माफी मांगना पराजय नहीं, बल्कि आत्मविजय है!!!
- Nirmal Bhatnagar

- 1 hour ago
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June 13, 2026
फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, एक बड़ा साधारण लेकिन संभावनाओं से भरा शब्द है “सॉरी”, जिसे आवश्यकता पड़ने पर बहुत सारे लोग बोलने से बचते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि इससे उनका सम्मान कम हो जाएगा, उनकी छवि कमजोर पड़ जाएगी या लोग उन्हें गलत समझ लेंगे। लेकिन मेरी नजर में सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत है। “सॉरी” कहना याने माफी मांगना कमजोरी का नहीं, बल्कि आत्मबल, आत्मविश्वास और परिपक्वता का प्रमाण है। जो व्यक्ति अपनी गलती स्वीकार कर सकता है, वही वास्तव में स्वयं को समझता है।
याद रखिएगा, अहंकारी व्यक्ति हमेशा स्वयं को सही साबित करने में लगा रहता है, जबकि बुद्धिमान व्यक्ति संबंधों को सही रखने का प्रयास करता है। जब हम “मुझे खेद है” कहते हैं, तब हम किसी दूसरे व्यक्ति के सामने नहीं झुकते, बल्कि अपने अहंकार पर विजय प्राप्त करते हैं। यह स्वीकार करना कि “हाँ, मुझसे गलती हुई है”, आत्मसम्मान को कम नहीं करता बल्कि चरित्र को ऊँचा उठाता है।
दोस्तों, दुर्भाग्य से आज अनेक रिश्ते किसी बड़ी वजह से नहीं टूटते। वे टूटते हैं क्योंकि दोनों पक्ष अपने-अपने अहंकार की रक्षा में लगे रहते हैं। दोनों सही साबित होना चाहते हैं, लेकिन कोई संबंध बचाने की पहल नहीं करना चाहता। परिणामस्वरूप, वर्षों का विश्वास कुछ क्षणों की जिद में बिखर जाता है। इसलिए ही मैं हमेशा कहता हूँ, हर बहस जीतना सफलता नहीं है। कई बार हारकर भी संबंध जीत लेना सबसे बड़ी जीत होती है। इसलिए ही तो कहते हैं, “दिल से कहा गया ‘मुझे माफ कर दीजिए’ उन दरवाजों को खोल देता है जिन्हें तर्क, बहस और स्पष्टीकरण कभी नहीं खोल पाते।”
दोस्तों, माफी मांगना केवल दूसरे व्यक्ति को सम्मान देना नहीं है, यह स्वयं को भीतर से मुक्त करना भी है क्योंकि अहंकार मन पर बोझ डालता है, जबकि विनम्रता मन को हल्का कर देती है। इसलिए अगली बार यदि आपको महसूस हो कि आपसे कोई गलती हुई है, तो माफी मांगने में देर मत कीजिए। हो सकता है आपका एक विनम्र शब्द किसी टूटते हुए रिश्ते को बचा ले, किसी आहत हृदय को सुकून दे दे और आपके व्यक्तित्व को पहले से अधिक महान बना दे। याद रखियेगा, साधारण इंसान और महान व्यक्तित्व दोनों ही गलती करते हैं, बस दोनों में अंतर इतना है की साधारण इंसान गलती स्वीकारने से बचता है और महान लोग अपनी गलती स्वीकार करने का साहस रखते हैं। वे जानते हैं कि क्षमा मांगने से व्यक्ति छोटा नहीं होता, बल्कि उसका चरित्र बड़ा हो जाता है। जो झुककर “मुझे खेद है” कह सकता है, वही ऊँचा उठकर जीवन जी सकता है।
बस दोस्तों “सॉरी” कहते वक्त इस अंतिम बात को याद रखियेगा। “सॉरी” शब्द केवल होंठों से नहीं, अहंकार से निकलना चाहिए क्योंकि होंठों से निकला सॉरी विवाद समाप्त करता है, लेकिन हृदय से निकला सॉरी रिश्ते बचा लेता है।”
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर




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