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भीतर का विश्वास जगाएँ, मनचाहा जीवन पाएँ !!!

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • 3 days ago
  • 2 min read

May 11, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, जीवन में “असफल” होना उतनी बड़ी विफलता नहीं है, जितना प्रतिभा होने के बाद भी सिर्फ़ “सही समय का इंतजार करना।” इस दुनिया में कुछ लोग सिर्फ़ इसलिए प्रयास नहीं करते हैं क्योंकि उन्हें “सही समय” का इन्तज़ार रहता है। इसी तरह कुछ लोग “अनुकूल परिस्थितियों” का इन्तज़ार करते हैं, तो कुछ “थोड़ा और अनुभव” लेने के लिए रुके रहते हैं। इतना ही नहीं कुछ लोग तो दूसरों से मिलने वाले “मोटिवेशन” या “भरोसे” के इन्तज़ार में ही रुके रहते हैं। इस विषय में मेरा तो ऐसे सभी लोगों को एक ही सुझाव है, जीवन में बदलाव की शुरुआत बाहर से नहीं, भीतर से होती है। एक बीज जब मिट्टी के नीचे दबा होता है तो उसके पास आदर्श परिस्थितियाँ नहीं होतीं। वहाँ तो चारों ओर अंधेरा और कीचड़ होता है; दबाव होता है; संघर्ष होता है। फिर भी वह मिट्टी को चीरकर बाहर आता है। क्यों? क्योंकि उसके भीतर विपरीत परिस्थितियों के बाद भी बढ़ने की अदम्य इच्छाशक्ति होती है।


दोस्तों, मनुष्य का जीवन भी ऐसा ही है। जब तक हम अपनी शुरुआत की जिम्मेदारी दूसरों पर डालते रहेंगे, तब तक हम वहीं खड़े रहेंगे। कई लोग अपनी असफलता के लिए परिस्थितियों को दोष देते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि अक्सर हमारी सबसे बड़ी रुकावट हमारा डर होता है। यह डर कई बार असफल होने का होता है, तो कई बार लोगों की राय का। लेकिन इस विषय में मेरी एक बात हमेशा याद रखिए, आज तक कोई भी महान शुरुआत सौ प्रतिशत अनुकूल और पूर्ण परिस्थितियों में नहीं हुई है। याने हर सफल व्यक्ति ने शुरुआत अनिश्चितता के बीच ही की थी। याद रखिएगा, जीवन में गति तभी आती है जब हम पहला कदम उठाते हैं। नदी भी तब तक बहना शुरू नहीं करती जब तक वह अपने स्रोत से निकलने का साहस नहीं करती।


दोस्तों, आपके भीतर अपार संभावनाएँ हैं। लेकिन वह तभी जागेंगी जब आप खुद पर विश्वास करना शुरू करेंगे। इसलिए दूसरों की स्वीकृति का इंतज़ार मत कीजिए। हर व्यक्ति आपकी सोच को नहीं समझेगा। कुछ लोग आपका मज़ाक उड़ाएँगे, कुछ आपको रोकने की कोशिश करेंगे, और कुछ आपकी क्षमता पर सवाल उठाएँगे। ऐसी स्थिति में बस ख़ुद को याद दिलाइयेगा, “जीवन उन लोगों का साथ देता है, जो भीतर से स्पष्ट और शांत होते हैं।”


महान दार्शनिक मार्क्यूज ऑरेलियस ने कहा था, “मनुष्य जितना शांत मन के करीब आता है, उतना ही वह शक्ति के करीब पहुँचता है।” सच यही है। असली ताकत शोर में नहीं, भीतर की स्थिरता में होती है। जब मन शांत होता है, तो निर्णय स्पष्ट होते हैं। जब निर्णय स्पष्ट होते हैं, तो कदम मजबूत होते हैं और जब कदम मजबूत होते हैं, तो रास्ते अपने आप बनने लगते हैं। इसलिए जीवन में हर समय आदर्श परिस्थितियों का इंतज़ार मत कीजिए क्योंकि कई बार परिस्थितियाँ हमारे कदम बढ़ाने के बाद ही बदलती हैं।


एक बात और याद रखिएगा, आपकी क्षमता को जगाने की चाबी किसी और के पास नहीं है। वह आपके अपने भीतर है। इसलिए उठिए, खुद पर विश्वास रखिए, और छोटे कदमों से ही सही, शुरुआत कीजिए क्योंकि जब भीतर का विश्वास जागता है, तो साधारण इंसान भी असाधारण रास्ते बना देता है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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