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सिर्फ़ ख़ुद को नहीं, दूसरों को भी ऊपर उठाएँ !!!

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • 3 days ago
  • 3 min read

June 10, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


चलिए दोस्तों, आज के लेख की शुरुआत एक प्रश्न से करते हैं, किसी भी व्यक्ति के जीवन की सबसे सुंदर और सबसे मानवीय उपलब्धि क्या है? क्या वह धन है, जिसे हम जीवन भर कमाने में लगे रहते हैं या वह कोई विशेष पद है, जिसके लिए हम संघर्ष करते हैं? अथवा वह उपलब्धि प्रसिद्धि है, जिसकी चाहत हमें निरंतर दौड़ाती रहती है? मेरी दृष्टि में तो नहीं।


दोस्तों, मेरा तो मानना है की किसी भी इंसान के जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि किसी निराश व्यक्ति के जीवन में आशा का दीपक जलाना है। जब कोई व्यक्ति परिस्थितियों से टूट रहा हो और आप उसे सम्भाल लें, जब कोई हार मानने वाला हो और आप उसके भीतर विश्वास जगा दें, जब कोई अंधेरे में रास्ता खोज रहा हो और आप उसे दिशा दिखा दें, तब आप केवल उसकी सहायता नहीं कर रहे होते, बल्कि उसके जीवन में आशा का एक बीज बो रहे होते हैं; दुविधा और संभावना के बीच एक पुल बना रहे होते हैं।


दोस्तों इस आधुनिक युग में आज संसाधनों की कमी नहीं है। विज्ञान ने हमें अभूतपूर्व सुविधाएँ दी हैं। तकनीक ने दूरियों को समाप्त कर दिया है। जानकारी हमारी उंगलियों पर उपलब्ध है। लेकिन इसके बावजूद लोगों के चेहरों पर चिंता, मन में असुरक्षा और जीवन में खालीपन बढ़ता जा रहा है। सीधे शब्दों में कहूँ तो आज लोगों के पास साधन हैं, लेकिन सुकून नहीं। संपत्ति है, लेकिन संतोष नहीं। संपर्कों की लंबी सूची है, लेकिन सच्चे संबंध नहीं। इसीलिए मेरा मानना है की आज मानवता की सबसे बड़ी आवश्यकता धन नहीं, बल्कि आशा है। याद रखियेगा, एक निराश व्यक्ति को उपदेश की नहीं, विश्वास की आवश्यकता होती है। उसे यह महसूस कराने की आवश्यकता होती है कि वह अकेला नहीं है, कोई उसके साथ खड़ा है। कई बार हमारे द्वारा बोला गया एक सकारात्मक वाक्य, किसी की पूरी सोच बदल सकता है। कई बार हमारी एक छोटी-सी प्रशंसा, किसी के आत्मविश्वास को नया जीवन दे सकती है।


दोस्तों, ज्ञान और बुद्धिमत्ता की भी यही विशेषता है। एक अफ्रीकी कहावत के अनुसार, “बुद्धि अग्नि के समान है, लोग उसे दूसरों से प्राप्त करते हैं।” बात सही भी है और शायद इसीलिए कहा जाता है “ज्ञान बाँटने से घटता नहीं, बढ़ता है।” एक दीपक दूसरे दीपक को जलाता है तो उसका प्रकाश कम नहीं होता, बल्कि अंधकार और कम हो जाता है। इसी प्रकार एक शिक्षक अपने विद्यार्थियों को ज्ञान देता है, माता-पिता अपने बच्चों को संस्कार देते हैं, और अनुभवी लोग अपने अनुभवों के माध्यम से अगली पीढ़ी को दिशा देते हैं। यही प्रक्रिया समाज को आगे बढ़ाती है।


दुर्भाग्य से आज लोग जानकारी तो बहुत एकत्र कर रहे हैं, लेकिन बुद्धिमत्ता साझा करने में कंजूसी कर रहे हैं। हम अपने अनुभवों को अपने तक सीमित रखते हैं, जबकि हो सकता है वही अनुभव किसी दूसरे व्यक्ति को वर्षों की भटकन से बचा ले। याद रखिएगा, आपका संघर्ष किसी और के लिए प्रेरणा बन सकता है। आपकी सीख किसी और की दिशा बन सकती है। आपका अनुभव किसी और की गलती रोक सकता है। और आपका एक सही शब्द किसी के जीवन का निर्णायक मोड़ बन सकता है।


दोस्तों, जब भी अवसर मिले, किसी के जीवन में आशा का कारण बनिए। किसी निराश व्यक्ति को प्रोत्साहित कीजिए। किसी भ्रमित व्यक्ति को दिशा दीजिए। किसी असफल व्यक्ति को यह विश्वास दिलाइए कि यह अंत नहीं है क्योंकि जीवन के अंत में लोग यह नहीं याद रखेंगे कि आपने कितना कमाया था, कौन-सा पद पाया था या कितनी प्रसिद्धि अर्जित की थी। वे यह याद रखेंगे कि आपने कितने लोगों के जीवन में आशा जगाई, कितने टूटे हुए दिलों को सम्भाला और कितनों के अंधेरे रास्तों पर प्रकाश बनकर खड़े रहे। याद रखियेगा, सच्ची महानता स्वयं ऊँचा उठने में नहीं, बल्कि दूसरों को भी ऊपर उठाने में है। और यही वह पुल है जो निराशा के समुद्र पर आशा की राह बनाता है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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