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सफलता के 3 व्यवहारिक सूत्र…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • 4 days ago
  • 3 min read

Jan 3, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

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दोस्तों, जीवन में हर कोई बड़े लक्ष्य और ऊँचाइयाँ पाना चाहता है, लेकिन वास्तविकता यह है कि 90% से अधिक लोग अपने लक्ष्य तक पहुँच ही नहीं पाते। मेरी समझ में इसकी सबसे बड़ी वजह है, पट्टी बँधी आँखों से जीवन जीना, यानी धारणाओं, सीमित सोच और “मैं ही सही हूँ” वाले नजरिये में फँसे रहना। अगर आप उन 10% लोगों में शामिल होना चाहते हैं जो सच में आगे बढ़ते हैं, प्रभाव डालते हैं और सफल होते हैं, तो आपको अपनी सोच, सुनने की आदत और लोगों को देखने का तरीका बदलना होगा। आइए, सफलता के इन व्यावहारिक सूत्रों को समझते हैं—


पहला सूत्र – जीवन की “बड़ी तस्वीर” देखना सीखिए

अक्सर हम अपनी ही सोच के दायरे में उलझे रहते हैं। यही सीमित सोच हमें आगे बढ़ने से रोकती है। इससे बाहर निकलने के लिए खुद से ये प्रश्न पूछिए—

1) क्या मैं सीमित सोच के आधार पर निर्णय ले रहा हूँ?

2) क्या मैंने दूसरे व्यक्ति या विभाग का दृष्टिकोण समझने की कोशिश की है?

3) क्या यह संभव है कि मैं इस विषय में पूरी तरह सही ना हूँ?

ये प्रश्न आपके अहंकार को नहीं, आपकी समझ को बड़ा करेंगे। याद रखिए— जो व्यक्ति बड़ी तस्वीर देख पाता है, वही बड़ा निर्णय ले पाता है।


दूसरा सूत्र – सुपर पावर चाहिए तो सुनना सीखिए

आज की दुनिया में बोलना नहीं, सुनना एक सुपर पावर बन चुका है। सफल प्रोफेशनल्स की सबसे बड़ी ताकत है, एक्टिव लिस्निंग।

इसके लिए—

1) मीटिंग में पहले ध्यान से सुनिए, फिर बोलिए।

2) बीच में टोके बिना सामने वाले की पूरी बात समझिए।

3) जवाब देने की जल्दी छोड़िए, समझने पर ध्यान दीजिए।

जो व्यक्ति सुनना जानता है, वह लोगों को समझता है, और जो लोगों को समझता है, वही नेतृत्व कर पाता है।


तीसरा सूत्र – विविधता याने डाइवर्सिटी की शक्ति को पहचानिए

अक्सर लोग अपने जैसे सोचने वालों के साथ काम करना पसंद करते हैं। यह आरामदायक तो होता है, लेकिन विकास नहीं देता। दुनिया की बड़ी कंपनियाँ— जैसे Google, Microsoft— इसलिए आगे हैं क्योंकि वे अलग-अलग सोच और दृष्टिकोण का सम्मान करती हैं। अगर आप भी बड़ी सफलता चाहते हैं, तो—

1) दूसरे विभागों के साथ सहयोग बढ़ाइए।

2) जूनियर्स की राय सुनिए—वे नई सोच लाते हैं।

3) क्रॉस-फंक्शनल प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बनिए।


विविधता का जादू निजी जीवन में भी काम करता है। उदाहरण के लिए— पत्नी कहती है, “तुम हमेशा काम में बिज़ी रहते हो।” जवाब में पति कहता है, “मैं तो परिवार के लिए ही काम कर रहा हूँ।” दोनों अपनी-अपनी जगह सही हैं। समस्या सोच में नहीं, दृष्टिकोण न समझ पाने में है। जिस दिन हम सामने वाले की नज़र से देखना सीख लेते हैं, उसी दिन टकराव संवाद में बदल जाता है।


आधुनिक प्रोफेशनल के रूप में अगर आप विविधता की शक्ति से करियर और जीवन दोनों में ग्रोथ चाहते हैं, तो निम्न तीन बातों को अपने दैनिक अभ्यास में शामिल कर लीजिए-

1) हर सुबह खुद से पूछिए, “आज मैं किसका दृष्टिकोण समझने की कोशिश करूँगा?”

2) ऑफिस में किसी दूसरे विभाग के व्यक्ति के साथ छोटी-सी कॉफ़ी चैट कीजिए।

3) दिन के अंत में सोचिए, “आज मैंने किससे, क्या नया सीखा?”


अंत में इतना ही कहूँगा कि सफलता सिर्फ मेहनत से नहीं आती, सही सोच, सही सुनने और सही समझ से आती है। जो व्यक्ति धारणाओं से ऊपर उठता है, सुनना सीखता है और विविधता को अपनाता है, वही 90% असफल लोगों से अलग खड़ा दिखाई देता है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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