सपनों का जीवन जीना है तो स्वीकारें ख़ुद को !!!
- Nirmal Bhatnagar

- 2 hours ago
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May 31, 2026
फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, पिछले कुछ दिनों में मुझे अनेक विद्यार्थियों के साथ करियर काउंसलिंग सत्र करने का अवसर मिला। सैकड़ों बच्चों से बातचीत के दौरान एक बात बार-बार सामने आई, जिसने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया। सभी बच्चों की मुख्य समस्या प्रतिभा की कमी नहीं थी और ना ही उनके समक्ष समस्या अवसरों की कमी की थी। मुख्य समस्या तो इस बात की थी कि वे अत्यधिक जानकारी के बोझ तले दबे हुए थे। आज का बच्चा निश्चित तौर पर पहले से कहीं अधिक जानता है और शायद इसीलिए पहले से कहीं अधिक भ्रमित भी है। आज उन बच्चों के पास जानकारी इकट्ठा करने के कई विकल्प हैं और साथ ही उन्हें कोई कहता है साइंस लो, तभी भविष्य सुरक्षित है तो कोई कहता है कॉमर्स में अवसर ज्यादा हैं या फिर कोई कहता है आर्ट्स में स्कोप नहीं है, तो कोई एआई की बात कर रहा है, या फिर कोई अनिश्चितताओं से डरा रहा है। इसके अतिरिक्त माता-पिता की अपेक्षा, शिक्षकों की सलाह और दोस्तों की राय अलग है। और हाँ सोशल मीडिया अलग कहानी सुना रहा है और इन सबके बीच खड़ा बच्चा सोच रहा है, “आखिर मैं करूँ तो क्या?”
धीरे-धीरे यह भ्रम उसके आत्मविश्वास को खा जाता है। फिर वह ख़ुद निर्णय लेने से ज्यादा लोगों की राय लेने या उनके निर्णय को स्वीकारने में व्यस्त हो जाता है। उसे लगता है कि अगर सब उसकी पसंद को स्वीकार कर लें, तभी उसका निर्णय सही होगा। लेकिन दोस्तों, जीवन का सबसे बड़ा सत्य यह है कि दुनिया कभी पूरी तरह आपकी पसंद से सहमत नहीं होगी। यदि आप हर निर्णय पर दूसरों की स्वीकृति खोजते रहेंगे, तो आप अपना जीवन नहीं, दूसरों की अपेक्षाएँ जीने लगेंगे।
मैं आज हर विद्यार्थी से एक बात कहना चाहता हूँ। जिस दिन पढ़ाई तुम्हारे लिए केवल अंक लाने का साधन नहीं, बल्कि सीखने का आनंद बन जाएगी, उसी दिन तुलना समाप्त हो जाएगी। जिस दिन तुम्हारा काम तुम्हें खुशी देने लगेगा, उस दिन तुम्हें तालियों की आवश्यकता नहीं रहेगी और जिस दिन तुम स्वयं को स्वीकार कर लोगे, उस दिन दुनिया की स्वीकृति की भूख भी समाप्त हो जाएगी। याद रखो, आत्मविश्वास तब पैदा नहीं होता जब पूरी दुनिया तुम पर विश्वास करती है। आत्मविश्वास तब पैदा होता है जब तुम स्वयं पर विश्वास करना शुरू करते हो। आज बहुत सारे बच्चे अपनी तुलना दूसरों से कर रहे हैं। किसी को अपने अंक कम लगते हैं। किसी को अपना व्यक्तित्व कमजोर लगता है। किसी को अपनी अंग्रेज़ी खराब लगती है। किसी को लगता है कि वह दूसरों जितना प्रतिभाशाली नहीं है। लेकिन सच यह है कि हर बच्चा अपने आप में अद्वितीय है। ईश्वर ने किसी को भी दूसरे की कॉपी बनाकर नहीं भेजा। तुम्हारी यात्रा अलग है। तुम्हारी क्षमता अलग है। तुम्हारा उद्देश्य अलग है। इसलिए स्वयं को दूसरों की कसौटी पर मत मापो और सुबह उठकर अपने दिन की शुरुआत कुछ सरल लेकिन शक्तिशाली वाक्यों याने पॉजिटिव अफ़र्मेशंस से करो और काँच के सामने खड़े होकर कहो, मैं खुश हूँ; मैं पर्याप्त हूँ; मैं योग्य हूँ; मैं स्वयं को चुनता हूँ; मैं स्वयं से प्रेम करता हूँ और अंत में ईश्वर को धन्यवाद देते हुए कहो, “हे ईश्वर, पर्याप्त मात्रा में सब कुछ देने के लिए आपका धन्यवाद।” शायद शुरुआत में आपको ये शब्द सामान्य लगें। लेकिन यकीन मानियेगा धीरे-धीरे यही शब्द आपके भीतर एक नया विश्वास पैदा करेंगे और जब विश्वास भीतर पैदा होता है, तब आत्मविश्वास बाहर दिखाई देता है।
बच्चों, जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि किसी प्रसिद्ध कॉलेज में प्रवेश पाना नहीं है। सबसे बड़ी उपलब्धि है स्वयं को पहचानना क्योंकि जिस व्यक्ति ने स्वयं को पहचान लिया, उसे दुनिया की मंज़ूरी की आवश्यकता नहीं रहती। वह अपनी राह स्वयं बना लेता है और वही लोग आगे चलकर दुनिया के लिए प्रेरणा बनते हैं। इसलिए, दुनिया तुम्हें चुने, इसका इंतजार मत करो। पहले स्वयं को चुनो। यकीन मानो, जिस दिन तुम स्वयं को स्वीकार कर लोगे, उसी दिन तुम्हारी असली उड़ान शुरू होगी।
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर




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