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सच्चे रिश्ते, सच्चा सुख लाते हैं…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • Jul 20, 2025
  • 3 min read

July 20, 2025

फिर भी ज़िंदगी हसीन है...

दोस्तों, इंसानी जीवन का ताना-बाना संबंधों याने रिश्तों के आस-पास ही बुना हुआ होता है और इसीलिए इसके महत्व को शब्दों से नहीं समझाया जा सकता। ये रिश्ते ही हमें सहारा देते हैं, कठिनाइयों में साथ खड़े रहते हैं और हमारी खुशियों में चार चांद लगाते हैं। वैसे मैं आपको कोई नई बात नहीं बता रहा हूँ। यह सब मैंने सिर्फ़ भूमिका बनाने के लिए कहा है। मैं तो इसके माध्यम से सिर्फ इतना पूछना चाहता हूँ कि जब हम सब जानते हैं कि हमारे जीवन का ताना-बाना रिश्तों के आसपास बुना रहता है तो फिर हम हर रिश्ते को जीवन भर क्यों नहीं चला पाते हैं? आख़िर क्यों, कुछ रिश्ते समय के साथ और भी मजबूत होते जाते हैं, और कुछ रिश्ते थोड़े ही समय में बिखर जाते हैं?


मेरी नजर में इसका उत्तर बड़ा सीधा और सरल है। रिश्ते चलेंगे या बिखरेंगे यह इस बात पर निर्भर करता है कि उन रिश्तों की नींव किन बातों से पड़ी थी। अगर रिश्ते की शुरुआत सच्ची भावनाओं याने अपनापन, विश्वास और प्रेम से हुई है, तो ऐसे रिश्ते जीवनभर चलेंगे। इन रिश्तों को तोड़ना बहुत मुश्किल होता है। फिर चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों, भावनाओं से जुड़े रिश्ते हर तूफान को सह लेते हैं। उदाहरण के लिए, माँ-बाप और बच्चों का रिश्ता। इसमें न कोई स्वार्थ होता है और न कोई लालच। यह रिश्ता केवल प्रेम और अपनत्व पर आधारित है। इसलिए यह दुनिया के सबसे मजबूत रिश्तों में से एक है।


इसके विपरीत अगर रिश्ता स्वार्थ पर आधारित हो, याने जिसमें भावनाओं से ज़्यादा लाभ-हानि महत्वपूर्ण हो, वो रिश्ता बीतते समय के साथ खत्म हो जायेगा; टिक नहीं पायेगा। दूसरे शब्दों में कहूँ तो स्वार्थ के ख़त्म होते ही, रिश्ता भी ख़त्म हो जायेगा। ऐसे रिश्ते हमें केवल अस्थायी सुख देते हैं।


दोस्तों, दिखावे से भरपूर, इस भौतिक युग में आज जहाँ ज्यादातर लोग सिर्फ और सिर्फ अपने विषय में सोच जीवन जी रहे हैं, वहाँ रिश्तों से आत्मीयता, अपनापन, भावनायें आदि का ग़ायब होना स्वाभाविक सा लगने लगा है और मेरी नजर में यही सोच याने “मुझे क्या मिलेगा” या “इसमें मेरा क्या फायदा”, रिश्तों को कमजोर करता जा रहा है। जो कहीं ना कहीं जीवन को ना सिर्फ़ एकाकी बनाते जा रहा है, बल्कि इसके साथ ही कई मानसिक बीमारियों को भी जन्म दे रहा है।


दोस्तों, अगर आप ख़ुद को, अपने परिवार और समाज को इससे बचाना चाहते हैं तो सबसे पहले यह स्वीकारिये कि रिश्ते लाभ का सौदा नहीं बल्कि जीवन की सुंदरता होते हैं। जी हाँ, अगर आप जीवनभर के मजबूत रिश्ते बनाना चाहते हैं तो उनमें भावनायें पैदा कीजिए। उनमें ईमानदारी, विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता का तड़का लगाइए। तभी दिल की गहराइयों वाले रिश्ते बनेंगे। किसी से प्यार करें तो दिल से करें, केवल सुविधाओं के लिए नहीं।


याद रखियेगा दोस्तों, जीवन का असली सुख पैसों, पद या सफलता से नहीं, बल्कि सच्चे रिश्तों से आता है। ऐसे रिश्ते जिनमें भावनाओं की खुशबू हो, जो हमें हर हाल में अपनापन दें। तो आइए, आज हम सब एक संकल्प लेते हैं कि ‘आज से हम स्वार्थ पर नहीं, भावनाओं पर आधारित रिश्ते बनाएंगे। जब भी किसी से जुड़ेंगे, दिल से जुड़ेंगे क्योंकि हम जानते हैं कि स्वार्थ खत्म होते ही स्वार्थ आधारित रिश्ता खत्म हो जाता है, लेकिन भावनाओं से बने रिश्ते समय के साथ और भी खूबसूरत हो जाते हैं।


इसलिए ही कहा जाता है “रिश्ते दिल से निभाए जाते हैं, क्योंकि जहाँ दिल जुड़ते हैं, वहाँ रिश्ते अमर हो जाते हैं।” इसलिए दोस्तों, अपने रिश्तों को प्यार, विश्वास और संवेदना से सींचें और देखें, आपका जीवन कितनी खुशियों से भर जाता है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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