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सीखें परिस्थितियों से ऊपर उठकर जीना…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • 3 hours ago
  • 3 min read

Mar 15, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, इस दुनिया में हमारा सामना दो तरह के लोगों से होता है, पहले वे जो हमें प्रेरणा देते हैं, हमें सहयोग कर, जीवन में आगे बढ़ने की ऊर्जा देते हैं और दूसरे वे जो अपनी नकारात्मक सोच के कारण हमेशा हमारी आलोचना करते हैं, गलत अफवाहें फैलाते हैं और छोटी-मोटी बातों पर भी राजनीति करने से बाज नहीं आते हैं। कुल मिलाकर कहूँ तो ये लोग हमेशा दूसरों को नीचा दिखाने या गिराने में ही लगे रहते हैं। इन दोनों तरह के लोगों का असर सीधे तौर पर हमारी सोच पर पड़ता है। सकारात्मक सोच वाले लोगों का साथ हमें जहाँ जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है, वहीं नकारात्मक सोच वाले लोगों का साथ इंसान को मानसिक रूप से थका देता है। जिसके कारण बीतते समय के साथ इंसान का ध्यान अपने काम से हटकर दूसरी बातों में उलझने लगता है।


दोस्तों, इसका सीधा-सीधा अर्थ हुआ हमारे आसपास का वातावरण तय करता है कि हम अपने जीवन को सफलतापूर्वक जी पायेंगे या नहीं। लेकिन दोस्तों, अगर आप भारतीय दर्शन से प्रेरणा लेकर जीवन जिएँ तो आप हर हाल में ख़ुशहाल जीवन जी सकते हैं। उदाहरण के लिए माता लक्ष्मी के प्रिय अद्भुत फूल कमल को ही ले लीजिए, जिसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वह कीचड़ में जन्म लेता है, उसी पानी में रहता है, लेकिन उस कीचड़ से कभी गंदा नहीं होता। पानी की बूंदें उसकी पंखुड़ियों को छूती हैं, लेकिन उस पर टिक नहीं पातीं। वह उसी वातावरण में रहते हुए भी उससे ऊपर उठकर खिलता है।


इस सिद्धांत को समझाते हुए भगवान श्रीकृष्ण ने भगवद्गीता में कहा था कि जो व्यक्ति अपने कर्तव्य को निस्वार्थ भाव से करता है और परिणामों के मोह में नहीं उलझता, वह संसार की नकारात्मकता से अछूता रहता है, ठीक उसी तरह जैसे कमल का पत्ता पानी में रहकर भी भीगता नहीं।


दोस्तों, यह शिक्षा आज के समय में और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। आधुनिक कार्यस्थलों में प्रतिस्पर्धा और तनाव के साथ, कई बार अपका सामना ईर्ष्या और आलोचना से भी होता है। ऐसे में यदि हम हर टिप्पणी, हर अफवाह और हर नकारात्मक व्यवहार पर ध्यान देने लगेंगे, तो हमारी ऊर्जा अनावश्यक कारणों से ही व्यर्थ हो जाएगी। इसलिए ही कहा जाता है कि जो व्यक्ति हर बात को मन में ले लेता है, वह धीरे-धीरे अपनी शांति खो देता है। लेकिन जो व्यक्ति कमल की तरह ऊपर उठना सीख लेता है, वही वास्तव में आगे बढ़ पाता है।


दोस्तों, कमल कीचड़ में रहकर भी उससे बचे रहना; हमें जीवन की एक गहरी सीख देता है, दुनिया हमेशा वैसी नहीं होती, जैसी हम चाहते हैं। लेकिन हम यह तय कर सकते हैं कि हम उस दुनिया में कैसे रहेंगे और उस पर कैसा प्रभाव छोड़ेंगे। लेकिन इसके लिए आपको आसपास मौजूद नकारात्मक लोगों से लड़ना छोड़ना होगा ताकि आप अपनी ऊर्जा सही कार्यों में लगा सकें। इसलिए अपने काम पर ध्यान दीजिए, अपनी जिम्मेदारियों को ईमानदारी से निभाइए और अपने लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ते रहिए और इसके लिए हमेशा याद रखिए, कीचड़ कमल को खिलने से रोक नहीं सकता, बल्कि उसी से उसकी सुंदरता और बढ़ जाती है। इसी तरह जीवन की कठिन परिस्थितियाँ और नकारात्मक लोग भी हमें रोक नहीं सकते, बस इसके लिए हमें अपने मन को स्वच्छ और उद्देश्य को स्पष्ट रखना होगा।


दोस्तों, इसके लिए आपको सिर्फ एक कार्य करना है, इस दुनिया में तमाम नकारात्मकता के बीच रहते हुए भी उसे अपने भीतर बसने से बचाना है। इसलिए कमल की तरह खिलिए, अपने कर्तव्य पर ध्यान दीजिए और अपने चरित्र से ही दुनिया को उत्तर दीजिए क्योंकि इस दुनिया में अंततः वही व्यक्ति सफल होता है जो परिस्थितियों से ऊपर उठ कर जीना सीख लेता है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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