को बेहतर बनाने में लगाएँ।


अंत में निष्कर्ष के तौर पर इतना ही कहना चाहूँगा कि अगर आप जीवन को श्रेष्ठ बनाना चाहते है, तो इन तीन सूत्रों को अपनाइए। याने प्रतीक्षा करें, परीक्षा को स्वीकारें और निरंतर ख़ुद की समीक्षा करते रहें। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान धैर्य रखें, ईश्वर पर विश्वास रखें, अपने जीवन की जिम्मेदारी लें और हर दिन को आत्म-विकास का अवसर मानें। यही वह मार्ग है, जो हमें केवल सफलता ही नहीं, बल्कि आंतरिक शांति, संतोष और सच्चे सुख की प्राप्ति की ओर भी ले जाता है। तो आइए दोस्तों, आज से ही अपने जीवन में इन तीन सूत्रों को उतारते हैं और अपने जीवन को धीरे-धीरे श्रेष्ठता की ओर ले जाते है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

Comments


bottom of page