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बच्चों के सपनों में भरोसा बोएँ…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • May 10
  • 3 min read

May 10, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, यकीन मानियेगा अच्छे लेखों, कहानियों आदि को पढ़ना आपको नई सोच विकसित करने का मौका देता है। फिर भले ही यह लेख आपने व्हाट्सएप या सोशल मीडिया आदि पर ही क्यों ना पढ़ा हो। इस बात का एहसास मुझे कल व्हाट्सएप पर एक कहानी पढ़ते हुए हुआ। अपनी इस बात को समझाने के लिए पहले मैं आपसे वही कहानी साझा करता हूँ, फिर उससे मिली सीख पर चर्चा करता हूँ-


कई वर्ष पहले एक मंदिर के बाहर रोज़ सुबह एक बुज़ुर्ग व्यक्ति एक छोटे से कपड़े पर पेन, पेंसिल, इरेज़र, शार्पनर आदि लेकर बैठा करते थे। देखने में वह आजीविका चलाने के लिए सड़क किनारे लगाई गई एक साधारण दुकान लगती थी, लेकिन वास्तव में वह सिर्फ़ दुकान नहीं थी। असल में वह तो बच्चों को उम्मीद बाँटने की एक प्यारी सी जगह थी। परीक्षा या विद्यालय जाते समय जब भी कोई बच्चा पेन-पेंसिल आदि घर भूल जाने के कारण घबराया हुआ उनके पास आता और कहता, “दादाजी, आज मैं अपना पेन घर भूल आया हूँ… आज मेरी परीक्षा है और मेरे पास पैसे भी नहीं हैं।” तो वे मुस्कुराकर कहते, “अरे बेटा चिंता मत करो और यह लकी पेन लो। अभी जाओ और अच्छे नंबर लेकर आना। पैसे बाद में दे देना।”


अधिकांश बच्चे वापस कभी नहीं आते थे। लेकिन वह बुज़ुर्ग फिर भी हर दिन उसी विश्वास के साथ पेन बाँटते रहते। घर में उनकी पत्नी इससे परेशान होकर कई बार उनसे कहती, “तुम्हें समझ क्यों नहीं आता? ये बच्चे कभी वापस नहीं आएँगे। तुम ऐसे ही मुफ्त में सब बाँटते रहोगे तो घर कैसे चलेगा?” इसपर मुस्कुराते हुए वे हमेशा एक ही बात कहते, “मैं पेन नहीं बाँट रहा… मैं बच्चों के सपनों में भरोसा बो रहा हूँ।”


दोस्तों, जीवन में कुछ लोग हिसाब-किताब के साथ जीते हैं, जबकि कुछ लोग सिर्फ विश्वास के साथ। हिसाब रखने वाले लोग अक्सर लाभ-हानि में उलझ जाते हैं, लेकिन विश्वास रखने वाले लोग इंसानों में निवेश करते हैं। खेर इस बात को यहीं छोड़िये और उस बुजुर्ग व्यक्ति की कहानी में वापस चलिए।


इसी तरह बच्चों को पेन देते-देते वर्षों बीत गए और वह बुज़ुर्ग काफ़ी बूढ़े हो गए। अब उनकी आँखें कमजोर हो गई, लेकिन उनका विश्वास अभी भी वैसा ही पक्का था याने वह अभी भी नहीं टूटा था। एक दिन एक बड़ी गाड़ी मंदिर के सामने आकर रुकी और उसमें से एक सफल युवा व्यवसायी उतरा और मंदिर जाने के स्थान पर इन बुजुर्ग के पैरों में झुक गया और उन्हें प्रणाम करता हुआ बोला, “दादाजी, आपने मुझे शायद पहचाना नहीं… लेकिन मेरी ज़िंदगी की शुरुआत आपके दिए हुए एक पेन से हुई थी।” एक क्षण की चुप्पी के बाद उस युवक ने बताया कि कभी वह एक गरीब छात्र था और परीक्षा वाले दिन उसके पास पेन नहीं था। लेकिन आपने उस दिन मेरे सिर पर हाथ फेरते हुए पेन दिया। लेकिन मेरे लिए वह सिर्फ़ पेन नहीं था, मेरे लिए वह खोया हुआ आत्मविश्वास था। आज वही ग़रीब बच्चा आपके दिए आत्मविश्वास और आशीर्वाद के कारण एक सफल उद्योगपति बन चुका है। उस दिन पहली बार उस बुज़ुर्ग की पत्नी की आँखों में आँसू थे। उन्हें एहसास हुआ कि कुछ निवेश पैसे से नहीं, विश्वास से लौटते हैं।


दोस्तों, आज के दौर में लोग कहते हैं, “दुनिया बहुत स्वार्थी हो गई है।” लेकिन सच यह है कि दुनिया आज भी अच्छाई से चल रही है। हो सकता है एक छोटी मदद, उत्साह बढ़ाने वाला एक शब्द, भरोसा जैसी चीजें आपके लिए मामूली हो, लेकिन यकीन मानियेगा यह चीजें किसी के जीवन की दिशा और दशा बदल सकती है। याद रखिएगा, हर बड़ा इंसान कभी न कभी किसी छोटे सहारे से आगे बढ़ा होता है। इसलिए जीवन में सिर्फ़ कमाने की कोशिश मत कीजिए, कमाने के साथ कुछ ऐसा भी कीजिए जो किसी के मन में उम्मीद जगा सके क्योंकि आप जो देते हैं, वह सिर्फ़ वस्तु नहीं होती, वह विश्वास होता है और विश्वास जब लौटकर आता है, तो वह सिर्फ़ धन्यवाद नहीं लाता, बल्कि वह जीवन को अर्थ दे जाता है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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