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समस्या बच्चों में नहीं होती…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • 20 hours ago
  • 3 min read

May 13, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, दुनिया में कोई भी बच्चा कमजोर पैदा नहीं होता। हर बच्चे के भीतर एक अद्भुत संभावना छिपी होती है। लेकिन उस संभावना को पहचानना, उसे सही दिशा देना और सही लोगों तक पहुँचाना—यही माता-पिता और शिक्षकों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। अक्सर हम बच्चों को उनकी रिपोर्ट कार्ड से मापने लगते हैं। अगर बच्चा हमारी अपेक्षाओं के अनुसार प्रदर्शन न करे, तो हम उसे “कमज़ोर”, “जिद्दी” या “नालायक” कह देते हैं। लेकिन सच यह है कि कई बार समस्या बच्चे में नहीं होती… समस्या यह होती है कि हम उसकी भाषा, उसके भाव, उसकी लिमिटेशन समझ नहीं पाते। इस बात का एहसास मुझे भारतीय स्कूल, उज्जैन में सुश्री पॉलोमी घोष द्वारा प्रस्तुत एकल नाट्य प्रस्तुति ‘अंधकार से प्रकाश की ओर’ देखते वक्त हुआ जो महान व्यक्तित्व हेलेन कैलर के जीवन पर आधारित था। आइए, सर्वप्रथम हम हेलेन की जीवन यात्रा को संक्षेप में जान लेते हैं।


हेलेन का जन्म अमेरिका के एक छोटे से शहर तस्कुम्बिया, अलबामा में २७ जून १८८० में हुआ था। जब वे केवल 19 महीने की थी, तब एक बीमारी ने उनसे देखने और सुनने की क्षमता छीन ली। कल्पना कीजिए उस बच्ची की दुनिया कैसी रही होगी, न आवाज़, न रोशनी, न संवाद। वे दुनिया को अपनी बातें समझाना चाहती थी; उनसे जुड़ना चाहती थी लेकिन अक्षमता की वजह से वे उनसे जुड़ नहीं पा रही थी। इस असफलता ने उन्हें चिड़चिड़ा और गुस्सैल बना दिया था।


बच्ची को इस हाल में देख उनके माता-पिता भी परेशान थे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने यह स्वीकार किया कि उनकी बेटी को सिर्फ दया नहीं, सही मार्गदर्शन की आवश्यकता है। उन्होंने सही मार्गदर्शक को खोजने के लिए अपने संपर्कों का इस्तेमाल किया और जल्द ही एक यूनिवर्सिटी के माध्यम से ऐनी सुलिवन नामक शिक्षिका तक पहुँच गए, जिन्होंने स्वयं बचपन में ग़रीबी, संघर्ष और आंशिक दृष्टिहीनता का सामना किया था।


मात्र 20 वर्ष की उम्र में ऐनी सुलिवन हेलन के घर पहुँचीं। उनके लिए शुरुआत आसान नहीं थी। जरा-जरा सी बातों पर हेलन उन्हें मारती, चीज़ें फेंकतीं, गुस्सा करती। लेकिन ऐनी ने एक बात समझ ली थी कि यह बच्ची जिद्दी नहीं है, यह भीतर से अव्यक्त भावनाओं से भरी हुई है। इस समझ के कारण ही जल्द ही वह ऐतिहासिक क्षण आया, जिसने दुनिया बदल दी। एक दिन ऐनी सुलिवन हेलन को पानी के हैंडपंप के पास ले गईं और उन्होंने हेलन के हाथ पर बहते पानी का स्पर्श कराया और दूसरी हथेली पर उँगलियों से लिख दिया“W-A-T-E-R”। यह देख अचानक हेलन के चेहरे पर चमक आ गई। पहली बार उन्हें समझ आया कि हर चीज़ का एक नाम होता है। यह बात कितनी महत्वपूर्ण थी इस बात का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि हेलन ने बाद में उस दिन को “अपनी आत्मा का जन्मदिन” कहा था।


दोस्तों, ऐनी ने शिक्षक के रूप में हेलेन को सिर्फ शब्द नहीं सिखाए, उन्होंने एक बंद आत्मा के दरवाजे खोल दिए। आगे चलकर वही हेलन केलर दुनिया की पहली अंधी और बहरी महिला बनीं जिन्होंने कॉलेज की डिग्री प्राप्त की। उन्होंने किताबें लिखीं, लाखों लोगों को प्रेरित किया और दुनिया को यह सिखाया कि सीमाएँ शरीर में नहीं, सोच में होती हैं। लेकिन सोचिए, अगर उनके माता-पिता यह मान लेते कि “अब कुछ नहीं हो सकता” और अगर वे सही व्यक्ति की तलाश न करते तो क्या होता?, शायद दुनिया हेलन केलर को कभी जान ही नहीं पाती।


इसलिए दोस्तों, माता-पिता का काम सिर्फ बच्चों को पालना नहीं है, उन्हें समझना, उनकी वास्तविक समस्या पहचानना और सही मार्गदर्शक तक पहुँचाना भी है और एक सच्चा शिक्षक सिर्फ पढ़ाता नहीं, वह बच्चे के भीतर छिपे हुए भविष्य को देखता है। याद रखिएगा दोस्तों, हर बच्चा एक अधूरी कविता की तरह होता है, जिसे माता-पिता जन्म देते हैं, लेकिन एक महान शिक्षक उसे अर्थ देता है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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